देश के शैक्षणिक पाठक्रम में शामिल हो 'एमएएनआरएस' : इंटरनेट सोसायटी

एमएएनआरएस एक वैश्विक पहल है जिसके तहत इंटरनेट राउटिंग सिस्टम के अति सामान्य खतरे को भी दूर करने के लिए आवश्यक उपाय किए जाते हैं।

By: विकास गुप्ता

Published: 03 Sep 2018, 05:55 PM IST

नई दिल्ली। इंटरनेट सोसायटी का कहना है कि मुचुअली एग्रीड नॉम्र्स फॉर राउटिंग सिक्योरिटी (एमएएनआरएस) यानी इंटरनेट के सुरक्षा मार्ग को लेकर दुनियाभर में स्वीकृत मानदंड को देश के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए।

भारत में इंटरनेट की सुरक्षा व संरक्षा सुनिश्चित करने को लेकर अमेरिकी लाभ-निरपेक्ष संस्था इंटरनेट सोसायटी और इंटरनेट प्रोवाइडर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसपीएआई) ने सोमवार को एक ज्ञापन समझौता (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जिसके तहत इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर के आवश्यक रॉउटर्स की सुरक्षा की पड़ताल की जाएगी। इस साझेदारी से एमएएनआरएस को प्रोत्साहन दिया जाएगा। एमएएनआरएस एक वैश्विक पहल है जिसके तहत इंटरनेट राउटिंग सिस्टम के अति सामान्य खतरे को भी दूर करने के लिए आवश्यक उपाय किए जाते हैं। इस प्रकार इसके जरिए कारोबारियों और सरकार को साइबर हमले के खतरों से सुरक्षा मिलती है।

इंटरनेट सोसायटी के एशिया प्रशांत क्षेत्र के रीजनल ब्यूरो डायरेक्टर रजनीश सिंह ने से बातचीत में कहा, एमएएनआरएस) ''इंटरनेट के सुरक्षा मार्ग को लेकर दुनियाभर में स्वीकृत मानदंड को देश के शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए। इससे युवावग के कार्यबल में शामिल होने पर उनको मालूम होगा कि उन्हें क्या करना है और किससे इंटरनेट को होने वाला खतरा दूर होगा। कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी-इनडिया) के अनुसार, भारत में 2014 में 44,659 साइबर सुरक्षा के मामले सामने आए जबकि 2015 और 2016 में क्रमश: 49,455 और 50,362 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में , फिशिंग (फर्जी वेबसाइट या ईमेल के जरिए लोगों को फंसा कर धोखाधड़ी करना), वेबसाइट में घुसपैठ कर उसे नुकसान पहुंचाना, वाइरस व अन्य प्रकार के हमले करना शामिल हैं।

आईएसपीएआई के प्रेसिडेंट राजेश छारिया ने से बातचीत में कहा कि एमएएनआरएस न सिर्फ इंटरनेट सिक्योरिटी सेवा प्रदाता तक सीमित होगा बल्कि इसका फायदा युवा, बुजुर्ग औरखासतौर से ग्रामीण इलाके के लोग उठा पाएंगे। छारिया ने कहा कि भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की तादाद बहुत तेजी से बढ़ रही है और अनुमान है कि यह आंकड़ा 2021 तक दोगुना हो जाएगा। हालांकि, साइबर सुरक्षा व डाटा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं और हाल के दिनों में मालवेयर की घटनाओं से दुनिया भर में बहुतों पर असर पड़ा है।

विकास गुप्ता
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