एनबीएफसी को नकदी संकट से बचाने के लिए आरबीआई बनाया खास प्लान, ऐसे उपलब्ध होगी पूंजी

एनबीएफसी को नकदी संकट से बचाने के लिए आरबीआई बनाया खास प्लान, ऐसे उपलब्ध होगी पूंजी

Ashutosh Kumar Verma | Publish: May, 26 2019 12:38:19 PM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

  • आरबीआई ने शुक्रवार को एनबीएफसी के लिए नकदी जोखिम प्रबंधन रूपरेखा का मसौदा जारी किया है।
  • रिजर्व बैंक की योजना है कि बड़ी एनबीएफसी कंपनियां सरकारी बॉन्ड या जमा योजनाओं में निवेश करें ताकि नकदी संकट के समय एक माह के भुगतान के लिये उनके पास पर्याप्त पूंजी उपलब्ध हो।
  • यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होगी।

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को नकदी संकट के समय राहत दिलाने के लिये एक जोखिम प्रबंधन मसौदा जारी किया है। रिजर्व बैंक की योजना है कि बड़ी एनबीएफसी कंपनियां सरकारी बॉन्ड या जमा योजनाओं में निवेश करें ताकि नकदी संकट के समय एक माह के भुगतान के लिये उनके पास पर्याप्त पूंजी उपलब्ध हो। आरबीआई ने शुक्रवार को एनबीएफसी के लिए नकदी जोखिम प्रबंधन रूपरेखा का मसौदा जारी किया है। केंद्रीय बैंक की ओर से यह कदम ऐसे समय उठाया गया है कि जब कई बड़ी एनबीएफसी कंपनियां नकदी संकट से जूझ रही हैं। जिसके चलते उन्हें कोष जुटाने के लिये भारी मशक्कत करनी पड़ रही है।

यह भी पढ़ें - दर्शन के लिए बद्रीनाथ पहुंचे मुकेश अंबानी, चंदन और केसर के लिए दान किए 2 करोड़ रुपए

प्रस्ताव के मुताबिक 5,000 करोड़ रुपये और उससे अधिक परिसंपत्ति की जमा राशि स्वीकार करने वाले सभी एनबीएफसी और ऐसे वित्तीय संस्थान जो जमा स्वीकार नहीं करते हैं उन सभी के लिये एक तरलता कवरेज अनुपात (एलसीआर) व्यवस्था लागू की जायेगी। यह व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से लागू होगी। एलसीआर व्यवस्था को चार साल की अवधि में आगे बढ़ाया जायेगा। वित्तीय कंपनियों में अप्रैल, 2020 से अप्रैल, 2024 के दौरान इसे क्रियान्वित किया जाएगा। एलसीआर दिशानिर्देशों के तहत, वित्तीय कंपनियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनकी उधारी मोटे तौर पर उनके कर्ज की परिपक्वता से मेल खाती हो।

यह भी पढ़ें - नरेश गोयल की भारत से फरार होने की कोशिश हुई नाकाम, इमिग्रेशन डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने फ्लाइट में से उतारा

मसौदे में कहा गया है कि "एनबीएफसी को चरणबद्ध तरीके से अपनी पूंजी में "उच्च गुणवत्ता की नकदी परिसंपत्तियों" का हिस्सा बरकरार रखना होगा। ये उच्च गुणवत्ता वाली परिसंपत्तियां नकदी जमा, सरकारी बॉन्ड या उच्च श्रेणी वाले बॉन्ड हो सकती हैं।" मसौदे में कहा गया है, "एलसीआर आवश्यकता एक अप्रैल, 2020 से एनबीएफसी पर बाध्यकारी होगी और उनका न्यूनतम एलसीआर 60 प्रतिशत होना चाहिए। इसके बाद इसे एक अप्रैल, 2024 तक इस बढ़ाकर 100 फीसदी के स्तर तक पहुंचाना होगा।" उल्लेखनीय है कि वित्त कंपनियों द्वारा जारी बांड पत्रों में जो राशि निवेश की गई ज्यादातर म्यूचुअल फंड योजनाओं का धन था। आईएलएण्डएफएस फाइनेंसियल सविर्सिज का संकट गहराने के बाद ऐसी कई योजनाओं को झटका लगा।

Business जगत से जुड़ी Hindi News के अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें Facebook पर Like करें, Follow करें Twitter पर और पाएं बाजार, फाइनेंस, इंडस्‍ट्री, अर्थव्‍यवस्‍था, कॉर्पोरेट, म्‍युचुअल फंड के हर अपडेट के लिए Download करें Patrika Hindi News App.

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned