सर्वे में खुलासा: स्वच्छ भारत अभियान की हकीकत, अभी भी मोदी सरकार के सपने नहीं हुए साकार

सर्वे में खुलासा: स्वच्छ भारत अभियान की हकीकत, अभी भी मोदी सरकार के सपने नहीं हुए साकार

Manish Ranjan | Publish: Jan, 10 2019 12:57:06 PM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत के तहत जो अभियान शुरू किया था इसकी पोल हाल ही में आए एक सर्वे ने खोल कर रख दी हैं।

नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि साफ-सफाई, ईश्वर भक्ति के बराबर है और इसलिए उन्होंने लोगों को स्वच्छता बनाए रखने की शिक्षा दी। महात्मा गांधी का सपना था कि भारत का हर कोना-कोना साफ-सुथरा और स्वच्छ हो। महात्मा गांधी के इसी सपने को साकार करने के लिए पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान की शुरूआत की थी। लेकिन पीएम मोदी ने स्वच्छ भारत के तहत जो अभियान शुरू किया था इसकी पोल हाल ही में आए एक सर्वे ने खोल कर रख दी हैं। पिछले दिनों आए एक सर्वे से ये पता चला है कि उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान में अभी भी 44 फीसदी लोग खुले में शौच कर रहे हैं। जबकि स्वच्छ भारत मिशन पोर्टल के अनुसार 98.6 फीसदी घरों में शौचालय बनाया जा चुका है।

राइस ने किया ये सर्वे

स्वच्छ भारत अभियान की ये पोल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर कम्पेशनेट इकोनॉमिक्स (राइस) और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) ने अपने एक सर्वे में खोली है। स्वच्छ भारत मिशन पोर्टल ने मध्य प्रदेश और राजस्थान को खुले में शौच मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया हुआ है। जबकि राइस के सर्वे के अनुसार ऐसा नहीं हैं। लोग इन राज्यों में लोग अभी भी खुल में शौच के लिए जाते हैं। राइस ने उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और राजस्थान के 1,558 घरों का सर्वे किया है। जिनसे ये साफ पता चलता है पिछले चार वर्षों में टॉयलेट निर्माण में काफी तेजी से हुआ है। लेकिन जो जानकारी स्वच्छ भारत मिशन पोर्टल दी गई है वो सहीं नहीं है।

ये है स्वच्छ भारत मिशन पोर्टल का कहना

स्वच्छ भारत मिशन पोर्टल पर बताया गया है कि बिहार में 92 फीसदी घरों में टॉयलेट हैं। जबकि राइस सर्वे के अनुसार बिहार में सिर्फ 50 फीसदी घरों में ही टॉयलेट हैं। स्वच्छ भारत मिशन पोर्टल में कहा गया है कि मध्य प्रदेश में खुले में शौच मुक्त है यानी की मध्य प्रदेश के हर घर में टॉयलेट हैं। जबकि राइस सर्वे के अनुसार मध्य प्रदेश में 90 फीसदी घरों में टॉयलेट हैं। तो वहीं स्वच्छ भारत मिशन पोर्टल में बताया गया है कि राजस्थान और उत्तर प्रदेश भी खुले में शौच मुक्त है यानी की यहां पर हर घर में टॉयलेट हैं। जबकि राइस सर्वे का कहना है कि राजस्थान में 78 फीसदी तो उत्तर प्रदेश में 73 फीसदी घरों में टॉयलेट हैं।

ऐसा रहा टॉयलेट का निर्माण

सर्वे में इस बात का भी खुलासा किया है कि पिछले 4 सालों में टॉयलेट के निर्माण में कितनी बढ़ोतरी हुई हैं। 2014 तक बिहार में 29 फीसदी और मध्य प्रदेश में 43 फीसदी घरों में टॉयलेट थे। जबकि 2018 में बिहार में 50 फीसदी और मध्य प्रदेश में 90 फीसदी घरों में टॉयलेट है। अब बात अगर राजस्थान और उत्तर प्रदेश की जाए तो 2014 तक राजस्थान में 31 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 42 फीसदी घरों में टॉयलेट थे। लेकिन अब राजस्थान में 78 फीसदी और उत्तर प्रदेश 73 फीसदी घरों में टॉयलेट है।

आधे से ज्यादा ग्रामीण परिवार खुले में करते शौच

नेशनल फैमली हेल्थ के डेटा के अनुसार 2015-16 में आधे से ज्यादा ग्रामीण परिवार खुले में शौच जाते थे। जिससे उनकी हेल्थ पर बुरा असर पड़ता था। लेकिन 2018 में सरकार की मदद और जागरूगत के कारण तक 71 फीसदी ग्रामीण परिवार ने घरों में टॉयलेट का निर्माण करवाया है। जो कि 2014 में सिर्फ 37 फीसदी तक था।

 

 

 

 

 

 

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