प्रेगनेंसी मे खा रही हैं केसर तो हो जाएं सतर्क, बढ़ सकता है गर्भपात का खतरा

प्रेगनेंसी मे खा रही हैं केसर तो हो जाएं सतर्क, बढ़ सकता है गर्भपात का खतरा

Soma Roy | Updated: 28 Jan 2019, 12:06:14 PM (IST) दस का दम

आयुर्वेद के अनुसार दस ग्राम से ज्यादा केसर खाने पर शरीर का तापमान जरूरत से ज्यादा बढ़ सकता है, जो नुकसानदायक साबित हो सकता है।

नई दिल्ली। हर मां चाहती है कि उसका होने वाला बच्चा गोरा और सुंदर हो। इसके लिए गर्भावस्था के दौरान कई महिलाएं केसर का सेवन करती हैं। केसर को रंगत निखारने का सबसे बेहतर जरिया माना जाता है, लेकिन क्या आपको पता है प्रेगनेंसी में बिना जाने केसर खाना आपके होने वाले बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।

1.केसर की तासीर गर्म होती है और गर्भावस्था के दौरान इसे 10 ग्राम से ज्यादा लेना नुकसानदायक हो सकता है। आयुर्वेद विज्ञान के अनुसार प्रेगनेंसी के दौरान मां का शरीर गर्म होता है। ऐसे में केसर खाने से शरीर का तापमान जरूरत से ज्यादा हो जाता है। जिससे गर्भपात का खतरा बढ़ जाता है।

2.ज्यादा केसर खाने से होने वाले बच्चे का विकास रुक सकता है। शरीर का तापमान जरूरत से ज्यादा होने पर होने वाले बच्चे का मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है।

3.गर्भावास्था के दौरान ज्यादा केसर के सेवन से मां को भी दिक्कत हो सकती है। इससे सिर दर्द, चक्कर और उल्टी की दिक्कत हो सकती है।

4.प्रेगनेंसी में केसर के सेवन से महिला को घबराहट और बेचैनी महसूस हो सकती है। ऐसे में ज्यादा गर्मी भी महसूस होगी।

5.केसर के गर्म तासीर के चलते शरीर का बैलेंस बिगड़ सकता है। इससे इम्यूनिटी भी प्रभावित हो सकती है। जरूरत से ज्यादा केसर खाने वाली स्त्रियों को ठंड में भी पसीना आ सकता हैं।

6.ज्यादा केसर खाने पर मुंह, आंख एवं नाक से खून भी आ सकता है। इस बात को गंभीरता से लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

7.जरूरत से ज्यादा केसर के सेवन से कई बार शरीर अचानक से ठंडा भी पड़ सकता है। जिसके चलते हार्मोनल संतुलन बिगड़ सकता है। ऐसे में तुरंत चिकित्सक से सलाह लें।

8.प्रेगनेंसी में केसर खाने पर होने वाला बच्चा गुस्सैल हो सकता है। क्योंकि केसर के सेवन से बच्चे का मस्तिष्क प्रभावित हो सकता है।

9.गर्भावस्था में केसर खाने से महिलाओं को जरूरत से ज्यादा प्यास लग सकती है। इससे उनका मुंह भी सूख सकता है।

10.गर्भावस्था के दौरान जरूरत से ज्यादा केसर खाने पर बच्चा विकलांग पैदा हो सकता है। क्योंकि अतिरिक्त गर्मी से बच्चे का विकास रुक सकता है।

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