2019 में व्यापारिक तनाव से अंधकारमय रह सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था, विश्व बैंक ने रिपोर्ट में किया दावा

2019 में व्यापारिक तनाव से अंधकारमय रह सकती है वैश्विक अर्थव्यवस्था, विश्व बैंक ने रिपोर्ट में किया दावा

Ashutosh Kumar Verma | Publish: Jan, 09 2019 06:47:50 PM (IST) अर्थव्‍यवस्‍था

विश्व बैंक ने 2019 के लिए अपने वैश्विक आर्थिक विकास दर अनुमान में संशोधन करते हुए इसे तीन फीसदी से घटाकर 2.9 फीसदी कर दिया है।

नर्इ दिल्ली। विश्व बैंक ने 2019 के लिए अपने वैश्विक आर्थिक विकास दर अनुमान में संशोधन करते हुए इसे तीन फीसदी से घटाकर 2.9 फीसदी कर दिया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की एक रिपोर्ट के अनुसार, विश्व बैंक ने मंगलवार को जारी अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का आउटलुक अंधकारमय हो गया है क्योंकि दुनियाभर में वित्तीय स्थिति तंग हो चुकी है और व्यापारिक तनाव बढ़ गया है, जिससे उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं काफी वित्तीय दबाव में हैं।


कितनी तेज रहेगी विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था

विश्व बैंक ने रिपोर्ट में कहा, "इन विषम परिस्थितियों में उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सुधार की रफ्तार थम चुकी है।" रिपोर्ट में विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर 2019 में 4.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जो विश्व बैंक की जून में जारी की गई रिपोर्ट में रिपोर्ट से 0.5 फीसदी कम है। वहीं, विकसित अर्थव्यवस्थाओं की विकास दर 2019 में दो फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जोकि 2018 में 2.2 फीसदी था। रिपोर्ट में प्रमुख केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों में समायोजन से हाथ खींचने को इसकी वजह के रूप में पेश किया गया है।


कितनी रहेगी चीन की आर्थिक विकास दर

रिपोर्ट के अनुसार, मंदी का खतरा गहरा गया और वित्तीय बाजार की चाल बिगड़ने की संभावना बढ़ गई है। रिपोर्ट में इस बात की चेतावनी दी गई है कि बढ़ते व्यापारिक तनाव के कारण वैश्विक आर्थिक विकास की रफ्तार मंद पड़ सकती है और इससे दुनियाभर में एक-दूसरे से जुड़ी मूल्य श्रंखला प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में चीन की आर्थिक विकास दर 2019 में 6.2 फीसदी रहने का अनुमान लगाया गया है, जबकि 2018 में 6.5 फीसदी का अनुमान लगाया गया था।


विश्व बैंक ने क्या कहा

विश्व बैंक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टलिना जॉर्जीवा ने एक बयान में कहा, "2018 के आरंभ में दुनिया की अर्थव्यवस्था की रफ्तार तीव्र थी, लेकिन बाद में मंद पड़ गई और आने वाले साल में स्थिति कुछ अधिक विषम रह सकती है।" उन्होंने कहा, "उभरते और विकासशील देशों के लिए आर्थिक और वित्तीय संकट बढ़ गए हैं, इसलिए अत्यंत गरीबी को कम करने की दिशा में वैश्विक प्रगति खतरे में पड़ सकती है।"

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