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CG Agriculture - बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, धान के साथ सब्जियों की फसल पर खतरा

हवा के चक्रवाती प्रभाव के कारण जिले में पिछले तीन-चार दिनों से हल्की बारिश हो रही है। इससे किसानों की सालभर की मेहनत और खेतों और खलिहानों में सहेजकर रखी फसल के भीगकर खराब होने का खतरा है। बारिश के कारण आगे फसल की कटाई, मिंजाई से लेकर धान को सहेजकर रखने में परेशानी होगी। दूसरी ओर सब्जियों की फसल पर भी कीट व्याधि का खतरा बढ़ गया है।

दुर्ग

Published: November 15, 2021 10:07:16 am

दुर्ग. जिले में इस बार मानसून की शुरूआत अच्छी रही। इस कारण अधिकतर किसानों की बोनी भी समय पर हो गया। अनुकूल मौसम के कारण अब अरली वेरायटी की धान पकने और कटाई की स्थिति में हैं। कई इलाकों में अरली वेरायटी की धान की कटाई भी शुरू हो चुकी है। इधर पिछले तीन-चार दिनों से चक्रवाती प्रभाव से लगातार बदली व बारिश का मौसम चल रहा है। आगे भी प्रदेश के साथ जिले के कई हिस्सों में भी बारिश की आशंका जताई जा रही है।
CG Agriculture - बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, धान के साथ सब्जियों की फसल पर खतरा
बेमौसम बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता, धान के साथ सब्जियों की फसल पर खतरा

खेत में या खलिहाल में पैदावार
जिले में 15 से 20 फीसदी तक धान की कटाई हो चुकी है। वहीं करीब 80 से 85 फीसदी फसल अब भी खेतों में कटाई के लिए तैयार है। दूसरी ओर मिंजाई के लिए बाकी और मिंजाई के बाद भी धान खरीदी शुरू होने के इंतजार में अब भी खलिहानों में रखा है। बारिश से इन्हें बचाना मुश्किल काम होगा।

हवा से जमीन पर झुक रहे पौधे
बदली-बारिश के साथ चक्रवाती प्रभाव के कारण हवा भी चल रही है। इससे खेतों में बालियां वजन होने से धान के पौधे जमीन पर झुक रहे हैं। ऐसे में बालियों में नमी अथवा पानी में डूब जाने का खतरा रहता है। ऐसा होने से बीज में अकुरण व पैदावार के साथ धान की क्वालिटी प्रभावित होना तय है।

मशीनों से कटाई होगी प्रभावित
अधिकतर किसान धान की कटाई हार्वेस्टर के माध्यम से कराते हैं। बारिश के कारण खेतों में पानी का जमाव हो रहा है। ऐसे में लंबे समय तक खेतों की मिट्टी गीली रह सकती है। इससे हार्वेस्टर से फसलों की कटाई संभव नहीं होगा। दूसरी पानी के कारण लेबर से भी कटाई प्रभावित होगा। कटाई लेट हुआ तो नुकसान तय है।

सहेजकर रखने में भी परेशानी
मेनुअल लेबर से कटाई की स्थिति में फसल को खलिहानों में लाकर मिंजाई करना पड़ेगा। बारिश के कारण खलिहान भी गीला हो गया है। ऐसे में खलिहानों के सूखने का इंतजार करना पड़ेगा। दूसरी ओर धान गीला होने से बिक्री में भी परेशानी हो सकती है। ऐसे में किसानों को धान सहेजकर रखना भी पड़ सकता है।

सब्जियों में कीड़े, टमाटर के गिरने का खतरा
बेमौसम बदली व बारिश से सब्जियों की फसल पर बेहद विपरीत प्रभाव का खतरा है। नमी के कारण गोभी, लौकी, भिंडी व दूसरी सब्जियों में कीट व्याधि बढ़ेगा। भाजी की फसल में भी कीट प्रकोप के साथ गलने का खतरा रहेगा। वहीं टमाटर के प्री-मेच्योर होकर पौधों से गिरने का खतरा रहेगा। उमस व नमी वाले मौसम में टमाटर के प्री-मेच्योर होकर जल्दी पकने की शिकायत रहती है।

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