घर में मरा पड़ा था बेटा, शव उठाने 85 साल की बेबस मां ढूंढ रही थी 4 कंधे, पड़ोसियों ने भी खींचा हाथ, तभी सामने आया सिख समाज

घर में मरा पड़ा था बेटा, शव उठाने 85 साल की बेबस मां ढूंढ रही थी 4 कंधे, पड़ोसियों ने भी खींचा हाथ, तभी सामने आया सिख समाज

Dakshi Sahu | Publish: May, 18 2019 11:20:56 AM (IST) | Updated: May, 18 2019 11:20:57 AM (IST) Durg, Durg, Chhattisgarh, India

सिख समाज के कुलवंत सिंह और गुरुद्वारा कमेटी के शव वाहन को चलाने वाले अमरजीत सिंह, राजेश सराफ और देवी जैन ने चंद्रकांत के मृत काया को कंधा देकर मुक्तिधाम पहुंचाया।

दुर्ग. आप जरा सोचिए उस बेबस बूढी मां की हालत के बारे में जिसका बेटा घर में मृत पड़ा है और अंतिम संस्कार करने वाला कोई नहीं है। बेटे के शव को कंधा देने के लिए चार आदमी भी नहीं। घर में एक बेटी है जो मानसिक रूप से कमजोर है। उसे तो इस बात का भी अहसास नहीं कि उसका भाई अब इस दुनिया में नहीं है। यह काल्पनिक नहीं एकदम हकीकत है।

युवकों ने उठाया अंतिम संस्कार का बीड़ा
मोतीपारा वार्ड 30 निवासी 85 बरस की बूढ़ी निर्मला लूथरा को ऐसी विषम परिस्थिति से गुजरना पड़ा। उसके बेटे चंद्रकांत लूथरा (58 वर्ष) की 9 मई को मौत हो गई। अकेली बूढ़ी औरत बेटे के शव को निहारते बैठी थी। वह बेबस थी। उसके आंसू सूख चुके थे। तभी इसकी जानकीर राजेश सराफ को हुई। उन्होंने इसकी सूचना सिख समाज के लोगों को दी। गुरुद्वारा कमेटी सेवा भावना से शव वाहन चलवाता है। इस सूचना के बाद सिख समाज के सदस्यों व कुछ युवकों ने अंतिम संस्कार का बीड़ा उठाया।

सिख समाज के कुलवंत सिंह और गुरुद्वारा कमेटी के शव वाहन को चलाने वाले अमरजीत सिंह, राजेश सराफ और देवी जैन ने चंद्रकांत के मृत काया को कंधा देकर मुक्तिधाम पहुंचाया। अमरजीत सिंह ने सुखमणी साहेब का पाठ किया और अरदास के बाद सिख समाज की रीति रिवाज से शव का अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि विकास शर्मा ने दी। दूसरे दिन समाज के सदस्यों ने रिति रिवाज के साथ शिवनाथ नदी में अस्थि विसर्जन किया। अंतिम अरदास कार्यक्रम मुख्य ग्रंथी ज्ञानी गहेलसिंह के मार्गदर्शन में 21 मई को स्टेशन रोड स्थित गुरुद्वारा में होगा।

अस्थि विसर्जन के लिए भी आगे आया एक परिवार
अंतिम संस्कार के दिन सिख समाज के कुलवंत सिंह और अमरजीत सिंह ने निर्णय लिया कि अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले सभी सदस्य दूसरे दिन अस्थि संकलन करने शिवनाथ तट मुक्तिधाम में एकत्र होंगे। सुबह 9 बजे तक कोई नहीं पहुंचा। तब चिखली निवासी दिवंगत परमजीत सिंह के परिवार वालों ने चंद्रकांत लुथरा का परिजन बनकर अस्थि संकलन किया और शिवनाथ नें उसका विसर्जन किया।

सिख समाज करेगा वृद्धा का सहयोग
मृतक चंद्रकात अविवाहित था। उसकी बहन मनोरोगी है। उसे यह भी अहसास नहीं कि उसका भाई अब इस दुनिया में नहीं रहा। बूढ़ी मां पारकिन्संस बीमारी से पीडि़त है। बीमारी की वजह से उसका शरीर कांपते रहता है। वह एक जगह खड़ी नही हो सकती। चलने के लिए भी सहारा चाहिए। इस हालत में भी वह घर का सारा काम खुद करती है। परिवार की स्थिति को देखते हुए सिख समाज के सद्स्यों ने निर्णय लिया है कि वे बूढ़़ी मां की हर संभव मदद करेंगे।

पड़ोसियों ने झाका तक नहीं
लुथरा परिवार मोतीपारा में स्वयं के मकान में रह रहा है। आर्थिक स्थिति खराब होने और चंद्रकांत के कुछ नहीं करने के कारण मोहल्ले ने भी परिवार से दूरियां बढ़ा ली थी। अंतिम संस्कार में भी पास पड़ोस के लोग शामिल नहीं हुए।

गठरी से निकाले मां ने लकड़ी के लिए पैसे
बेटे की अंतिम यात्रा निकालने के दौरान गुरुद्वारा कमेटी द्वारा लकड़ी की व्यवस्था की बात कानों तक पहुंचते ही बूढ़ी मां ने कहा कि कम से कम उसके बेटे का अंतिम संस्कार उसके पैसे किया जाए। उसने लकड़ी खरीदने के लिए गठरी से रुपए निकालकर दिए।

दिव्यांगों को कराएंगे भोजन
यह बात जैसे ही गुरु द्वारा के मुख्य गं्रथी ज्ञानी गहेल सिंह को मालूम हुआ तो उन्होंने कहा कि चंद्रकांत लूथरा की अंतिम संस्कार सिख परंपरा से हुई है। ग्यारहवें दिन मृत आत्मा की शांति के लिए पाठ आवश्यक है। इसलिए 21 मई को अंतिम अरदास व पाठ वे स्वयं करेंगे। नव दृष्टि फाउंडेशन के सभी सदस्य गुरुद्वारा में उपस्थित रहेंगे। नि:शक्त लोगों को शांति भोज कराएंगे।

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