रामसेतु से जुड़े इन 10 तथ्यों से अनजान होंगे आप, महज 5 दिनों में पूरा हुआ था पुल का काम

रामसेतु से जुड़े इन 10 तथ्यों से अनजान होंगे आप, महज 5 दिनों में पूरा हुआ था पुल का काम

Soma Roy | Updated: 29 Aug 2019, 12:15:47 PM (IST) दस का दम

  • Ram Setu : मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने रामसेतु को लेकर कहीं ये बातें
  • नल नामक वानर ने रामसेतु के निर्माण में निभाई थी अहम भूमिका

नई दिल्ली। रामसेतु के निर्माण को लेकर हमेशा से ही कई मान्यताएं रही हैं। कुछ का मानना है कि इसे वानर सेना ने तैयार किया था। तो वहीं कुछ का कहना है कि इसे कोलकाता के एक व्यापारी ने बनवाया था। हाल ही में खड़गपुर के इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ने भी इस बारे में चर्चा की। उन्होंने रामसेतु का भारतीय इंजिनयरों की कला का सर्वश्रेष्ठ नमूना बताया। उन्होंने रामसेतु के बारे में रिसर्च के लिए छात्रों को प्रेरित भी किया। आज हम आपको रामसेतु से जुड़े कुछ दिलचस्प बातों के बारे में बताएंगे।

1.वाल्मीकि रामायण के अनुसार रामसेतु का निर्माण वानर सेना ने उस वक्त किया था जब भगवान राम को रावण की नगरी लंका जाना था।

2.पुराणों के अनुसार रावण की लंका में जाने का कोई और रास्ता नहीं था। ऐसे में हनुमान जी की वानर सेना ने समुद्र में पुल बनाकर इसे बार करने का निर्णय लिया था।

3.मान्यता के अनुसार रामसेतु के निर्माण में 5 दिनों का वक्त लगा था। इसके तहत पहले दिन 14 योजन, दूसरे दिन 20 योजन, तीसरे दिन 21 योजन, चौथे दिन 22 योजन और पांचवे दिन 23 योजन का कार्य पूरा किया गया था। एक योजन करीब 13 से 15 किलोमीटर लंबा था।

4.धार्मिक ग्रंथों के अनुसार रामसेतु की लंबाई 100 योजन है। जबकि इसकी चौड़ाई लगभल 10 योजन की है।

5.वाल्मीकि रामायण के अनुसार रामसेतु के निर्माण का कार्य शिल्पकार विश्वकर्मा के पुत्र नल ने किया था। हिंदू पुराणों में नल को रामसेतु का प्रथम शिल्पकार यानि इंजीनियर माना जाता है। वे वानर सेना का मार्ग दर्शन कर रहे थे।

ramsetu.jpeg

6.रामसेतु भारत के दक्षिणपूर्व में रामेश्वरम और श्रीलंका के पूर्वोत्तर में मन्नार द्वीप के बीच उथली चट्टानों की एक चेन है। समुद्र में इन चट्टानों की गहराई 3 फुट से लेकर 30 फुट के बीच है।

7.कहा जाता है कि 15वीं शताब्दी तक रामसेतु पर चलकर रामेश्वरम से मन्नार द्वीप तक जाया जा सकता था, लेकिन 1480 ईस्वी में चक्रवात तूफान के कारण यह टूट गया और जलस्तर बढ़ने के कारण यह पानी में डूब गया था।

8.रामसेतु कितना पुराना है, इसे लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं हैं। कुछ पौराणिक ग्रंथों के अनुसार यह पुल करीब 3500 साल पुराना है। वहीं कुछ अन्य के अनुसार इसे 7000 हजार साल पुराना बताया जाता है।

9.रामसेतु के निर्माण के लिए वानर सेना ने पत्थरों, पेड़ों की शाखाओं और पत्तियों का इस्तेमाल किया गया था। इस पुल की खास बात यह है कि समुद्र में ये पत्थर कभी डूबते नहीं थे।

10.वैज्ञानिकों के अनुसार रामसेतु पुल को बनाने के लिए जिन पत्थरों का इस्तेमाल हुआ था वे‘प्यूमाइस स्टोन’ थे। ये पत्थर ज्वालामुखी के लावा से उत्पन्न होते हैं।

Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned