मोदी सरकार पर लगा 1179 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप! कैग ने किया बड़ा खुलासा

मोदी सरकार पर लगा 1179 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप! कैग ने किया बड़ा खुलासा

| Publish: Jul, 17 2018 05:58:33 PM (IST) | Updated: Jul, 18 2018 08:38:30 AM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी कैग ने मोदी सरकार के 19 मंत्रालयों और उनके अधीन संचालित संस्थानों पर नियमों को दरकिनार कर पैसा खर्च करने की बात कही है।

नई दिल्ली। स्वच्छ और भ्रष्टाचार मुक्त सरकार का नारा देने वाली केंद्र की मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का पहला दाग लग गया है। देश की सबसे बड़ी ऑडिट एजेंसी कैग ने मोदी सरकार के 19 मंत्रालयों और उनके अधीन संचालित संस्थानों पर नियमों को दरकिनार कर पैसा खर्च करने की बात कही है। हिन्दी वेबसाइट जनसत्ता डॉट कॉम ने कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि इन मंत्रालयों की ओर से नियमों की अनदेखी करने के कारण सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगा है। कैग की ओर से चार अप्रैल 2018 को संसद में पेश की इस रिपोर्ट के मुताबिक इन 19 मंत्रालयों में 1179 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं। कैग ने ये अनियमितताएं मार्च 2017 तक के दस्तावेजों का ऑडिट करने के बाद पकड़ी हैं। इसमें भी मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय सबसे आगे है।

इन मंत्रालयों में सामने आया भ्रष्टाचार

कैग की रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2017 तक करीब 46 मंत्रालयों और विभागों के दस्तावेजों का ऑडिट किया। कैग के अनुसार इसमें से 19 मंत्रालयों और विभागों में 78 मामले गड़बड़ी के पकड़े गए। रिपोर्ट के अनुसार नियमों को दरकिनार करने में मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय सबसे आगे रहा है। इसके अलावा विदेश मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, संस्कृति, उपभोक्ता, मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री आदि मंत्रालयों में भी वित्तीय गड़बड़ी मिली है। कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते एक साल में इन मंत्रालयों का सकल खर्च भी 38 फीसदी से ज्यादा बढ़ गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 में इन मंत्रालयों का कुल खर्च 53,34.037 करोड़ रुपए था। 2016 में यही खर्च बढ़कर 73,62,394 हो गया।

एेसे हुई गड़बड़ी

कैग की रिपोर्ट के अनुसार इन मंत्रालयों ने अपने ही नियमों और प्रावधानों को दरकिनार कर बजट प्रबंधन में जमकर लापरवाही की। इसके अलावा मंत्रालयों ने परियोजनाओं के नाम पर अनियमित तरीके से भुगतान किया। कैग के अनुसार इन गड़बड़ियों की तरफ पहले भी इशारा किया गया था, लेकिन मंत्रालयों ने अपने कामकाज में कोई सुधार नहीं किया। कैग का कहना है कि सुषमा स्वराज के विदेश मंत्रालय में भारी अनियमितता सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार विदेश मंत्रालय की लापरवाही के चलते 76 करोड़ रुपए वीजा फीस के रूप में कम वसूले गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि तीन मंत्रालयों मानव संसाधन विकास मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग 89.56 करोड़ रुपए की वसूली करने में विफल रहे हैं। वित्तीय प्रबंधन के नियमों का पालन नहीं करने के कारण मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री को 13.76 करोड़ और संस्कृति मंत्रालय को 2.26 करोड़ का नुकसान हुआ है।

इन चार मंत्रालयों में नियमों का खुलकर उल्लंघन

कैग की रिपोर्ट के अनुसार चार मंत्रालयों में नियम-कायदों का खुलकर उल्लंघन किया गया है। इन मंत्रालयों में संस्कृति, विदेश मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और एमएचआरडी शामिल हैं। कैग की रिपोर्ट के अनुसार इन मंत्रालयों में कुल 10 मामले पकड़े गए हैं जिससे सरकार को 65.86 करोड़ रुपए का चूना लगा है। इन चारों मंत्रालयों की जिम्मेदारी पीएम मोदी के खास लोगों के पास है।

इन मंत्रालयों ने किया अनावश्यक खर्च

कैग की रिपोर्ट के अनुसार मोदी सरकार के कई मंत्रालयों ने अनावश्यक रूप से रुपए खर्च कर सरकार को करीब 18.87 करोड़ रुपए का चूना लगाया है। इसमें कृषि मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, गृह मंत्रालय, एमएचआरडी शामिल हैं। कैग रिपोर्ट में कहा गया है कि जांच के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय के अधीन इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की हैदराबाद यूनिट करीब 1.52 करोड़ के उपकरण बेकार पड़े मिले थे। इसके अलावा यहां पर 2.13 करोड़ के उपकरणों का पिछले पांच साल से कोई इस्तेमाल नहीं हुआ है। इसी प्रकार गृह मंत्रालय के अधीन दिल्ली पुलिस के लिए 1.11 करोड़ रुपए खर्च कर खरीदे गए सर्वर और सॉफ्टवेयर का बीते साढ़े तीन साल में कोई उपयोग नहीं हुआ है। आईआईटी मुंबई में भी एक मार्च 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच सेवा कर के रूप में 2.56 करोड़ रुपए के अनियमित भुगतान का मामला पकड़ा गया है।

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