रहस्यों से भरा हुआ है शिव का ये धाम, इस वजह से आज तक नहीं कर सका है कोई चढ़ाई

कैलाश पर्वत पर चढ़ाई करते समय लोगों को दिशा भ्रम हो जाता है, साथ ही उन्हें मौसम का प्रहार झेलना पड़ता है।

By: Soma Roy

Published: 26 Jan 2019, 08:30 PM IST

नई दिल्ली। कैलाश पर्वत तिब्बत में स्थित है। इसकी ऊंचाई 6,638 मीटर है। ये दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एवरेस्ट से दो हजार 200 मीटर छोटा है। फिर भी अभी तक यहां कोई नहीं चढ़ सका है। धर्मगुरू इसके पीछे अलौकिक शक्ति को वजह बताते हैं। जबकि वैज्ञानिकों के लिए कैलाश एक रहस्यमी जगह है।

1.भूत-प्रेत और नागों के देवता कहलाने वाले शिव की महिमा एकदम निराली है। वो जग कल्याण के लिए विष पान तक के लिए नहीं डरें। ऐसे ही दयालू और भक्तों के प्रिय शिव का धाम है कैलाश पर्वत। पुराणों के अनुसार भोलेनाथ यहां अपने पूरे परिवार पार्वती, कार्तिकेय और गणेश के साथ रहते हैं।

2.साधू-सन्यासी व अन्य लोग मोक्ष की कामना के साथ कैलाश पर्वत आते हैं। लोगों का कहना है कि पर्वत के सामने खड़े होते ही उन्हें अद्भुत शक्ति का आभास होता है। सच्चे मन से शिव को याद करने वाले श्रद्धालुओं को शंकर स्वयं दर्शन देते हैं। कैलाश पर उन्हें नीलकंठ की आकृति दिखाई देती है।

3.अविस्मरणीय शक्तियों से युक्त कैलाश की सच्चाई वाकई हैरान करने वाली है। वैज्ञानिकों एवं धर्माचार्यों के अनुसार कैलाश पर्वत पूरी पृथ्वी का केंद्र है। इसे धरती का नाभि भी कहते हैं। पर्वत का आकार चौमुखी है। जो दिशा बताने वाले कांटे की तरह है। कैलाश को सतलुज, घाघरा, सिंधु और ब्रम्हपुत्र नदियां इस क्षेत्र को चार अलग-अलग दिशा में बांटती हैं।

4.कैलाश का निर्माण दैवीय शक्ति से हुआ है, ये बात रिसर्च से भी साबित होती है। एक रूसी रिपोर्ट के अनुसार कैलाश एक मानव निर्मित पिरामिड है। जिसे किसी अद्भुत शक्ति ने बनाया है।

5.कैलाश पर्वत पर चढ़ना एक तरह से नामुमकिन है। ये बात कई पर्वतारोहियों ने खुद मानी है। अंग्रेज पर्वतारोहतक एवं रिसर्चर यू रटलेज ने कैलाश पर चढ़ाई को बिल्कुल असंभव बताया। उनके साथ कर्नल विलसन और शेरपा भी थे।

6.रूस के पर्वतारोही सरगे सिस्टियाकोव के अनुसार कैलाश पर चढ़ना बहुत मुश्किल है। जब वे पर्वत के एकदम सामने पहुंचे तभी उनका दिन तेजी से धड़कने लगा। उन्हें कमजोरी लगने लगी। उनके मन में ख्याल आया कि उन्हें अब वहां नहीं रुकना चाहिए।

8.कैलाश पर चढ़ना इसलिए भी असंभव है क्योंकि वहां पर्वतारोंहियों को दिशा भ्रम हो जाता है। वे किसी भी दिशा से चढ़ें उन्हें सारे रास्ते एक ही ओर जाते हुए दिखते हैं। कई पर्वतारोहतकों का मानना है कि दैवीय शक्ति से पहाड़ की दिशा अपने आप बदल जाती है।

9.शिव की नगरी में प्रवेश बिल्कुल आसान नही है। जो भी इसे पार करने की सोचता है उसके सामने अद्भुत ताकत आ जाती है। कई शोधकर्ताओं व माउंटेन क्लाइंबरों के अनुसार चढ़ाई के समय एकदम से मौसम बदल जाता है। बर्फ के तूफान आ जाते हैं, तेज हवाएं चलने लगती है।

10.कैलाश पर्वत कई रहस्यों से जुड़ा है। यहां हैरान करने वाली चीजे हैं, जिन पर यकीन करना शोधकर्ताओं के लिए मुश्किल है। इन्हीं रहस्यों में एक है यहां के दो तालाब। जिनका नाम है ब्रम्ह ताल और राक्षस ताल। कहा जाता है कि ब्रम्ह ताल भगवान ब्रम्ह की देन है। इसमें मीठा पानी आता है। जबकि राक्षस ताल को रावण ने बनाया, इसमें खारा पानी है।

 

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