प्लास्टिक बोतलों के कचरे के आयात पर रोक, पर्यवरण नुकसान के तहत उठाया गया कदम

  • पर्यावरण सुरक्षा के तहत उठाया गया अहम कदम
  • प्लास्टिक बोतलों के कचरे के आयात पर लगी रोक

नई दिल्ली। सरकार ने प्लास्टिक कचरे के बोझ को कम करने के उद्देश्य से धुली तथा कटी हुई प्लास्टिक बोतलों के आयात को प्रतिबंधित कर दिया है। गैर सरकारी संगठन पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति मंच (पीडीयूएसएम) ने शुक्रवार को यहां जारी एक बयान में कहा कि वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने उसके द्वारा दी गयी प्रस्तुति के आधार पर यह प्रतिबंध लगाया है।

भारतीय रिसाइकिल कंपनियां और कपड़ा उद्योग अवैध रूप से प्लास्टिक बोतलों के कचरे को फ्लैक्स के रूप में पाकिस्तान, बंगलादेश एवं अन्य देशों से आयात कर रहे थे क्योंकि यह रीसाइकल्ड के लिए स्थानीय स्तर पर उत्पादित प्लास्टिक कचरे को इक्ठ्ठा करने की तुलना में सस्ता होता था। मंत्रालय के खतरनाक पदार्थ प्रबंधन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। पीडीयूएसएम के अध्यक्ष विनोद शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूरा देश प्लास्टिक कचरे के संग्रह और पुनर्चक्रण सिस्टम को मजबूत बनाने के तरीकों की तलाश में है। लेकिन रीसाइकल्ड और कपड़ा उद्योग अपने लाभ के लिए अन्य देशों से प्लास्टिक कचरे का आयात कर रहे थे।

आयात तंत्र में एक छोटी खामी के चलते भारतीय कंपनियां पेट बोतलों के कचरे को आयात एवं रीसाइकल्ड करके विभिन्न उत्पादों के निर्माण में उपयोग करते थे। वे इन पेट बोतलों को रीसाइकल करके पॉलिएस्टर कारपेट, टी-शर्ट, एथलेटिक जूते, सामान, औद्योगिक स्ट्रैङ्क्षपग, ऑटोमोटिव पार्ट, सामान की रैक, फ्यूज बॉक्स, बंपर और डोर पैनल आदि का निर्माण कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनका संगठन इन उद्योगों के खिलाफ नहीं हैं लेकिन हम चाहते हैं कि वे उत्पादों के विनिर्माण में स्थानीय स्तर पर उत्पादित प्लास्टिक कचरे का उपयोग करें, जिससे उनका व्यापार सुचारू रहे और वे देश को प्लास्टिक कचरा मुक्त बनाने में भी मदद कर सकें। शुक्ला ने कहा कि प्लास्टिक कचरे के संग्रह, पृथक्करण और पुनर्चक्रण के लिए बड़ी संख्या में मानव शक्ति की जरूरत है, जो अपशिष्ट प्रबंधन और रीसाइकल्ड उद्योग में भारत भर में लाखों नए रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद करेगा।

शुक्ला ने कहा कि उनके संगठन ने पिछले कुछ महीने में पर्यावरण मंत्रालय के साथ कई बार फ्लैक्स एवं लम्प्स के आयात प्रतिबंध पर चर्चा की। भारत ने अप्रैल 2018 से फरवरी 2019 के बीच पाकिस्तान, बांगलादेश, दक्षिण कोरिया और अमेरिका आदि देशों से 99,545 टन प्लास्टिक के गुच्छे और 21,801 टन प्लास्टिक की गांठ का आयात किया था। जिसमें से 55 हजार टन केवल पाकिस्तान और बांगलादेश से आया था। उन्होंने कहा कि प्लास्टिक रीसाइकल्ड वैश्विक रीसाइकल्ड अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसका आकार में 317 अरब डॉलर है और लाखों लोग इसमें कार्यरत हैं। भारत में प्लास्टिक रीसाइङ्क्षक्लग की सही क्षमता का एहसास नहीं है जबकि भारतीय पुनर्चक्रण उद्योग को सुव्यवस्थित करके रोजगार और राजस्व बढ़ाये जा सकते हैं। पीडीयूएसएम देश को 'प्लास्टिक अपशिष्ट मुक्त राष्ट्र बनाने की दिशा में काम कर रहा है। कचरा संग्रह करने वाले भारतीय अपशिष्ट संग्रह और रीसाइकल्ड क्षेत्र के महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और उनके बिना देश की अपशिष्ट समस्या बहुत खराब होती।

manish ranjan
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