ऑफिस खोलने के लिए मुंबई सबसे पंसदीदा जगह, लीजिंग कारोबार में 25% की तेजी: रिपोर्ट

  • 2019 में मुंबई आफिस में निवेश में सबसे ऊपर, इसके बाद एनसीआर और हैदराबाद।
  • कुल निवेश का आंकड़ा लगभग 6.06 अरब अमेरिकी डालर, इसमें 40 प्रतिशत से ज्यादा ऑफिस सेक्टर में निवेश।

नई दिल्ली। सीबीआरई साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड, भारत के प्रमुख रीयल स्टेट कंसल्टिंग फर्म ने आज अपनी सबसे हाल की इंडिया ऑफिस मार्केटव्यू- क्यू 4 2019 रिपोर्ट के निष्कर्षों की घोषणा की। सीबीआरई रिपोर्ट के अनुसार लीजिंग का सकल कारोबार साल-दर-साल 25 प्रतिशत से अधिक बढ़ कर 60 मिलियन वर्गफुट से अधिक हो गया है और 2019 के अंत तक यह लगभग 6.6 मिलियन वर्गफुट की ऐतिहासिक ऊंचाई छू लेगा। सालाना आधार पर ऑफिस स्पेस लीज में चोटी पर बंगलुरु है जिसके बाद हैदराबाद, दिल्ली एनसीआर और मंुबई के नाम हैं। कुल मिला कर इन शहरों ने 75 प्रतिशत आफिस स्पेस लिए हैं।

ईज़ ऑफ डुइंग बिजनेस रैंकिंग में सुधार

अंशुमान मैगज़ीन, चेयरमैन एवं सीईओ - भारत, दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व एवं अफ्रीका, सीबीआरई ने बताया, ‘‘2019 में विभिन्न क्षेत्रों में नीतिगत सुधारों से व्यवसाय के प्रति सकारात्मक भावना बढ़ी है। परिणामस्वरूप ईज़ ऑफ डुइंग बिजनेस रैंकिंग में भारत ने जबरदस्त सुधार किया है। वल्र्ड बैंक के अनुसार ईज़ ऑफ डुइंग बिजनेस इंडेक्स पर 190 देशों में भारत 63वें स्थान पर है। सरकार की प्रगतिशील नीतियों के बल पर आने वाले वर्षों में इस रैंक में और सुधार की संभावना है। इसके परिणामस्वरूप 2019 में आफिस स्पेस सेक्टर में तेजी बनी रही है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों, घरेलू प्रतिष्ठानों की ओर से मांग बढ़ी है और हैदराबाद और बंगलुरु जैसे शहरों में अच्छी आपूर्ति भी देखी गई। आगामी वर्षों में रीयल स्टेट सेक्टर से जबरदस्त विकास एवं निवेश के अवसर बनने की संभावना है क्योंकि भारतीय अर्थव्यवस्था और मानव कार्यबलों का भी विस्तार हो रहा है। 2030 तक ऑफिस स्पेस स्टाक बढ़ कर एक अरब मिलियन वर्गफुट होने की उम्मीद है और फ्लेक्सिबल स्पेस मेनस्ट्रीम हो जाएगा जिसकी हिस्सेदारी कुल आफिस स्पेस स्टाक में 8-10 प्रतिशत होगी।’’

लीजिंग कारोबार में टेक फर्म सबसे आगे

2019 में कुल आफिस स्पेस लेने में टेक सेक्टर की 2018 में एक तिहाई हिस्सेदारी बढ़ कर लगभग 40 प्रतिशत हो गई; सालाना आधार पर कुल ऑफिस स्पेस लेने में ऐसे फम्र्स की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत से अधिक बढ़ी। इस तेजी में मुख्य योगदान विश्वस्तरीय बहुर्राष्ट्रीय संगठनों का था जिन्होंने इस साल कुल ऑफिस स्पेस में 70 प्रतिशत से अधिक की हिस्सेदारी की। रिसर्च, कंसल्टिंग और एनालिटिक्स फम्र्स की 2018 में 4 प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ कर 2019 में 5 प्रतिशत हो गई। इंजीनियरिंग एवं निर्माण, बीएफएसआई, ई-कॉमर्स एवं रिसर्च, कंसल्टिंग और एनालिटिक्स जैसे सेक्टरों की कुल मिला कर 2018 में 36 प्रतिशत हिस्सेदारी घट कर 2019 में 31 प्रतिशत हो गई। ऐसे कई कॉर्पोरेट ने आगामी सनसेट क्लॉज समाप्ति नजदीक होने के बावजूद एसईजैड में दिलचस्पी दिखाई। इस दौरान ऑक्युपायरों की फ्लेक्सिबल स्पेस में दिलचस्पी बनी रही। इस सेगमेंट की 2018 में 12 प्रतिशत हिस्सेदारी बढ़ कर 2019 में लगभग 14 प्रतिशत हो गई।

