रिसर्च रिपोर्ट: 7 फीसदी जीडीपी के बाद भी रोजगार पर कहीं नहीं ठहरती मोदी सरकार

  • 47 फीसदी लोगों के मुताबिक रोजगार की स्थिति बहुत बुरी है
  • 21 फीसदी लोगों का मानना है कि रोजगार की हालत में सुधार

 

By: manish ranjan

Updated: 30 Mar 2019, 09:16 AM IST

नई दिल्ली। रोजगार के आंकड़ों को लेकर आए दिन सवालों में घिरने वाली मोदी सरकार की परेशानी अमरीकी संगठन प्यू रिसर्च की एक रिपोर्ट और बढ़ा सकती है। प्यू रिसर्च सेंटर के एक ताजा सर्वे के मुताबिक 67 प्रतिशत लोगों का मानना है कि देश में रोजगार के हालात बदतर हुए हैं। करीब 47 प्रतिशत लोगों ने तो यहां तक कहा कि रोजगार की स्थिति बहुत बुरी। रोजगार की हालत में सुधार की बात कहने वाले लोग महज 21 फीसदी हैं।

रोजगार की स्थिति खराब
रिपोर्ट के मुताबिक देश की आर्थिक विकास दर सात फीसदी के दायरे में होने के बावजूद रोजगार में महज 3 से 4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह बताती है कि इस समय रोजगार सृजन और आर्थिक वृद्धि का संबंध पहले से कहीं ज्यादा खराब है। रोजगार सृजन का स्तर 7 प्रतिशत की विकास दर के अनुरूप नहीं है। पहले जब विकास दर 8 प्रतिशत थी तो रोजगार में वृद्धि का आंकड़ा 6 से 7 फीसदी के आसपास थी।

कई वजहों से घटा है रोजगार
अर्थशास्त्री भी मान रहे हैं कि आर्थिक विकास दर के अनुपात में रोजगार सृजन नहीं हो पाया है। इसके लिए बैंकिंग तंत्र और छोटे-मझोले उद्योगों के समक्ष नकदी के संकट को एक बड़ी वजह माना जा रह है। इसके अलावा नोटबंदी और जीएसटी से कारोबार समक्ष खड़ी हुई परेशानियों से भी रोजगार को झटका लगा है। कृषि संकट और रियल एस्टेट जैसे रोजगा प्रदान करने वाले सेक्टरों में सुस्ती की भी इसमें भूमिका रही।

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