नए साल में चलती ट्रेन की मात्र 8 मिनट में होगी धुलाई, प्रदेश का पहला ऑटोमैटिक वॉशिंग प्लांट दुर्ग में

रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक जनवरी 2019 में काम शुरू हो जाएगा। रेलवे के प्रदेश का यह पहला वॉशिंग प्लांट दुर्ग में लगेगा। नवंबर में इसके लिए टेंडर जारी किया गया था।

By: Dakshi Sahu

Published: 30 Dec 2018, 11:35 AM IST

दुर्ग. ट्रेनों की अत्याधुनिक तरीके से धुलाई करने के लिए रेलवे ने प्लांट लगाने की तैयारी कर ली है। स्थल चयन के बाद टेंडर भी निकाला जा चुका है। टेंडर की प्रक्रिया के बाद काम शुरू करने के लिए वर्क आर्डर जारी किया जाएगा। रेलवे के अधिकारियों के मुताबिक जनवरी 2019 में काम शुरू हो जाएगा। रेलवे के प्रदेश का यह पहला वॉशिंग प्लांट दुर्ग में लगेगा। नवंबर में इसके लिए टेंडर जारी किया गया था।

अधिकारियों का कहना है कि सप्ताह भर के भीतर टेंडर ओपन कर वर्क आर्डर जारी किया जाएगा। इसके लिए रेलवे बोर्ड मंजूरी मिल चुकी है। प्लांट में ट्रेनों की बाहरी सफाई ऑटोमैटिक वॉशिंग प्लांट से की जाएगी। प्लांट को दुर्ग रेलवे स्टेशन के वांशिग लाइन में लगाया जाएगा।

समय की होगी बचत
रेलवे के अधिकारियों का कहना है कि वर्तमान में कोचों की बाहरी धुलाई मैनुअल किया जाता है। मैनुअल सफाई करने में लगभग तीन घंटा लगता है। अत्याधुनिक प्लांट लगने से २४ कोचों की ट्रेन सिर्फ 8 मिनट में धुल जाएगी। मैनुअल सफाई में कोच की धुलाई एक निश्चित उंचाई तक होती है। प्लांट में पूरी कोच की सफाई होगी।

अभी ट्रेन को वॉशिंग लाइन में खड़ी कर धुलाई की जाती हैं। प्लांट में धुलाई के समय ट्रेन गतिमान रहेगी। करीब ८ किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से ट्रेन चलेगी। ट्रैक के दोनों ओर शॉवर लगा रहेगा। वाटर जेट शुरू होते ही ट्रैक के दोनों ओर लगी नॉयलोन और कपास ब्रश कोच की धुलाई करेगा।

रिसाइकलिंग प्लाट का पानी उपयोग में
ऑटोमैटिक प्लांट में में धुलाई में 20 प्रतिशत पानी ताजा पानी का उपयोग किया जाएगा। शेष रिसाइकिलिंग प्लांट का पानी उपयोग में लाया जाएगा। पानी की उपयोगिता को ध्यान में रखकर ही प्लांट को दुर्ग में लगाने का निर्णय लिया गया है। पीआरओ शिव प्रसाद ने बताया कि बोर्ड से स्वीकृति मिलने के बाद ही रेलवे ने टेंडर जारी किया था। टेंडर ओपन ओपन करने के बाद वर्कऑर्डर जारी किया जाएगा। हम जनवरी 2019 काम शुरू करवा देंगे।

इसलिए दुर्ग का चयन
रायपुर रेलवे स्टेशन में जगह का अभाव होने के कारण इस प्लांट को दुर्ग में लगाया जा रहा है। दूसरा प्रमुख कारण है कि यहां पर वेस्ट पानी को रिसाइकिलिंग करने दो साल पहले ही प्लांट लगाया गया है। वेस्ट पानी को फिल्टर कर ही वर्तमान में ट्रेनों की धुलाई की जा रही है।

Dakshi Sahu Desk/Reporting
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