भगत सिंह से लेकर संजय गांधी की हत्या के पीछे छिपे हैं ये राज, जानें ऐसे 10 हैरतंगेज किस्से

  • Indian Conspiracy : भारत के आजाद होने के बावजूद इसे ब्रिटेन का हिस्सा माना जाता है
  • ताइवान के बौद्ध मंदिर में रखा गया था नेताजी का शव

By: Shweta Singh

Updated: 01 Sep 2019, 05:15 PM IST

नई दिल्ली। हमारे आसपास कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनके पूरे सच से हम आज भी अंजान हैं। फिर चाहे वो भगत सिंह की हत्या हो, सुनामी आने का कारण या फिर विमान बनाए जाने से पहले मिले देवताओं के वाहन। ये सभी चीजें आज भी हमारे लिए एक राज है। मगर हम आपको कुछ ऐसी ही हैरतंगेज चीजों की सच्चाई के बारे में बताएंगे जिनके बारे में आप सोच भी नहीं सकते हैं।

1.सन् 1947 में भारत के आजाद होने के बावजूद इसे ब्रिटेन की कॉलोनी माना जाता है। दरअसल आजादी के वक्त भारत को सौंपे गए पावर एक्ट में लिखा गया था कि भारत राष्ट्रमंडल देश होगा। हालांकि, क्वीन एलिजाबेथ को अपने हर कॉलोनी देश में बिना वीजा आने जाने की पूरी आजादी है। जब 1997 में एलिजाबेथ बिना वीजा के भारत पहुंची,तो इस दावे पर जोरों से चर्चा शुरू हो गई थी।

2.देश के सबसे प्राचीन वेदों में कई ‘विमानों’ का जिक्र मिलता है। ये वो विमान नहीं जिन्हें इंसानों ने बनाया है। बल्कि ये रहस्मयी विमान हैं। जिनका प्रयोग देवी—देवता करते थे।

3.भारत का सबसे पहला प्लेन बनाने का आधिकारिक श्रेय रॉइट ब्रदर्स को जाता है। हालांकि बताया जाता है कि रॉइट ब्रदर्स के प्लेन बनाने से 8 साल पहले ही मुंबई के शिवकर तलपड़े ने सबसे पहला प्लेन बनाया था। दावा है कि बरोड़ा के महाराजा से वित्तीय मदद लेकर तलपड़े विमान बनाया था।

4.जब भी शहीद भगत सिंह के फांसी की बात होती है तो कई थ्योरी ये दावा करती है कि अगर महात्मा गांधी चाहते तो वो भगत सिंह कि फांसी रोक सकते थे।माना जाता है कि वो भगत सिंह के उग्र स्वाभाव और तरीकों को समर्थन नहीं देते हैं इसलिए उन्होंने सिंह को नहीं बचाया।

5.भारत ने अग्नि 5 मिसाइल का निर्माण किया था, उसके बाद अधिकारियों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की और कहा कि मिसाइल की रेंज केवल 5,500 किलोमीटर थी। यह बात सबको अजीब लगी क्योंकि पिछले संस्करण, अग्नि फोर में भी एक समान रेंज थी। ऐसे में नए को एक उन्नयन की तरह बनाया गया था। हालांकि, कई (चीनी) सिद्धांतकारों का कहना है कि उस मिसाइल की वास्तव में 8,000 की सीमा थी और भारतीय अधिकारी इसे कम करके इसलिए बता रहे हैं ताकि वे इसे "अप्रत्याशित" आश्चर्य के रूप में उपयोग कर सकें।

6.भारत के दूसरे प्रधानमंत्री, शास्त्री का ताशकंद घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने के एक दिन बाद कथित रूप से दिल का दौरा पड़ने के कारण ताशकंद, रूस में निधन हो गया। उनकी असामयिक मृत्यु को लेकर थ्योरी बताई गई कि उन्हें जहर दिया गया था। इस सिद्धांत को इस तथ्य ने गति दी कि रूस या भारत सरकार ने उनकी मृत्यु के पीछे सटीक कारण की पहचान करने के लिए कोई पोस्टमार्टम नहीं कराया। इसके अलावा, उनके सभी सामान भारत में वापस आ गए, सिवाय उनके थर्मस फ्लास्क के, जिनके बारे में कहा जाता था कि उन्होंने उसी से आखिरी बार पानी पीया था।

7.दूसरे विश्व युद्ध के दौरान, संयुक्त राज्य अमरीका और न्यूजीलैंड सेनाओं ने गुप्त रूप से न्यूजीलैंड के तट पर बम-परीक्षण किया था। इसके पीछे कारण एक बम विकसित करना था जो विद्युत चुम्बकीय तरंगों के कारण सुनामी को ट्रिगर कर सकता था, और इस तरह एक ही बार में पूरे तटीय क्षेत्र को नष्ट कर देगा। हालाँकि यह परियोजना सफल रही, लेकिन बमों का इस्तेमाल कभी नहीं किया गया। इसके बाद 2004 में सुनामी आई। अब, साजिश सिद्धांतकारों का सुझाव है कि सुनामी वास्तव में एक परमाणु बम-परीक्षण के गलत होने के कारण आई थी। गलत परीक्षण के कारण भूकंप और विनाशकारी सुनामी की एक श्रृंखला शुरू हुई, जिसने तटीय क्षेत्रों को नष्ट कर दिया और हजारों लोगों की जान ले ली। तथ्य यह है कि यह लगभग 70 साल पहले साबित हुआ था कि सुनामी को ट्रिगर करना संभव है, इस सिद्धांत का वैज्ञानिक समर्थन है।

8.भारतीय परमाणु कार्यक्रम के जनक के रूप में पहचाने जाने वाले डॉ. होमी भाभा सन् 1966 में फ्रांस के माउंट ब्लैंक के पास एक विमान दुर्घटना में मारे गए थे। यहां सिद्धांतकार बताते हैं कि संभवतः CIA ने भारत के परमाणु कार्यक्रम को हानि पहुंचाने के लिए इस दुर्घटना को अंजाम दिया। वाकई उनकी मौत के बाद भारत के परमाणु परियोजनाओं को एक बड़ा झटका लगा और एक अस्थायी ठहराव आया।

9.सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु व्यापक रूप से चर्चा में रही है। नेताजी बोस टोक्यो के लिए उड़ान भर रहे थे जब उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और वह बुरी तरह से जल गया, अंततः उनकी मौत हो गई। उनके शरीर का अंतिम संस्कार किया गया और उन्हें ताइवान के एक बौद्ध मंदिर में रख गया।

10.इंदिरा गांधी एक चतुर और प्रभावी राजनीतिज्ञ थीं। उन्हें अक्सर भारत का मार्गरेट थैचर कहा जाता था। कुछ जानकारों का दावा है कि संजय गांधी की मौत की मौत के पीछे उनकी मां इंदिरा का हाथ था। बताया जाता है कि संजय गांधी किसी बात को लेकर अपनी माँ को ब्लैकमेल करते थे इसलिए उन्होंने उन्हें रास्ते से हटा दिया था।

 

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