इस बेरहमी से निर्दोंषों को उतारा गया था मौत के घाट, आज भी भारतीयों को याद है जलियांवाला बाग हत्याकांड

  • कई लोगों को बेवजह उतारा गया था मौत के घाट।
  • निर्दोष लोगों को आज भी किया जाता है याद।
  • अमृतसर के जलियांवाल बाग में हुआ था नर संहार।

By: नितिन शर्मा

Updated: 13 Apr 2019, 11:14 AM IST

नई दिल्ली। जलियांवाला बाग हत्याकांड को 100 साल पूरे हो चुके हैं। इस हत्याकांड को आज भी देश भुला नहीं सका है जब हज़ारों निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था। अंग्रेजों के शासन के दौरान रौलेट एक्ट का विरोध करने के लिए अमृतसर के स्वर्ण मंदिर के पास जलियांवाला बाग में 13 अप्रैल 1919 को एक सभा रखी गई थी जिसमें अंग्रेजी सरकार के जनरल डायर ने बिना कारण वहां मौजूद लोगों पर गोलियां चलवा दी थी। जलियांवाला बाग कांड के बारे में कहा जाता है कि इस दौरान सैकड़ों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया था और हज़ारों लोग घायल हुए थे।

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1.कहा जाता है कि इस हत्याकांड के सबसे बड़े गुनहगार ब्रिगेडियर जनरल रेजीनॉल्ड डायर और लेफ़्टिनेंट गवर्नर माइकल ओ डायर थे जिनमे से एक रेजीनॉल्ड डायर की 1927 में बीमारी के कारण मौत हो गई थी।

2.माइकल ओ डायर के बारे में कहा जाता है कि वह जिंदा था और रिटायर होने के बाद लंदन में जाकर बस गया था और इन्ही दोनों ने निहत्थे लोगों पर गोलियां चलवाई थी।

3.जनरल डायर के आदेश पर ही ब्रिटिश सेना ने बिना रुके लगातार 10 मिनट तक करीब 1,650 राउंड फ़ायरिंग की थी और गोलियां खत्म होने पर ही फ़ायरिंग रोकी थी।

4.गोलियों से बचने के लिए कई मासूम लोगों ने बाग में बने कूएं में छलांग लगा दी जिसे आज शहीदी कुंआ कहा जाता है जो कांड में मारे गए निर्दोष लोगों की याद दिलाता है।

5.जिस रॉलेट एक्ट का विरोध करने के लिए लोग वहां एकत्रित हुए उसी रॉलेट एक्ट का जनरल डायर समर्थक था और उसने लोगों को डराने के मंशा से हत्याकांड को अंजाम दिया।

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jallianwala bagh kand

6. जलियांवाला बाग हत्याकांड की पूरी दुनिया में आलोचना हुई जिसके बाद हत्याकांड के मुख्य आरोपी जनरल डायर का डिमोशन कर दिया गया।

7.इस हत्याकांड के कारण पूरा देश ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विरोध में उतर आया और हर तरफ भारतीय लोगों में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ रोष था।

8.इस मामले पर ब्रिटिश सरकार ने जो आंकड़ें जारी किए है उनके हिसाब से 379 लोगों की मौत हुई थी और 1200 लोग घायल हुए थे वहीं दूसरी तरफ कहा जाता है कि करीब 1000 से ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतारा गया था।

9.जलियांवाला बाग हत्याकांड के बाद अंग्रेजी सरकार के विरोध में महात्मा गांधी की अगुवाई में साल 1920 में पूरे देश में असहयोग आंदोलन की शुरुआत हुई थी।

10.कहा जाता है कि हाउस ऑफ कॉमन्स ने डायर के खिलाफ इस मामले में निंदा प्रस्ताव पारित किया लेकिन हाउस ऑफ लॉर्ड्स ने इसपर जनरल डायर की तरीफ की जिसपर ब्रिटिश सरकार को निंदा झेलनी पड़ी थी।

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नितिन शर्मा Desk/Reporting
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