सीजेआई रंजन गोगोई की लाइफ के 10 टर्निंग पॉइंट

  • सबसे कम समय के लिए सीजेआई के पद का कार्यभार संभालने वाले बने रंजन गोगोई
  • आरुषि मर्डर केस की सुनवाई में निभाई थी अहम भूमिका

By: Soma Roy

Updated: 07 May 2019, 07:49 PM IST

नई दिल्ली। सर्वोच्च न्यायालय में काम करने वाली एक महिला की ओर से लगाए गए रेप के आरोप ने भारत के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की साख को हिला कर रख दिया था। इससे न सिर्फ उनकी निजी प्रतिष्ठा पर बल्कि भारतीय न्यायपालिका पर भी सवाल उठ खड़े हुए थे। ऐसे में सोमवार को कोर्ट से मिली क्लीन चिट से उन्होंने राहत की सांस ली। हालांकि न्यायालय के इस आदेश से पीड़ित सहमत नही है। उन्होंने दूसरी महिला वकीलों के साथ मंगलवार को दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के परिसर में जमकर हंगामा किया। तो क्या था पूरा मामला और कौन हैं सीजीआई रंजन गोगोई आइए जानते हैं।

1.रंजन गोगोई भारत के प्रधान न्यायाधीश यानि सीजेआई हैं। 13 सितंबर को उन्होंने ये पद संभाला था। उन्होंने साल 1978 से यहां तक एक लंबा सफर तय किया है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गुवाहाटी हाई कोर्ट से की थी।

2.भारतीय संविधान के तहत एक न्यायाधीश की उम्र 65 साल से ज्यादा नहीं हो सकती है। ऐसे में रंजन गोगोई ने सीजेआई का जो पद अक्टूबर 2018 को ये पद संभाला था वो 17 नवंबर 2019 को खत्म हो जाएगा।

3.बतौर सीजेआई उनके करियर की इस छोटी-सी पारी में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। उन्होंने आरुषि तलवार मर्डर केस में अहम भूमिका निभाई थी। जिसमें उन्होंने किसी की भी तस्वीर के इस्तेमाल पर रोक लगाई थी। तो वहीं बतौर मुख्य जस्टिस के इतने कम कार्यकाल के चलते संसद में चर्चा का विषय भी बने रहें।

4.अपने करियर में रंजन गोगाई कई विवादों से भी घिरे रहे। इनमें से एक विवाद पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा को लेकर दिया गया बयान भी शामिल है। इसमें उन्होंने दीपक मिश्रा पर व्यंग कसते हुए कहा था कि भारतीय डेमोक्रेसी डर के साये में चल रहा है।

5.पूर्व सीजेआई दीपक मिश्रा पर वार करने के लिए रंजन गोगोई ने सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों के साथ मिलकर एक प्रेस कॉफ्रेंस भी की थी। जिसमें उनके साथ मदन बी लोकुर, कुरियन जोसेफ और जे चेमलेश्वर शामिल थे। इस प्रेस कॉफ्रेंस में उन्होंने दीपक मिश्रा के कार्य को गलत और राजीतिक दबाव में उठाया गया कदम बताया था।

6.सीजेआई पद की कमान संभालने के बाद रंजन गोगोई ने एक बड़ा बदलाव किया था। इसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पूर्व मंत्रियों को सरकारी आवास में रहने दिए जाने के प्रस्ताव को रद्द कर दिया था। उनके इस फैसले से सरकार में उनके खिलाफ रोष था।

7.रंजन गोगोई उन 11 जजों में से एक हैं जिन्होंने अपनी सम्पत्ति का ब्योरा सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर शेयर कर रखी हैं।

8.पिछले आंकड़ों के मुताबिक उनके पास कोई गाड़ी नही है और न ही उन्होंने किसी म्यूचुअल फंड या शेयर में निवेश कर रखा है। उन्होंने महज जून 2018 में असम में अपनी 6.5 मिलियन की जमीन बेची है। इसके अलावा उन्के पास उनकी मां की ओर से दिया गया पैतृक घर है।

9.मालूम हो कि रंजन गोगोई असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशब चंद्र गोगोई के बेटे हैं। रंजन को सीजेआई बनता देखने की इच्छा उनके पिता की थी। इस बात का जिक्र उन्होंने अपने सहकर्मियों से भी किया था। इस बात की पुष्टि अरुप कुमार दत्ता की ओर से लिखी गई किताब गुवाहाटी हाईकोर्ट में भी देखने को मिलती है।

10.इन दिनों रंजन गोगोई यौन उत्पीड़न के मामले में चर्चा में हैं। उनके खिलाफ एपेक्स कोर्ट में काम करने वाली एक महिला ने दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। हालांकि गोगोई ने हमेशा से ही इस बात से इंकार किया था। एक प्रधान न्यायाधीश पर ऐसा मामला दर्ज होने के चलते हाईकोर्ट में सुनवाई करने वाले जजों के पैनल ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया था।

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