scriptSchool building demolished to make complex | कॉम्पलेक्स बनाने के नाम पर तोड़ दिया स्कूल का बिल्डिंग, 100 से ज्यादा बच्चे जीई रोड क्रॉस कर दूसरे स्कूल में जाने मजबूर | Patrika News

कॉम्पलेक्स बनाने के नाम पर तोड़ दिया स्कूल का बिल्डिंग, 100 से ज्यादा बच्चे जीई रोड क्रॉस कर दूसरे स्कूल में जाने मजबूर

नगर निगम के अफसरों ने बिजनेस कॉम्पलेक्स बनाने के नाम पर वर्षों से चल रहे स्कूल का भवन तोड़ दिया। तब कॉम्पलेक्स के साथ नया स्कूल भवन बनाने का दावा किया गया था, लेकिन तीन साल बाद स्कूल तो दूर कॉम्पलेक्स की नींव भी ठीक से तैयार नहीं हो पाई है। इसका खामियाजा स्कूल के करीब 100 बच्चों को उठाना पड़ रहा है। ये बच्चे वैकल्पिक व्यवस्था के तहत रोज भारी ट्रेफिक वाले जीई रोड को क्रॉस कर पढ़ाई के लिए दूसरे मोहल्ले के स्कूल में जा रहे हैं।

दुर्ग

Updated: November 08, 2021 10:45:45 pm

दुर्ग. मामला गंजपारा के मिल पारा स्थिति लाल बहादुर शास्त्री प्राथमिक स्कूल का है। यह स्कूल वर्ष 1956 से संचालित था। स्कूल में आसपास के करीब 100 बच्चे कक्षा पांचवीं तक पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन निगम के अफसरों ने वर्ष 2018 में स्कूल भवन को जर्जर करार देकर व्यवसायिक कॉम्पलेक्स बनाने के नाम पर तोड़ दिया।
कॉम्पलेक्स बनाने के नाम पर तोड़ दिया स्कूल का बिल्डिंग, 100 से ज्यादा बच्चे जीई रोड क्रॉस कर दूसरे स्कूल में जाने मजबूर
तीन साल से अधूरा पड़ा है स्कूल भवन

तब अफसरों यह किया था दावा
पुराने स्कूल भवन को तोडऩे के दौरान उक्त जगह 1.78 करोड़ से व्यवसायिक कॉम्पलेक्स के साथ स्कूल भवन बनाने का ऐलान किया गया था। कॉम्पलेक्स के ग्राउंड फ्लोर में 22 दुकानों के साथ करीब 10 हजार फीट क्षेत्र में बच्चों के लिए गार्डन व आम लोगों को लिए सुलभ शौचालय बनाने की बात कही गई थी। वहीं फस्र्ट फ्लोर में स्कूल के लिए 10 कमरे बनाने की बात कही गई थी।

गायब हो गया ठेकेदार
वर्ष 2018 जून में तत्कालिन महापौर चंद्रिका चंद्राकर ने कॉम्पलेक्स निर्माण के लिए भूमिपूजन किया था। इसके साथ ही कॉम्पलेक्स निर्माण का काम भी शुरू कराया गया था, लेकिन ठेकेदार कुछ हिस्से में प्लींथ लेबल तक काम कर गायब हो गया है। जानकारी के मुताबिक ठेकेदार ने भुगतान नहीं होने के कारण काम से हाथ खींच लिया था।

बिना अनुमति तोड़ा, नहीं मिली राशि
निगम प्रशासन ने स्कूल भवन को तोडऩे के लिए सरकार से अनुमति नहीं ली। इस कारण अब नई बिल्डिंग के लिए राशि की स्वीकृति नहीं मिल रही। निगम प्रशासन ने पूर्व में राशि स्वीकृत कराकर कॉम्पलेक्स व स्कूल निर्माण की योजना बनाई थी। अब अन्य मद की राशि से कॉम्पलेक्स बनाने व दुकानों को आवंटित कर राशि से निर्माण की बात कही जा रही है।

समझे बच्चों के लिए खतरे को
जीई मार्ग शहर का सबसे व्यस्त मार्ग है। यहां 24 घंटे छोटे बड़े वाहनों की आवाजाही होती है। बच्चों को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत मिले स्कूल में जाने व आने के लिए दिन में दो बार क्रॉस करना होता है। करीब 6 से 11 साल के अधिकतर बच्चे गरीब तबके के हैं, जिन्हें स्कूल तक छोडऩे उनके पालक भी नहीं जा सकते। ऐसे में बच्चों को अकेले ही रोड क्रॉस करना पड़ता है।

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