स्टुडेंट्स के लिए अच्छी खबर : केंद्र सरकार लेकर आ रही है बीए, बीकॉम, बीएससी अप्रेंटिसशिप प्रोग्राम

देश के युवाओं के लिए एक अच्छी खबर यह है कि केंद्र सरकार जल्द ही बीए, बीकॉम और बीएससी के विद्यार्थियों के लिए एक अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम लाने जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य उन्हें रोजगार के लायक बनाना है।

By: जमील खान

Published: 18 Dec 2018, 02:54 PM IST

देश के युवाओं के लिए एक अच्छी खबर यह है कि केंद्र सरकार जल्द ही बीए, बीकॉम और बीएससी के विद्यार्थियों के लिए एक अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम लाने जा रही है, जिसका मुख्य उद्देश्य उन्हें रोजगार के लायक बनाना है। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि विद्यार्थियों को उनकी पाठ्यचर्या के अलावा 1,000 घंटे का अतिरिक्तपाठ्यक्रम प्रदान किया जाएगा, जिसमें उन्हें व्यक्तित्व विकास, संवाद जैसे कौशल के पाठ पढ़ाए जाएंगे, ताकि डिग्री हासिल करने के बाद उन्हें नौकरी मिल सके।

जावड़ेकर ने राज्यसभा टीवी के साथ विशेष बातचीत में कहा है, यह एक कसौटी होगी। नई शिक्षा नीति की भी घोषणा जल्द की जाएगी। जावड़ेकर ने कहा कि अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम का कार्यान्वयन कौशल विकास और श्रम मंत्रालय द्वारा किया जाएगा। नई शिक्षा नीति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, यह समानता, पहुंच, खर्च वहनीयता, गुणवत्ता के आधार पर होगी।

डिजिटीकरण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए जावड़ेकर ने कहा, 'केंद्र सरकार जल्द ही ऑपरेशन डिजिटल ब्लैकबोर्ड शुरू करने जा रही है, जिसके तहत अगले चार सालों में15 लाख वर्गकक्ष बनाए जाएंगे। डिजिटल ब्लैकबोर्ड नौवीं कक्षा से लेकर परास्नातक स्तर तक के विद्यार्थियों के लिए होंगे। उन्होंने कहा कि डिजिटीकरण दूरदराज के इलाकों में काफी बेहतर है और इसकी कामयाबी संतोषप्रद है। गृहकार्य के बोझ तले दबे स्कूली विद्यार्थियों के लिए भी अच्छी खबर है कि उन्हें अब गृहकार्य कम से कम दिए जाएंगे।

मानव संसाधन विकास मंत्री ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों को कम से कम गृहकार्य दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि माता-पिता द्वारा बच्चों के प्रोजेक्ट पूरा करने के कार्य को रोका जाना चाहिए। मानव संसाधन विकास मंत्री जावड़ेकर ने अपना उदाहरण देते हुए बताया कि निजी स्कूलों में किस तरह बच्चों पर बोझ लादा जाता है। उन्होंने कहा कि उनकी पोती को ए-गे्रड इसलिए नहीं दिया गया, क्योंकि उसके माता-पिता ने उसका प्रोजेक्ट पूरा नहीं किया था।

जमील खान
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