मनीष सिसोदिया ने स्कूलों को फिर से खोलने की योजना पर HRD मंत्रालय को लिखा पत्र

के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Delhi Deputy Chief Minister Manish Sisodia) ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' (Union Human Resource Development Minister Ramesh Pokharyal) को पत्र लिखकर मंत्रालय के द्वारा उचित दिशा-निर्शेदों के साथ स्कूलों को फिर से खोलने की पहल का समर्थन किया है।

By: जमील खान

Published: 06 Jun 2020, 10:02 PM IST

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया (Delhi Deputy Chief Minister Manish Sisodia) ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल 'निशंक' (Union Human Resource Development Minister Ramesh Pokharyal) को पत्र लिखकर मंत्रालय के द्वारा उचित दिशा-निर्शेदों के साथ स्कूलों को फिर से खोलने की पहल का समर्थन किया है। शनिवार को जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, सिसोदिया ने अपने पत्र में कहा कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Chief Minister Arvind Kejriwal) ने कहा था कि हमें कोरोनावायरस (Coronavirus) के साथ रहना सीखना होगा और कहा कि उचित सावधानियों के साथ स्कूलों को फिर से खोलना सही दिशा में एक कदम है। सिसोदिया ने यह पत्र तब लिखा है जब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय स्कूलों और विश्वविद्यालयों को फिर से खोलने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है। कोरोनावायरस (coronavirus) के प्रसार को रोकने के लिए लॉकडाउन लागू किए जाने के बाद से शैक्षणिक संस्थानों को बंद कर दिया गया है।

अपने पत्र में सिसोदिया ने कहा, सबसे पहले हमें हर बच्चे को, चाहे वह किसी भी उम्र और सामाजिक वर्ग का हो, उसे आश्वस्त करने की जरूरत है कि वे हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं और उन सभी को अपने संबंधित स्कूलों के भौतिक और बौद्धिक स्थान पर समान अधिकार है। हमें इस बात पर विराम लगा देना चाहिए कि ऑनलाइन पढ़ाने या छोटे बच्चों के मुकाबले बड़े बच्चे स्कूल पहले आ रहे हैं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षण केवल स्कूल में शिक्षण को पूरक कर सकता है, उसकी जगह नहीं ले सकता।

उन्होंने कहा, चूंकि हमें अब कोरोना के साथ रहना सीखना होगाए इसलिए बेहतर होगा कि पहले से मौजूद शिक्षण स्थानए जो स्कूल हैए उस भूमिका को अपनाएं। लेकिन ऐसा करने से पहलेए माता.पिता को विश्वास में लेने की जरूरत है और उन्हें तथ्यों के साथ जोखिम कारक के बारे में समझाया जाना चाहिए। इस संबंध में, सिसोदिया ने इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (Indian Council of Medical Research) (ICMR) के अध्ययन का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि हमले की दर (प्रति 1 लाख जनसंख्या प्रभावित लोग) 0-9 वर्ष के आयु वर्ग में सबसे कम है।

उन्होंने कहा, सभी ग्रेड और विषयों में सिलेबस को कम से कम 30 प्रतिशत तक कम किया जाना चाहिए। इसे फैलाने के बजाय सीखने और समझने में गहराई होनी चाहिए। इसे परीक्षा सुधारों के साथ मिलाएं। सीबीएसई को कक्षा 10 और 12 की एक बार की उच्च-स्तरीय परीक्षा से हटकर निरंतर मूल्यांकन के एक मॉडल अपनाना चाहिए ताकि छात्र-छात्राएं जब चाहें ऑनलाइन परीक्षा दे सकें। सिसोदिया ने शिक्षकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण की वकालत करते हुए कहा कि हम शिक्षा और परीक्षा में बुनियादी बदलाव की उम्मीद नहीं कर सकते, जब तक कि हमारे शिक्षक इसके लिए तैयार नहीं हो जाते। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें दुनिया भर में नवीन प्रथाओं के बारे में गहराई से जानकारी होनी चाहिए।

उन्होंने अनुसंधान पर भी जोर दिया ताकि शिक्षण और सीखने की नई तकनीकों को स्कूल स्तर पर समझा और लागू किया जा सके और साथ ही सिंगापुर के शिक्षक प्रशिक्षण मॉडल की वकालत की। उन्होंने और सलाह दी कि परीक्षा सुधारों के लिए International Baccalaureate बोर्ड के दृष्टिकोण का उल्लेख किया जाए।

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