ऐसा क्या हुआ कि जजाें को डॉयस की जगह मामूली कुर्सियों से चलाना पड़ा काम, बाबूओं को बैठना पड़ा जमीन पर

फैमिली कोर्ट की कोर्ट परिसर से शिफ्टिंग से नाराज वकीलों ने को न्यायालयीन कामकाज बंद रखा। वकीलों के विरोध के कारण फैमिली कोर्ट के सामानों की शिफ्टिंग नहीं हो पाई। इससे शिफ्टिंग वाले भवन में फैमिली कोर्ट के बाबूओं को जमीन पर बैठकर काम करना पड़ा। हालात यह रहा कि जजों ने सामान्य कुर्सियों से काम चलाना पड़ा, तो बाबूओं ने जमीन पर बैठकर पक्षकारों को सुनवाई के लिए नई तारीखें देनी पड़ी।

दुर्ग. फैमिली कोर्ट की कोर्ट परिसर से शिफ्टिंग से नाराज वकीलों ने को न्यायालयीन कामकाज बंद रखा। वकीलों के विरोध के कारण फैमिली कोर्ट के सामानों की शिफ्टिंग नहीं हो पाई। इससे शिफ्टिंग वाले भवन में फैमिली कोर्ट के बाबूओं को जमीन पर बैठकर काम करना पड़ा। हालात यह रहा कि जजों ने सामान्य कुर्सियों से काम चलाना पड़ा, तो बाबूओं ने जमीन पर बैठकर पक्षकारों को सुनवाई के लिए नई तारीखें देनी पड़ी।


34 कोर्ट में 500 प्रकरणों की सुनवाई टली
इस दौरान वकील पूरे दिन धरने की शक्ल में न्यायालय परिसर में पंडाल लगाकर बैठे रहे। इससे जिला न्यायालय के 34 कोर्ट में करीब 500 प्रकरणों पर सुनवाई नहीं हो सकी और पक्षकारों को निराश लौटना पड़ा। वकीलों ने फैमिली कोर्ट की शिफ्टिंग का फैसला बदलने तक न्यायालयीन कामकाज से अलग रहने का ऐलान किया है।


यह है वकीलों की नाराजगी का कारण
डिस्ट्रिक्ट कोर्ट परिसर में 4 फैमिली कोर्ट चल रही थी। इन्हें करीब 3 किमी दूर सिविल लाइन एरिया में शिफ्टिंग का निर्णय किया गया है। जिला अधिवक्ता संघ इससे सहमत नहीं है। जिला अधिवक्ता संघ ने एक दिन पहले ही सार्वजनिक बैठक कर कोर्ट की शिफ्टिंग का फैसला बदलने की मांग उठाई थी।


गेट पर बैठकर जताया विरोध
वकीलों की मांग के विपरीत मंगलवार की सुबह फैमिली कोर्ट के सामानों की शिफ्टिंग शुरू कर दिया गया। इसके लिए वाहन भी बुला लिया गया था। इसकी खबर लगते ही वकील कोर्ट के गेट के सामने पहुंच गए और धरने की शक्ल पर बैठ गए। इसके बाद वाहन को लौटा दिया गया।


नोटरी व दस्तावेज लेखकों का भी समर्थन
वकीलों के आंदोलन को देखते हुए न्यायालय परिसर में पुलिस बल तैनात कर दिया गया। इसके बाद वकील गेट छोड़कर पंडाल में आ गए। इसके बाद वकीलों के आह्वान पर नोटरी व दस्तावेज लेखकों ने भी समर्थन में काम बंद कर दिया। नोटरी व दस्तावेज लेखकों ने भी वकीलों के आंदोलन तक समर्थन का ऐलान किया है।


विधायक-सभापति ने दिया समर्थन
कोर्ट की शिफ्टिंग के विरोध में वकील पूरे दिन कोर्ट परिसर में पंडाल लगाकर बैठे रहे। इस बीच विधायक अरुण वोरा और निगम सभापति राजेश यादव भी कोर्ट पहुंचे और वकीलों की मांग का समर्थन किया। दोनों नेताओं का कहना था कि मामले में सभी की भावनाओं को ध्यान में रखकर निर्णय किया जाना चाहिए।


38 हजार प्रकरण पेंडिंग
डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में इस समय करीब 38 हजार प्रकरण पेंडिंग है। वकीलों के मुताबिक यहां 34 कोर्ट में हर दिन करीब ५00 प्रकरणों की सुनवाई होती है। मंगलवार को भी करीब इतने ही प्रकरणों से संबंधित पक्षकर कोर्ट पहुंचे थे, लेकिन वकीलों के कामकाज से अलग हो जाने के कारण इन पर सुनवाई नहीं हो पाई। लिहाजा पक्षकारों को नई तारीख देकर लौटा दिया गया।


फैमिली कोर्ट के पक्षकार भी भटके
वकीलों के काम नहीं करने के कारण जहां डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के पक्षकारों को बिना सुनवाई लौटना पड़ा वहीं फैमिली कोर्ट के पक्षकारों को भी भटकना पड़ा। दरअसल जगह की जानकारी नहीं होने व डिस्ट्रिक्ट कोर्ट से सीधे आवाजाही की सुविधा नहीं होने के कारण पक्षकार सिविल लाइन में नए कोर्ट को ढूंढते रहे।

Hemant Kapoor Bureau Incharge
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