इस बात की उम्मीद नहीं रख सकते की बच्चे स्कूल जाने के लिए 3 किलोमीटर चलें : एससी

Jameel Khan

Publish: Sep, 11 2017 06:35:00 PM (IST)

शिक्षा
इस बात की उम्मीद नहीं रख सकते की बच्चे स्कूल जाने के लिए 3 किलोमीटर चलें : एससी

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि हम यह उम्मीद नहीं कर सकते कि 10 से 14 साल के बच्चों को स्कूल जाने के लिए 3-4 किलोमीटर का सफर पैदल चलकर तय करना पड़े।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि इस बात की उम्मीद नहीं रखी जा सकती की स्कूल जाने के लिए बच्चों को तीन किलोमीटर या उससे अधिक पैदल चलना पड़े। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) को सार्थक बनाने के लिए, हमें ये कोशिश करनी चाहिए कि प्राथमिक विद्यालय इतनी दूरी पर हों कि बच्चों को ज्यादा दूर नहीं चलना पड़े।

कोर्ट केरल के एक स्कूल द्वारा दूसरे स्कूल को अपग्रेड करने की मिली स्वीकृति के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई कर रहा था। गौरतलब है कि केरल देश का सबसे ज्यादा साक्षर दर वाला राज्य है। सुनवाई के दौरान जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की खंडपीठ ने पाया कि राज्य के पारप्पनगाड़ी शहर के प्राथमिक विद्यालय की चौथी कक्षा पास करने वाले विद्यार्थियों को स्कूल जाने के लिए 3-4 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है।

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि हम यह उम्मीद नहीं कर सकते कि 10 से 14 साल के बच्चों को स्कूल जाने के लिए 3-4 किलोमीटर का सफर पैदल चलकर तय करना पड़े। कोर्ट ने आगे कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 ए के तहत 14 साल तक की उम्र के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार मूलभूत अधिकार है। अगर इस अधिकार को सार्थक बनाना है तो हमें यह कोशिश करनी चाहिए कि प्राथमिक विद्यालयों को इस तरह खोलना चाहिए ताकि बच्चों को तीन किलोमीटर या उससे अधिक का सफर तय नहीं करना पड़े।

हाई कोर्ट की एकल पीठ ने स्कूल की याचिका को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार के उस आदेश पर यह कहते हुए रोक लगा दी थी कि आरटीई के तहत नियमों की पालना नहीं की गई थी। हालांकि, कोर्ट ने कनिष्ठ प्राथमिक विद्यालय को इस बात की इजाजत दे दी थी कि वह उन बच्चों को अगले साल तक पढ़ाई करने दे जो वहां दाखिला ले चुके हैं। साथ ही यह भी कहा कि इस मामले में सरकार नया फैसला ले सकती है।

प्राथमिक विद्यालय ने एकल पीठ के आदेश को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी जिसे बेंच ने खारिज कर दिया था। इसके बाद स्कूल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की जहां उसके वकील ने कोर्ट को बताया कि राज्य सरकार ने उसके हक में सचेतन फैसला लिया था और उसे आरटीई कानून के तहत कुछ प्रावधानों में छूट दी गई थी। उसके बाद ही उसे वर्ष २०१५-१६ के लिए स्कूल को अपर प्राइमरी स्कूल में अपग्रेड किया गया था।

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