पेट्रोल-डीजल पर GST: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिए संकेत, जानिए आपको क्या होगा फायदा

पेट्रोल-डीजल पर GST: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिए संकेत, जानिए आपको क्या होगा फायदा

Ashutosh Kumar Verma | Publish: Jun, 25 2019 05:27:08 PM (IST) | Updated: Jun, 25 2019 07:16:34 PM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

  • पेट्रोलियम पदार्थों पर कम हो सकता है जीएसटी।
  • GST Council की सिफारिशों के आधार पर अधिसूचित।
  • फिलहाल GST की अधिकतम स्लैब से दोगुना लगता है टैक्स।

नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ( Nirmala Sitharaman ) ने भविष्य में पेट्रोलियम उत्पादों को वस्तु एवं सेवा कर ( GST ) के दायरे में लाने के संकेत दी हैं। गत सोमवार को निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाने का सुझाव नहीं है, लेकिन इसे एक टैक्स सिस्टम के अंतर्गत लाने के बारे में सोचा जा सकता है। उन्होंने कहा कच्चे पेट्रोलियम हाई स्पीड डीजल मोटर Spirit सामान्यता जिसे पेट्रोल के नाम से जाना जाना जाता है प्राकृतिक गैस एविएशन टर्बाइन ईंधन ( aviation turbine fuel ) को भविष्य में जीएसटी के दायरे में लाया जा सकता है जिसे जीएसटी काउंसिल ( GST Council ) की सिफारिशों के आधार पर अधिसूचित किया जा सकता है


पेट्रोल-डीजल पर टैक्स क्या है मौजूदा व्यवस्था

बता दें कि मौजूदा टैक्स सिस्टम के तहत पेट्रोल-डीजल ( Petrol-Diesel ) पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी ( Excise Duty ) और राज्य सरकारें वैट ( VAT ) वसूलती हैं। राज्य सरकारें अपने हिसाब से यह वैट तय करती हैं। कुछ राज्यों में फिलहाल पेट्रोल-डीजल पर 60-70 फीसदी तक टैक्स लगाते हैं। GST की तुलना में देखें तो यह दोगुने से भी अधिक है, क्योंकि GST की उच्चतम दर 28 फीसदी ही है। इस मामले पर कुछ जानकारों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल पर मौजूदा जीएसटी स्लैब ( GST Slab ) के तहत टैक्स लगाया जाता है तो इससे कई राज्यों की अर्थव्यवस्था चरमार सकती है। यही वजह है कि राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर GST लागने का विरोध करती रही हैं।

यह भी पढ़ें - Petrol-diesel price Today: दो दिन के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला थमा

क्या टैक्स कम करने से अर्थव्यवस्था में सुधार होगा?

कुछ जीएसटी विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि केंद्र सरकार के इस कदम से आर्थिक सुधार देखने को मिल सकता है। उनकी दलील है कि जीएसटी के दायरे में आने के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बड़ी कमी देखने को मिल सकती है, जिससे आम जनता को फायदा होगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम होने की वजह से लोगों की पर्चेजिंग पावर बढ़ेगी और इससे अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सकेगा। हालांकि, यह भी ध्यान देने योग्य है कि पेट्रोल-डीजल पर जीएसटी लगाने के लिए केवल केंद्र सरकार ही फैसले नहीं ले सकती। इसके लिए उसे राज्यों से भी सहमति लेनी जरूरी होगी।

यह भी पढ़ें - GST Council 35th Meeting: आधार से कर सकेंगे रजिस्ट्रेशन, 31 अगस्त तक बढ़ी रिटर्न की तारीख

फिलाहल एक लीटर पेट्रोल-डीजल पर कैसे लगता है टैक्स

वर्तमान में पेट्रोल पंप से मिलने वाले एक लीटर पेट्रोल की वास्तविक कीमत 33.23 रुपये, फ्रेट प्राइस 0.31 पैसे, डीलर कमीशन 3.54 रुपये, एक्साइज ड्यूटी 17.98 रुपये, वैट 14.87 रुपये होता है। यह बिल्डअप दिल्ली में बिकने वाले एक लीटर पेट्रोल के लिए है। इसी प्रकार दिल्ली में एक लीटर डीजल का बेस प्राइस 37.83 रुपये, फ्रेट प्राइस 0.28 पैसे, एक्साइज ड्यूटी 13.83 रुपये, डीलर्स कमीशन 2.49 रुपये और वैट 9.41 रुपये लगता है। बता दें जीएसटी लागू होने के बाद से ही इस बार चर्चा चल रही है क्या पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा या नहीं। पिछले सरकार में तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस बात के संकेत दिए थे।

Business जगत से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter पर और पाएं बाजार, फाइनेंस, इंडस्‍ट्री, अर्थव्‍यवस्‍था, कॉर्पोरेट, म्‍युचुअल फंड के हर अपडेट के लिए Download करें Patrika Hindi News App.

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned