NCPCR : जेजे एक्ट के तहत फीस के नाम पर बच्चों को परेशान नहीं कर सकते स्कूल

NCPCR : जेजे एक्ट के तहत फीस के नाम पर बच्चों को परेशान नहीं कर सकते स्कूल

Deovrat Singh | Publish: Feb, 15 2018 09:49:04 AM (IST) शिक्षा

NCPCR Guidelines : निजी विद्यालयों की मनमानी के चलते कई गरीब तबके या मध्यम वर्ग के बच्चे स्कूल से निकाल दिए जाते हैं और बीच सत्र उनके पास ...

NCPCR Guidelines : निजी विद्यालयों की मनमानी के चलते कई गरीब तबके या मध्यम वर्ग के बच्चे स्कूल से निकाल दिए जाते हैं और बीच सत्र उनके पास दूसरे विद्यालय में प्रवेश का भी मौका नहीं रहता। अभिभावक द्वारा फीस जमा नहीं करवा पाने के कई कारण हो सकते हैं। परिवार में अचानक कोई विपरीत परिस्थिति आने से अभिभावक बच्चों की फीस जमा नहीं करवा पाते। ऐसे में विद्यालय द्वारा बच्चे को परेशान किया जाता है। बहुत से बच्चे ऐसे भी है जिनकी फीस नहीं चुका पाने की स्थिति में विद्यालय और पढाई छूट गई।

 

अब किसी भी स्कूल में फीस की लेकर शिक्षक और प्रबंधन बच्चों से कोई सवाल-जवाब नहीं कर सकेंगे। नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (एनसीपीसीआर) ने इसमें निर्देश जारी किए हैं। वक्त पर फीस जमा न होने पर बच्चों को परेशान करने की शिकायतें आती रही हैं। तेलंगाना में एक बच्चे ने खुदकुशी भी कर ली थी। कमीशन ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने को कहा है कि निजी स्कूल बच्चों का उत्पीडऩ न करे। स्कूल अभिभावकों से बात करें। वहीं कमीशन ने निजी स्कूलों में फीस को लेकर हो रहे बच्चों के उत्पीडऩ की स्टडी रिपोर्ट भी तैयार कराई जा रही है।

'ऐसा करना J J Act का उल्लघंन'
NCPCR के सदस्य प्रियंक कानूनगो के अनुसार स्टडी रिपोर्ट आने के बाद इस संबंध में एक फिक्स्ड गाइडलाइन जारी की जाएगी। स्कूल प्रबंधन का बच्चों के साथ भेदभावपूर्ण बर्ताव करना गंभीर चिंता का विषय है। यह जुवैनाइल जस्टिस एक्ट के सेक्शन-75 में दिए बाल अधिकारों का उल्लंघन है और इसकी मॉनीटरिंग अथॉरिटी एनसीपीसीआर है। इसलिए इसमें दखल जरूरी है।

 

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महाराष्ट्र के स्कूलों में छात्रों को अब महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर और जवाहर लाल नेहरू से ज्यादा पीएम नरेंद्र मोदी के जीवन प्रसंग पढ़ाए जाएंगे। इनसे संबंधित पुस्तकें इस माह के तक स्कूलों में पहुंच जाएंगी। शिक्षा विभाग के अधिकारी ने बताया कि पीएम से जुड़ी 1,49,954 जबकि अंबेडकर पर 79,388, गांधी पर 4343 और नेहरू पर 1635 पुस्तकें खरीदी जा रही हैं। वहीं पूर्व पीएम अटल बिहारी पर भी 76,713, शिवाजी महाराज पर 3,40,982 पुस्तकेें हैं।

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