आर्थिक आधार पर आरक्षण देने पर सबसे बड़ा सवाल, क्या सामान्य वर्ग के गरीबों को मिलेगी आयकर छूट

आर्थिक आधार पर आरक्षण देने पर सबसे बड़ा सवाल, क्या सामान्य वर्ग के गरीबों को मिलेगी आयकर छूट

Ashutosh Kumar Verma | Publish: Jan, 09 2019 09:06:26 PM (IST) | Updated: Jan, 09 2019 09:06:27 PM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

देश के लगभग हर हिस्से में आयकर न देने वालों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। अब सरकार ने सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया है।

नर्इ दिल्ली। देश के लगभग हर हिस्से में आयकर न देने वालों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। अब सरकार ने सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण देने का ऐलान किया है। यह लाभ उन लोगों को मिलेगा, जिनकी वार्षिक आय आठ लाख रुपये तक है। अब सवाल उठ रहा है कि आठ लाख रुपए तक कमाने वाले गरीब माने जाएंगे तो क्या आयकर से छूट की सीमा भी बढ़ेगी।

ढार्इ लाख रुपए से तक कमार्इ वालाें के लिए आयकर छूट

सामान्य वर्ग के गरीबों को 10 फीसदी आरक्षण वाला विधेयक लोकसभा में पारित हो गया है। इसमें प्रावधान है कि सामान्य वर्ग के जिन परिवारों की वार्षिक आय आठ लाख रुपए तक है, उनके बच्चों को इस आरक्षण का लाभ मिलेगा। अभी तक सरकारी सुविधाओं को लेकर आयकर की छूट सीमा अर्थात ढाई लाख रुपये को आधार बनाया जाता था। अब सरकार आठ लाख रुपए की वार्षिक आय तक के लोगों को आरक्षण की सुविधा देने का प्रावधान करने जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता मनोज चौबे का कहना है, "आर्थिक तौर पर सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण दिए जाने की व्यवस्था से देश में गरीबी की परिभाषा ही बदल जाएगी, क्योंकि आयकर विभाग ढाई लाख रुपये से अधिक वार्षिक आय वालों से कर वसूलता है। अब आठ लाख वार्षिक आय वाले आरक्षण की सीमा में आएंगे। ऐसे में सवाल उठेगा कि क्या सरकार आयकर छूट की सीमा बढ़ाने वाली है।"


नर्इ व्यवस्था से सुविधाआें पर संकट

चौबे आगे कहते हैं, "नई व्यवस्था से देश में गरीबों के दो वर्ग हो जाएंगे। एक ढाई लाख रुपए तक का, और दूसरा आठ लाख रुपए वाला। सरकार के इस फैसले पर शक भी होता है, क्योंकि अभी सरकारी योजनाओं का लाभ उन लोगों को मिलता है, जिनकी वार्षिक आय ढाई लाख रुपए से कम है। नई व्यवस्था से इस सुविधा पर भी संकट मंडरा सकता है। क्योंकि आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए आय की सीमा तय किए जाने से गरीबी की नई परिभाषा तय करनी होगी।"


आर्थिक आधार पर आरक्षण को लेकर क्या होंगी शर्तें

आर्थिक मामलों के जानकार निमिष पारिख का कहना है, "आयकर स्लैब बढ़ाना सरकार के लिए आसान नहीं है, क्योंकि पेट्रोल, गैस, खाद आदि पर जो सब्सिडी दी जाती है, वह प्रत्यक्ष कर से आई रकम से ही संभव है। अगर सरकार कुछ हजार की ही आयकर छूट की सीमा बढ़ती है तो राजस्व पर करोड़ों-अरबों करोड़ का असर पड़ता है, लिहाजा आर्थिक आधार पर आरक्षण में कुछ शर्ते भी होंगी, जो आने वाले समय में सामने आएंगी, मगर आयकर का स्लैब बदलना आसान नहीं है।"


क्या वोट पाने हथंकडा है आर्थिक आधार पर आरक्षण देना

सामाजिक कार्यकर्ता रोली शिवहरे का कहना है, "सरकार का यह फैसला समझ से परे है, क्योंकि देश के उच्च मध्यम वर्ग की वार्षिक आय आठ लाख रुपए के आसपास होती है। इसमें तो देश की 85 फीसदी से ज्यादा आबादी आ जाएगी। सरकार ने यह फैसला क्यों लिया है, यह समझना आसान नहीं है। सरकार क्या राजनीतिक लाभ लेना चाहती है, वोट पाने का हथकंडा है, अथवा गरीबी से ध्यान हटाने का प्रयास है। अगर वास्तव में सरकार इस व्यवस्था को लागू करना चाहती है तो उसे योजनाओं में आमूल-चूल बदलाव लाना होगा।" शिवहरे आगे कहती हैं, "मुझे तो यह सिर्फ ध्यान भटकाने का हथियार नजर आता है, क्योंकि इस फैसले से किसे लाभ होगा, कहा नहीं जा सकता। नौकरियां हैं नहीं, आरक्षण से क्या होगा। सरकार को आरक्षण के लिए आठ लाख रुपए की आय सीमा तय करने पर आयकर छूट की सीमा भी बढ़ानी पड़ सकती है, जो आर्थिक तौर पर खतरे की घंटी हो सकती है।"

Read the Latest Business News on Patrika.com. पढ़ें सबसे पहले Business News in Hindi की ताज़ा खबरें हिंदी में पत्रिका पर।

खबरें और लेख पड़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते है । हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते है ।
OK
Ad Block is Banned