मायावती ने बदली आनंद कुमार की जिंदगी, जानें एक क्लर्क से करोड़ों का मालिक बनने तक की ये 10 खास बातें

  • Anand kumar property attaches : साल 2007 में मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद से आनंद कुमार ने कई कंपनियां खोली
  • आयकर विभाग ने आनंद कुमार की नोएडा स्थित 400 करोड़ रुपए का प्लाट किया जब्त

By: Soma Roy

Updated: 19 Jul 2019, 10:17 AM IST

नई दिल्ली। बसपा प्रमुख मायावती के भाई आनंद कुमार का नोएडा स्थित प्लाट गुरुवार को आयकर विभाग ने जब्त कर लिया है। इसकी कीमत 400 करोड़ रुपए बताई जा रही है। इस सम्पत्ति को जब्त करने का आदेश दिल्ली स्थित बेनामी निषेध इकाई (बीपीयू) ने 16 जुलाई को जारी किया था। आनंद कुमार कैसे इतने कम समय में करोड़ों का मालिक बना और उन्हें मायावती का दाहिना हाथ क्यों कहा जाता है आइए जानते हैं।

1.आनंद कुमार मायावती के भाई हैं। वह पहले नोएडा के एक दफ्तर में क्लर्क की नौकरी करते थे।

2.आनंद कुमार की किस्मत साल 2007 में चमकी। बताया जाता है मायावती के मुख्यमंत्री बनते ही आनंद ने एक के बाद एक करीब 49 कंपनियां खोलीं।

3.आनंद ने रियल एस्टेट की नामी कंपनियों जेपी, यूनिटेक और डीएलएफ के साथ करीब 760 करोड़ रुपए का बिजनेस किया। आनंद ने इन दिग्गज कंपनियों के साथ साल 2007 से 2012 तक काम किया।

4.एक अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक आनंद कुमार ने रियल एस्टेट के अलावा स्पोर्ट मैनेजमेंट, सिक्योरिटी और हॉस्पिेटैलिटी के बिजनेस में भी अपना हाथ आजमाया था। इसमें साल 2012 तक उनका बिजनेस करीब 620 करोड़ रुपए का हो चुका था।

5.बताया जाता है कि साल 2007 से पहले भी आनंद ने एक कंपनी खोली थी। जिसका नाम होटल लाइब्रेरी क्लब प्राइवेट लिमिटेड था। इसका मेन दफ्तर मसूरी में था। इसके अलावा उनका एक और होटल भी था। वो भी मसूरी में स्थित है।

anad kumar mayawati brother

6.रिपोर्ट के अनुसार आनंंद अपनी कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद की जिम्मेदारी संभालते थे। उस वक्त वे सालाना 1.2 करोड़ रुपए सैलरी लेते थे। जबकि कंपनी में डायरेक्टर के पद का कार्यभार दीपक बंसल को सौंप रखा था।

7.बताया जाता है कि मायावती के मुख्यमंत्री बनते ही आनंद ने जमकर पैसे बनाए। उन्होंने अपनी कंपनी की कई इकाईयां खोलीं। साथ ही बिजनेस का विस्तार किया। इसके तहत उन्होंने तीन फर्म बनाएं। जिनमें से एक का नाम रेवोल्यूशनरी रिएल्टसर्स रखा।

8.साल 2011 से 2012 के बीच आनंद की इस कंपनी ने जमकर मुनाफा कमाया। उस दौरान उन्हें 60 करोड़ रुपए का फायदा हुआ। इसके अलावा उन्हें अन्य दो फर्मों से करीब 203 करोड़ रुपए का लाभ हुआ।

9.आनंद की बढ़ती शोहरत और कामयाबी की वजह मायावती का उनके सिर पर हाथ होना बताया जाता है। मायावती ने आनंद को पार्टी उपाध्यक्ष बनाया था। तब पार्टी में उनकी स्थिति उतनी मजबूत नहीं थी। मगर दोबारा उन्हें पार्टी की कमान सौंपे जाने पर उनका दबदबा बन गया। इस बीच मायावती के खास सतीश चंद्र ने भी आनंद का खूब साथ दिया।

10.जानकारों के मुताबिक मुख्यमंत्री बनने के बाद मायावती किसी ऐसे शख्स को पार्टी का उपााध्यक्ष बनाना चाहती थीं जो उनका भरोसेमंद हो। इसलिए उन्होंने साल 2017 में पार्टी की एक बैठक बुलाकर आनंद को जिम्मेदारी दिए जाने की घोषणा की थी। इतना ही नहीं मायावती ने आनंद के बेटे आकाश आनंद को पार्टी के नेशनल कोआर्डिनेटर की जिम्मेदारी सौंप रखी है।

 

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