रहस्यों से भरे किन्नरों के 10 रिवाज! झकझोर कर रख देगा इनकी शवयात्रा का सच

रहस्यों से भरे किन्नरों के 10 रिवाज! झकझोर कर रख देगा इनकी शवयात्रा का सच

Priya Singh | Updated: 02 Oct 2019, 10:51:38 AM (IST) दस का दम

  • किन्नरों से जुड़े ऐसे 10 रहस्य जो हैं अजबगजब
  • पैदा होने से मरने तक उनके जीवन में आते हैं कई उतार चढ़ाव
  • इनकी परम्पराएं हिंदू धर्म की होती हैं लेकिन उनके गुरु मुस्लिम होते हैं

नई दिल्ली। भारत में किन्नारों का इतिहास एकदम अलग है। जहां पुराणों और ग्रंथों में उन्हें जगह दी गई है वहीं आज के समाज में उनको देखने का नज़रिया एकदम अलग है। ये समुदाय आम नहीं लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं कि इनके रीति-रिवाज़ खास होते हैं। समाज में किन्नरों का वर्ग ऐसा है जिसके बारे में जानने के लिए अक्सर लोग उत्सुक रहते हैं। आज हम किन्नरों से जुड़े ऐसे ही 10 रहस्यों के बारे में बताएंगे जो हैरान कर देने के साथ-साथ एकदम अलग भी हैं।

lpo.jpg

1- समाज के दूसरे वर्ग जहां दिन में शवयात्रा निकालते हैं वहीं किन्नरों की शवयात्रा रात में निकाली जाती है। दअरसल इनकी शवयात्रा रात में इसलिए निकाली जाती है ताकि कोई आम इंसान शख्स इनकी शवयात्रा का साक्षी न बन सके।

2- इनकी शवयात्रा का एक नियम यह भी है कि इनके समुदाय के आलावा दूसरे समुदाय के किन्नर वहां मौजूद नहीं होने चाहिए।

3- किन्नर अपने साथी की अंतिम यात्रा पर शोक नहीं मानते उनका मानना है कि इस नर्क समान संसार से उन्हे छुटकारा मिल गया है।

4- हालांकि, किन्नर हिंदू धर्म को मानते हैं, लेकिन ये लोग शव को जलाते नहीं हैं बल्कि उन्हें दफनाते हैं।

5- इनकी परम्पराएं हिंदू धर्म की होती हैं लेकिन उनके गुरु मुस्लिम होते हैं।

swq.jpg

6- किन्नर समुदाय में नए साथी का स्वागत भव्य तरीके से किया जाता है।

7- समाज के दूसरे वर्ग की तरह किन्नरों की शादी भी होती है, लेकिन ये शादी खास होती है क्योंकि वे भगवान से शादी करते हैं।

8- किन्नर के रूप में जन्म लेने से लेकर उनके मरने तक दुआ मांगी जाती है कि वे अगले जन्म में फिर किन्नर रूप में पैदा न हों।

9- हर किन्नर का एक गुरु होता है। माना जाता है कि गुरु को अपने शिष्य के बारे में हर जानकारी होती है। माना जाता है कि उन्हें यह तक पता होता है कि उनके शिष्य की मौत कब होगी।

10- किन्नर को मुगल सम्राज्य में सबसे पहले अहमियत दी गई थी। वे किन्नरों को अपने समाज का अहम हिस्सा मानते थे। किन्नरों को भले ही सामाज में थर्ड जेंडर का दर्जा दिया गया हो लेकिन वे आज भी अपने अस्तित्व के लिए लड़ रहे हैं।

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned