दुश्मन को मारने के लिए हथियार नहीं इन 10 तरीकों का होता है इस्तेमाल, जानिए सुरक्षा एजेंसी से जुड़े सीक्रेट्स

  • NIA bill pass : राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी को ताकतवर बनाने के लिए लोकसभा में पास हुआ संशोधन बिल
  • रॉ एजेंट के पास वार करने के लिए गन तक नहीं होती है

By: Soma Roy

Published: 16 Jul 2019, 11:00 AM IST

नई दिल्ली। देश की हिफाजत के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी तीसरी आंख की तरह काम करती हैं। ऐसे में इसे मजबूत बनाने के लिए लोकसभा में सोमवार को एक संशोधन बिल पास किया गया। इस मौके पर हम आपको राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (NIA) का अहम हिस्सा रॉ ( RAW ) से जुड़े कुछ सीक्रेट्स के बारे में बताएंगे। जिसमें एजेंट्स की ट्रेनिंग से लेकर दुश्मन को मात देने के तरीके आदि के बारे में बताएंगे।

1.रॉ को सरकार के रिसर्च और एनालिसिस विंग के तौर पर जाना जाता है। ये देश की सबसे खुफिया एजेंसी होती है। जो देश के लिए गुप्त रूप से काम करती है। आतकंवाद को खत्म करने से लेकर देश के अहम प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में ये एजेंसी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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2.रॉ में शामिल होने के लिए एजेंटों को कड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ता है। उन्हें कम से कम 4 भाषाओं का ज्ञान होना जरूरी होता है। इसमें चाइनीज, अफगानी, पश्तून समेत कई अन्य भाषाएं शामिल होती हैं। एजेंटों का भाषा ज्ञान ही दुश्मन से घुलने-मिलने और उनके राज जानने में मदद करता है।

3.रॉ में शामिल होने के लिए एजेंट को स्पोर्ट्स में अच्छा होने की जरूरत होती है। क्योंकि खेल में जिस तरह रणनीति तैयार करनी पड़ती है। उसी तरह दुश्मन को मात देने के लिए भी प्लानिंग करनी होती है। इसके अलावा इससे लीडरशिप और फिटनेस की गुणवत्ता की जांच होती है।

4.रॉ का हिस्सा बनने के लिए एजेंटों को 10 दिन की कड़ी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है। इस दौरान उन्हें पहाड़ों, बर्फ और रेगिस्तान जैसे खतरनाक इलाकों पर जिंदा रहने के गुर सिखाए जाते हैं। इसी से एजेंट किसी भी परिस्थिति में जिंदा रहने के काबिल बनते हैं। इस तरह की ट्रेनिंग का मकसद दुश्मनों के मनसूबों पर पानी फेरना होता है।

5.रॉ एजेंट्स को देश के सबसे ताकतवर हिस्से के तौर पर जाना जाता है। इसलिए बड़े दुश्मन के खात्मे के लिए इन्हें भेजा जाता है। मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि इनके पास दुश्मन पर वार करने के लिए एक गन तक नहीं होती है। दरअसल एजेंट्स को किसी तरह के हथियार नहीं दिए जाते हैं, क्योंकि इन्हें अपने शत्रु को पूछताछ के लिए पकड़कर लाना होता है।

6.दुश्मन को हराने के लिए रॉ एजेंट का दिमाग ही उसका सबसे बड़ा हथियार होता है। इसलिए ट्रेनिंग के दौरान उनका नेशनल एप्टीट्यूट टेस्ट होता है। इसमें व्यक्ति की मानसिकता और शारीरिक क्षमता परखी जाती है।

7.रॉ एजेंट्स को डिकोडिंग में महारथ हासिल होनी चाहिए। क्योंकि ज्यादातर आतंकवादी कोड वर्ड्स में बात करते हैं। ऐसे में उनकी बातों को समझने के लिए डिकोडिंग का ज्ञान जरूरी है।

8.रॉ के एजेंट्स गुप्त तरीके से अपना काम करते हैं। इसलिए ये अपनी जानकारी किसी से सांझा नहीं कर सकते हैं। यहां तक कि उनके परिवार को भी उनके मिशन के बारे में पता नहीं होता है।

9.दुश्मनों के खेमे में घुसकर उनकी सारी इंफॉर्मेशन्स की जानकारी हासिल करने के लिए रॉ एजेंट को उनके साथ घुलना—मिलना पड़ता है, उन्हें दुश्मनों के देश में भी रहना पड़ सकता है। इसके लिए कई बार उन्हें अपना धर्म तक बदलना पड़ता है।

10.रॉ एजेंसी का हिस्सा बनने के लिए सेना से जुड़े होने वालों को ज्यादा मौका मिलता है। क्योंकि उन्हें देश की सुरक्षा प्रणाली से जुड़ी अहम चीजों की जानकारी होती है।

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