स्कूल की फीस भरने को पंचर बनाते थे डॉक्टर वीरेंद्र कुमार, इन 10 बातों से जानें संसद तक का उनका सफर

स्कूल की फीस भरने को पंचर बनाते थे डॉक्टर वीरेंद्र कुमार, इन 10 बातों से जानें संसद तक का उनका सफर

Soma Roy | Publish: Jun, 17 2019 01:01:30 PM (IST) दस का दम

  • डॉक्टर वीरेंद्र कुमार ने प्रोटेम स्पीकर के तौर पर शपथ ली है
  • वे करीब सात बार सांसद रह चुके हैं, वर्तमान में वह टीकमगढ़ लोकसभा सीट से सांसद हैं

नई दिल्ली। भाजपा ( Bharatiya Janata Party ) सांसद डॉक्टर वीरेंद्र कुमार ( Virendra Kumar ) 17वीं लोकसभा के प्रोटेम स्पीकर बन गए हैं। आज उन्हें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने लोकसभा सदस्य पद की शपथ दिलाई। मध्य प्रदेश ( madhya pradesh ) के एक छोटे से इलाके से ताल्लुख रखने वाले वीरेंद्र ने यहां तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत की है। कभी वो अपनी पढ़ाई का खर्चा निकालने के लिए साइकिल की दुकान में काम करते थे।

1.वीरेंद्र कुमार का जन्म 27 फरवरी 1954 को मध्य प्रदेश के सागर में हुआ था। उन्हें 17वीं लोकसभा ( Lok Sabha ) के लिए प्रोटेम स्पीकर यानि अस्थायी रूप से ये जिम्मेदारी दी है।

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2.उन्होंने अर्थशास्त्र में एमए और बाल श्रम संबंधी विषय पर पीएचडी की है। वह कई सालों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में सक्रिय कार्यकर्ता और पदाधिकारी रहे हैं।

3.इसके अलावा वीरेंद्र कुमार अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और विश्व हिंदू परिषद से भी जुड़े रहे हैं। बाद में उन्होंने भाजपा ज्वाइन की थी।

4.वीरेंद्र के घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी, इसलिए उन्हें अपनी पढ़ाई का खर्चा शुरू से ही खुद उठाना पड़ा। उन्होंने महज कक्षा 5 से ही साइकिल की दुकान पर काम करना शुरू कर दिया था। वे अपने पिता के साथ काम में हाथ बंटाते थे।

5.वीरेंद्र ज्यादातर पंचर बनाने का काम करते थे। इससे मिले हुए पैसों को जोड़कर वो अपने स्कूल की फीस भरते थे। वो अपनी पढ़ाई में समय नहीं दे पाते थे इसलिए कई बार रात में देर तक जगकर पढ़ते थे।

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6.वीरेंद्र को मंत्रिमंडल में जगह पीएम नरेंद्र मोदी के पहले कार्यकाल में मिला था। उनके बेहतरीन कार्य को देखते हुए स्पीकर पद के लिए उनका नाम इस बार प्रस्तावित किया गया था।

7.संसद तक का वीरेंद्र का सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है। उन्होंने काफी मेहनत से ये मुकाम हासिल किया है। तभी वो आज भी वास्तविकता से जुड़े हुए हैं। इस बात की झलक उनके संसद क्षेत्र के दौरे में अक्सर देखने को मिलती है।

8.बताया जाता है कि जब भी वीरेंद्र अपने इलाके में किसी को पंक्चर सुधारता देखते हैं तो वह उसके पास पहुंचकर उसके हालचाल लेते हैं। इतना ही नहीं वो उन्हें पंचर सही तरीके से बनाने के टिप्स भी देते हैं।

9.वीरेंद्र कुमार करीब सात बार सांसद रह चुके हैं। चार बार वे टीकमगढ़ लोकसभा से और तीन बार सागर सीट से खड़े हुए थे।

10.इस समय वह टीकमगढ़ लोकसभा सीट से सांसद हैं। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी अहिरवार किरण को करीब 3.48 लाख वोटों से हराया था।

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