विदेशी छात्र भारत के किस कॉलेज में दाखिला लें, बताएगा 'मेरे एग्जाम्स' स्टार्टअप

विदेशी छात्र भारत के किस कॉलेज में दाखिला लें, बताएगा 'मेरे एग्जाम्स' स्टार्टअप

Kamal Singh Rajpoot | Publish: Apr, 27 2018 03:06:59 PM (IST) शिक्षा

मेरे एग्जाम्स' के पास 47,000 से ज्यादा कॉलेजों, 300 से ज्यादा परीक्षाओं, 200 से ज्यादा करियर और 201 डिग्रियों के आंकड़े हैं

अब भारत में विदेशी छात्रों की मुश्किलें आसान हो गई हैं। एजुटेक स्टार्टअप 'मेरे एग्जाम्स' छात्रों की दिलचस्पी और पसंद के अनुसार कोर्स, स्ट्रीम और फैकल्टी, किसी विश्वविद्यालय और कॉलेज में दाखिले की अंतिम तारीख, किसी खास पाठ्यक्रम के शुल्क की जानकारी देकर विदेशी छात्रों की मदद करता है।

'मेरे एग्जाम्स' के पास 47,000 से ज्यादा काॅलेजों का डाटा
'मेरे एग्जाम्स' के पास 47,000 से ज्यादा कॉलेजों, 300 से ज्यादा परीक्षाओं, 200 से ज्यादा करियर और 201 डिग्रियों के आंकड़े हैं। नेपाल और अफ्रीका से आने वाले विदेशी छात्रों को शिक्षा संबंधी मदद और समर्थन मुहैया कराने के लिए एजुटेक स्टार्टअप 'मेरे एग्जाम्स' ने 'नैपलीज स्टूडेंट्स हेल्पिंग हैंड्स' (एनएसएचएच) और भारत में 'अफ्रीकन स्टूडेंट्स असोसिएशन' से साझेदारी की है। इससे नेपाल और अफ्रीका के 30 हजार छात्रों को लाभ होगा।

विदेशी छात्रों की मदद करता है 'मेरे एग्जाम्स' स्टार्टअप
'मेरे एग्जाम्स' की नैपलीज स्टूडेंट्स हेल्पिंग हैंड्स (एनएसएचएच) और भारत में अफ्रीकन स्टूडेंट्स असोसिएशन से साझेदारी के तहत भारत आने वाले विदेशी छात्रों को शिक्षा और करियर के क्षेत्र में उचित मार्गदर्शन दिया जाएगा। 'मेरे एग्जाम्स' की टीम विदेशी छात्रों की वेबिनार और वेबसाइट पर ऑनलाइन तो छात्रों की मदद करती ही है। इसके साथ ही वह उन्हें फोन पर शिक्षा संबंधी हर जानकारी मुहैया कराती है और उनके हर सवाल का जवाब देती है।

'मेरे एग्जाम्स' के सहसंस्थापक करण सचदेवा का बयान
'मेरे एग्जाम्स' के सहसंस्थापक करण सचदेवा ने कहा, "एनएसएचएच और अफ्रीकन स्टूडेंट्स असोसिएशन से हमारी साझेदारी का मकसद इन छात्रों को उचित मार्गदर्शन प्रदान करना है। इन संगठनों की मदद से हम नई जगह पर विदेशी छात्रों को पेश आने वाली सभी तरह की मुश्किलों का समाधान कर सकते हैं। इससे पहले नेपाल में एक कार्यशाला के दौरान हमें छात्रों की सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। हमने उस दर्द को देखा और महसूस किया कि किस तकलीफ से अभिभावक अपने बेटे या बेटियों को पढ़ने भारत भेजते हैं। हमारा लक्ष्य भारत को अगला एजुकेशन हब बनाना है।"

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