क्या ​इंदिरा की राह पर चल पड़ी हैं प्रियंका गांधी, सोनभद्र जानें के पीछे कहीं ये 10 वजह तो नहीं?

क्या ​इंदिरा की राह पर चल पड़ी हैं प्रियंका गांधी, सोनभद्र जानें के पीछे कहीं ये 10 वजह तो नहीं?

Soma Roy | Updated: 20 Jul 2019, 01:22:00 PM (IST) दस का दम

  • Sonbhadra Murder Case : सन् 1977 में बेलछी गांव में हुए दलित हत्याकांड के पीड़ितों से मिलने पहुंची थीं इंदिरा गांधी
  • यूपी में होने वाले विधानसभा चुनाव के चलते प्रियंका गांधी ने बनाई रणनीति

नई दिल्ली। सोनभद्र हत्याकांड के पीड़ितों से मिलने के लिए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी शुक्रवार को वहां पहुंची थीं। मगर उनके काफिले को प्रशासन ने बीच में ही रोक दिया था। प्रियंका के पीड़ितों से मिलने पर अड़े रहने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है। तब से उन्हें चुनार के किले में रखा गया है। वहां न तो बिजली है और न ही पानी की व्यवस्था। इसके बावजूद प्रियंका पीड़ितों से मिलने के लिए जेल की सजा काटने तक को तैयार हैं। प्रियंका गांधी के ऐसे तेवर देख इंदिरा गांधी की यादें ताजा हो गई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक प्रियंका का सोनभद्र प्रेम कुछ और ही बातों की ओर इशारा कर रहा है।

1.पुलिस के गिरफ्तार करने के बाद से प्रियंका रात भर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ चुनार के गेस्ट हाउस में रुकी हुई हैं। वो वहां करीब 9 घंटे बिता चुकी हैं। पुलिस ने उन्हें अपने घर लौट जाने की बात कही है। मगर प्रियंका इस बात से सहमत नहीं है। वो पीड़ितों के लिए जेल की सजा तक काटने को तैयार हैं।

2.जानकारों के मुताबिक प्रियंका अपनी दादी इंदिरा गांधी की तरह राजनीति के मैदान में उतर चुकी हैं। सन् 1977 में आपातकाल के बाद बेलछी गांव में दलितों की हुई हत्या पर इंदिरा ने भी कुछ ऐसी ही जिद पकड़ी थी। वो खराब मौसम और जाने का कोई संसाधन न होने के बावजूद पीड़ितों से मिलने पहुंची थीं। इंदिरा के जज्बे को देखते हुए कांग्रेस नेताओं को भी आगे आना पड़ा था। उन्होंने इंदिरा को गांव तक पहुंचाने के लिए हाथी मंगवाया था। उस पर तीन घंटे का सफर करके इंदिरा बेलछी गांव पहुंची थीं। उस घटना ने इंदिरा को दोबारा लाइमलाइट में ला दिया था।

3.इंदिरा गांधी जैसी रणनीति अपनाने के पीछे प्रियंका का खास मकसद दिख रहा है। जानकारों की मानें तो यूपी में विधानसभा चुनाव होने हैं। समाजवादी और बसपा का गठबंधन टूटने के बाद से दोनों ही अलग—थलग हो गए हैं। वहीं सत्ता पर काबिज बीजेपी को लोग दलित मुद्दे पर घेर रहे हैं। ऐसे में प्रियंका यूपी में कांग्रेस की साख मजबूत करने के लिए सोनभद्र मामले को भुनाने की कोशिश कर रही हैं।

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4.सोनभद्र मामले को लेकर यूपी सरकार समेत दोनों विपक्षी पार्टियां कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। वे महज बयानबाजी कर रहे हैं। ऐसे में प्रियंका गांधी मौके पर जाकर लोगों की सहानुभूति बंटोरन चाहती हैं। इससे यूपी में कांग्रेस का खोया हुआ वजूद वापस पाने में मदद मिलेगी।

5.राहुल गांधी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस बिना किसी नेतृत्व के दिशाहीन लग रही है। इससे कांग्रेस पार्टी में मची घमासान सामने आ गई है। इस मसले को शांत करने के मकसद से प्रियंका गांधी सोनभद्र पहुंची हुई हैं। वो लोगों का ध्यान कांग्रेस की बदहाली से हटाकर इसकी ताकत की ओर लगाना चाहती हैं।

indira gandhi in belchi

6.कांग्रेस में अभी कोई ऐसा चेहरा नहीं है जिसके नाम पर लोग पार्टी को वोट दें। ऐसे में प्रियंका का सोनभद्र जाने का मकसद पार्टी की एक छवि तैयार करना हैं। उनका मानना है कि लोगों तक उनकी सीधी पहुंच चुनाव में जीत दिलाने में मददगार साबित हो सकती है।

7.यूपी में विपक्षी पार्टी के रूप में सपा ही सशक्तिशाली दिखती है। मगर समाजवादी पार्टी में मची आंतरिक कलह के चलते उसका वजूद भी धूमिल हो गया है। जानकारों का मानना है कि अखिलेश के नेतृत्व वाली सपा में पहले जैसा दम नहीं है। क्योंकि मुलायम सिंह यादव के दौर में वो सोनभद्र जैसी घटना होने पर तुरंत मौके पर पहुंचकर लोगों का हालचाल लेते। सपा की इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए प्रियंका यूपी पहुंची हैं।

9.प्रियंका गांधी समाजवादी पार्टी को दरकिनार करके कांग्रेस की पैठ मजबूत करना चाहती हैं। उन्हें लगता है कि पीड़ितों से सहानुभूति दिखाने से लोगों का कांग्रेस पर भरोसा बढ़ेगा।

10.यूपी में बसपा की स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है। बसपा सुप्रीमो अपने भाई आनंद कुमार को लेकर पहले से ही फजीहत झेल रही हैं। ऐसे हालात में प्रियंका गांधी कांग्रेस की छवि अच्छी करना चाहती हैं।

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