इस दौरान इसकी संभावना है कि ऑक्युपायर्स ‘कोरफ्लेक्सी’ स्ट्रैटेजी के साथ उनके रीयल स्टेट पोर्टफोलियो में एजीलीटी (उपयुक्तता) का आकलन जारी रखेंगे ताकि ज्यादा ग्राहक मिले। श्री राम चंदानी, प्रबंध निदेशक, एडवाइजरी एवं ट्रांजेक्शन सर्विसेज़, सीबीआरई साउथ एशिया प्राइवेट लिमिटेड ने कहा, ‘‘यह संभावना है कि कई ऑक्युपायर उनके पोर्टफोलियो की नई संरचना के लिए नए वर्कप्लेस की स्ट्रैटजी बनाएंगे। इसके लिए वे उनके कोर वर्कप्लेस में उपयुक्तता का सही तालमेल करने के साथ बाहर के फ्लेक्सिबल ऑक्युपायर्स (खास कर मैनेज्ड स्पेस) भी शामिल करेंगे। टेक और वर्कप्लेस में बदलाव ऑक्युपायर्स की उच्च प्राथमिकता रहेगी। इस तरह कार्मिकों को रीयल स्टेट की सभी स्ट्रैटेजी के केंद्र बिन्दु में रखा जाएगा। इस दिशा में बढ़ते हुए यह उम्मीद है कि ऑक्युपायर्स उनके कार्मिकों के कल्याण समुदाय जिसमें वे कार्यरत हैं, सस्टेनेबलीटी और व्यापक पर्यावरण के बारे में अधिक सजग होंगे। हमें यह भी उम्मीद है कि भारत में ऑफिस ऐसेट्स भावी आरईआईटी पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रहेगा। इससे आने वाले समय में निवेशकों और डेवलपरों की दिलचस्पी बढ़ेगी।’’

प्री-लीजिंग कारोबार बढ़ा

ऑक्युपायर्स ने उनके पोर्टफोलियो को फ्यूचर-प्रूफ बनाने की प्रक्रिया जारी रखी है और भावी रेंटल बढ़ोतरी से बचने के लिए विभिन्न शहरों में स्पेस की प्री-लीजिंग की है। 2019 में 20 मिलियन वर्गफुट से अधिक प्री-लीजिंग कारोबार दर्ज किया गया। यह मुख्यतः बंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और मुंबई में देखा गया। 2019 में 52 मिलियन वर्गफुट से अधिक नई ऑफिस सप्लाई दर्ज की गई; इसमें सबसे अधिक हैदराबाद और तब दिल्ली एनसीआर, बंगलुरु और पुणे का नाम है। 2019 में सप्लाई में साल-दर-साल 50 प्रतिशत वृद्धि के साथ 52.4 मिलियन वर्ग फुट का आंकड़ा दर्ज किया गया। श्री चंदानी ने बताया, ‘‘2019 में सप्लाई में बढ़ोतरी की वजह विभिन्न शहरों में वाॅक्युपेशन सर्टिफिकेट का मिलना है जिसका लंबे समय से इंतजार था। एक अन्य वजह पिछले साल के प्री-कमिटमेंट थे जो 2019 में पूरे किए गए। इसके परिणामस्वरूप स्पेस लेने का आंकड़ा ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया। 2020 में सप्लाई सामान्य स्तर पर आने की उम्मीद है। इससे आने वाले वर्ष में खपत बढ़ कर स्थिर और सप्लाई के अनुरूप हो जाएगा।’’

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