बजट 2019: उम्मीदों पर भारी पड़ी हकीकत, सपनों की उड़ान को नहीं लगे पंख

बजट 2019: उम्मीदों पर भारी पड़ी हकीकत, सपनों की उड़ान को नहीं लगे पंख

Siddharth Priyadarshi | Publish: Jul, 05 2019 07:57:14 PM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

  • Budget 2019 से जहां आम आदमी ने बहुत सी उम्मीदें लगा रखी थीं, वहीं उसे ऐसा कुछ हासिल नहीं हुआ जो राहत दे सके।
  • सरकार ने कई अहम मुद्दों पर आम लोगों को कोई खास छूट नहीं दी है

नई दिल्ली। मई में सम्पन्न हुए आम चुनावों में भाजपा की बड़ी जीत के बाद समाज के विभिन्न वर्गों और कॉर्पोरेट जगत को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से इस बार के बजट में बहुत उम्मीदें थी। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण के दौरान कई अहम एलान किए लेकिन उनके बजट ने आम लोगों की आशाओं पर पानी फेर दिया। अगर बजट का आंकलन करें तो कहा जा सकता है कि आम बजट कुछ मुद्दों पर हिट रहा तो कई मुद्दे ऐसे भी रहे जिस पर लोगों की उम्मीदें टूटीं।

टैक्स स्लैब- उम्मीद और हकीकत

यह वेतनभोगी और मध्यम वर्ग की प्रमुख मांगों में से एक थी। पिछली बार मूल छूट की सीमा 2014 में बढाई गई थी जब इसे 2.5 लाख रुपये से 5 लाख रुपये कर दिया गया था। तब से इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि बजट 2017 में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने, सबसे कम टैक्स ब्रैकेट के लिए आयकर 5 प्रतिशत घटा दिया था।

बजट 2019 में प्रस्तावित आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 5 लाख रुपये तक की आय पर कर नहीं देना है। 5 करोड़ और 7 करोड़ के बीच आय वाले व्यक्तियों के लिए अधिभार में वृद्धि की गई है और यह क्रमशः 3 प्रतिशत और 7 प्रतिशत प्रस्तावित है।

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80C सीमा- उम्मीद और हकीकत

80C की सीमा में बढ़ोतरी करदाता की इच्छा सूची में शामिल एक और चीज थी। यह सीमा ही धारा 80 सी के तहत उपलब्ध कर लाभ की राशि को बढ़ाती-घटाती है । वर्तमान आयकर कानूनों के अनुसार एक व्यक्ति टैक्स बचाने के लिए निवेश करके अधिकतम 1.5 लाख रुपये के कर लाभ का दावा कर सकता है। आपको बता दें कि बजट 2014 में यह सीमा बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दी गई।

बजट 2019 में इस मुद्दे को नहीं छेड़ा गया है। बजट में इलेक्ट्रिक वाहन ऋणों पर दिए गए ब्याज पर 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त आयकर कटौती का प्रावधान है।

बचत ब्याज कटौती- उम्मीद और हकीकत

60 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति वर्तमान में बैंक या डाकघर के साथ रखे गए बचत खाते से अर्जित ब्याज पर 10,000 रुपये तक की कटौती के लिए दावा कर सकते हैं। आप सावधि जमा से अर्जित ब्याज के लिए भी इस कटौती का दावा नहीं कर सकते। हालांकि अंतरिम बजट में टीडीएस सीमा को बढ़ाकर 40,000 रुपये कर दिया गया था, लेकिन मध्यम वर्ग को इससे अधिक की उम्मीद थी।

बजट 2019 में इस संबंध में कोई संशोधन नहीं किया गया है।

होम लोन- उम्मीद और हकीकत

2022 तक सरकार के 'सभी के लिए आवास' के लक्ष्य को बढ़ावा देने के लिए, जनता ने आवास ऋणों पर भुगतान किए जाने वाले ब्याज पर कटौती की उम्मीद की थी। वर्तमान में आयकर कानून एक वित्तीय वर्ष में होम लोन पर दिए गए ब्याज पर अधिकतम 2 लाख रुपये की कटौती की अनुमति देते हैं। यह सीमा 2014 में अंतिम बार संशोधित की गई थी।

2019 के बजट में 45 लाख रुपये तक के घर की खरीद पर 31 मार्च, 2020 तक लिए गए कर्ज 1.5 लाख रुपये के ब्याज की अतिरिक्त कटौती होगी।

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Nirmala Sitharaman

मेडिकल, ट्रांसपोर्ट भत्ते- उम्मीद और हकीकत

चिकित्सा और परिवहन भत्ते के एवज में बजट 2018 में कटौती शुरू की गई थी। अंतरिम बजट से पहले उद्योग जगत ने अपनी पूर्व-बजट सिफारिशों में परिवहन भत्ते और मेडिकल क्लेम बिल पर छूट को बहाल करने के लिए सरकार से आग्रह किया। अन्य भत्ते जैसे कि बच्चों को मिलने वाला शिक्षा भत्ता और छात्रावास भत्ता, 100 रुपये और 300 रुपये से बढ़ाए जाने की उम्मीद थी।

2019 के बजट में सरकार ने इस सीमा को यथावत रखा है।

इन चीजों के लिए खर्च करने होंगे अधिक रुपए

- अब डीजल और पेट्रोल के लिए अधिक रुपए खर्च करने होंगे। वित्त मंत्री ने पेट्रोल डीजल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी में जहां 1 रुपये की बढ़ोतरी की है वहीं रोड और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस के नाम पर 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है, यानी अब पेट्रोल-डीजल 2 रुपए प्रति लीटर महंगा हो जाएगा।

- वित्त मंत्री ने सोने और कीमती धातुओं पर आयात शुल्क को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव किया है। इससे सोना चांदी और अन्य कीमती सामान महंगे हो जाएंगे।

- नकद में व्यावसायिक भुगतान को हतोत्साहित करने के लिए बैंक खाते से एक वर्ष में 1 करोड़ रुपये से अधिक निकासी पर 2% अतिरिक्त कर लगाया जाएगा।

आईटीआर दाखिल करना हुआ आसान

यदि आपके पास पैन नहीं है, तो भी आप ITR दाखिल कर सकते हैं। अब यह प्रक्रिया आधार के जरिये भी पूरी की जा सकेगी। इसके लिए सरकार पैन और आधार को लिंक करेगी। इलेक्ट्रॉनिक मोड में फेसलेस इनकम टैक्स असेसमेंट में इस साल कोई नया बदलाव नहीं किया गया है। ऐसा करदाता को उत्पीड़न से बचाने के लिए किया गया है।

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