भारत का पहला पशु कानून केंद्र हैदराबाद में स्थापित

Jameel Khan

Publish: Sep, 17 2017 08:45:56 PM (IST)

शिक्षा
भारत का पहला पशु कानून केंद्र हैदराबाद में स्थापित

नालसार कानून विश्वविद्यालय में भारत का पहला पहला पशु कानून केंद्र स्थापित किया गया है।

हैदराबाद। नालसार कानून विश्वविद्यालय में भारत का पहला पहला पशु कानून केंद्र स्थापित किया गया है। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रमेनका गांधी ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय में इस केंद्र का उद्घाटन किया। केंद्र के संरक्षक के रूप में उन्होंने विद्यार्थियों को महत्वपूर्ण मुद्दों पर शोध करने की सलाह दी।

उन्होंने कहा कि पशु अधिकारों और उनके कल्याण पर में बढ़ती मुकदमेबाजी के देखते हुए कई मुद्दों पर अधिक शोध की आवश्यकता है। यह केंद्र अनुसंधान के लिए विकासशील विषयों सहित पशु कल्याण कानूनों पर पाठ्यक्रम तैयार करेगा।

यह न्यायिक मजिस्ट्रेट, पशु कल्याण अधिवक्ताओं, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और सरकार के अन्य हितधारकों के साथ पशु कानूनों और पशु कल्याण के मुद्दों पर कार्यशालाएं भी आयोजित करेगा।

 

शिक्षा के क्षेत्र में मॉडल के रूप में उभर रहा है राजस्थान : देवनानी
जयपुर। राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा है कि राज्य शिक्षा के क्षेत्र में मॉडल के रूप में उभर रहा है। देवनानी टोंक जिले में देवली के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के दो दिवसीय शैक्षिक अधिवेशन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने कक्षा एक से आठ तक फेल नहीं करने का निर्णय लेकर शिक्षा के स्तर को गिरा दिया था।

उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षा में नवाचार करते हुए कक्षा पांच एवं आठ में फेल नहीं करने के निर्णय को बदलकर परीक्षा द्वारा परिणाम देने का निर्णय लिया है तथा डीपीसी चालू करना, सेटअप परिवर्तन को लागू करना जैसे कई महत्वपूर्ण निर्णय लेकर शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि की है और इसके परिणाम भी सामने आए।

 

अगले 5 साल में भारत 100 फीसदी साक्षरता हासिल कर लेगा : जावड़ेकर
जयपुर। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को दावा किया कि अगले पांच वर्षों में भारत 100 फीसदी साक्षरता दर हासिल कर लेगा। राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित 'फेस्टिवल ऑफ एजुकेशनÓ का उद्घाटन करते हुए जावड़ेकर ने कहा, आजादी से पहले देश की साक्षरता दर 18 फीसदी थी। आज यह 80 फीसदी से ऊपर हो चुकी है और मैं गारंटी देता हूं कि अगले पांच वर्षों में यह 100 फीसदी हो जाएगी। मतलब देश में कोई निरक्षर नहीं रह जाएगा।

जावड़ेकर ने कहा, कक्षा 6 से कक्षा 12 के विद्यार्थियों को इस तरह का प्रशिक्षण दिया जा रहा है कि वे अपने परिजनों, दादा-दादी और नाना-नानी तथा परिवार में अन्य निरक्षर व्यक्तियों को ज्ञान बांट सकें। ये बच्चे ही उनके लिए गुरु होंगे। उन्होंने कहा, और इस तरह हम देश से निरक्षरता को जड़ से खत्म कर देंगे। जावड़ेकर ने साथ ही यह भी कहा कि साक्षरता सिर्फ लिखना-पढऩा भर नहीं है, बल्कि ढेर सारा ज्ञान हासिल करना है।

उन्होंने कहा, हमारी प्राथमिकता शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ रोजगार हासिल करना नहीं है, बल्कि एक अच्छा इंसान होने के लिए भी यह जरूरी है।

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