NEET 2019: काउंसलिंग में जरूर रखें इन बातों का ध्यान, विदेशों में भी ले सकते हैं एडमिशन

NEET 2019: काउंसलिंग में जरूर रखें इन बातों का ध्यान, विदेशों में भी ले सकते हैं एडमिशन

Sunil Sharma | Publish: Jun, 17 2019 12:55:24 PM (IST) शिक्षा

यह प्रक्रिया ऑल इंडिया और स्टेट दो स्तर पर आयोजित होती है।

हाल ही नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) परीक्षा २०१९ का परिणाम घोषित हुआ है। सीकर के नलिन खंडेलवाल ने इस परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। कई छात्रों ने भी इसमें अच्छे अंक प्राप्त किए जो कि अब अगले पड़ाव काउंसलिंग का हिस्सा बनेंगे। इसमें मेरिट कम च्वॉइस के आधार पर स्टूडेंट को काउंसलिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज आवंटित किए जाएंगे। जहां वे एमबीबीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस और बीडीएस प्रोग्राम का हिस्सा बन सकते हैं।

काउंसलिंग प्रक्रिया
यह प्रक्रिया ऑल इंडिया और स्टेट दो स्तर पर आयोजित होती है। कुल सीटों में 15 प्रतिशत सीटें ऑल इंडिया स्तर और 85 प्रतिशत स्टेट लेवल की होती हैं। ऑल इंडिया स्तर पर सीटों का आवंटन भारत सरकार कराती है। इनमें से बची सीटों को स्टेट लेवल के लिए सुरक्षित किया जाता है जिसे 85 प्रतिशत में जोड़ दिया जाता है। जहां राष्ट्रीय स्तर की काउंसलिंग 12 जून से वहीं स्टेट लेवल पर 25 जून से शुरू होगी। इन दोनों राउंड में हुई काउंसलिंग के बाद आखिरी चरण मोपअप है। इसमें बची हुई सीटों को पहले व दूसरे राउंड के बच्चों को देते हैं।

भरी गई च्वॉइस को प्राथमिकता
परीक्षा पास करने के बाद काउंसलिंग के लिए जब स्टूडेंट रजिस्ट्रेशन करते हैं तभी उनसे उनकी मेरिट और च्वॉइस के बारे में पूछा जाता है। ऐसे में काउंसलिंग के दौरान भरी गई च्वॉइस में से ही स्टूडेंट को सीट आवंटित की जाती है। इसके अलावा ऑल इंडिया स्तर पर यदि किसी स्टूडेंट को कॉलेज पसंद न आए या फिर वह संबंधित राज्य के मेडिकल कॉलेज में प्रवेश चाहता है तो भी वह आवंटित कॉलेज में एप्लीकेशन लगाकर प्रवेश पा सकता है। बशर्ते वह इसके लिए योग्य हो। उस राज्य में भी काउंसलिंग का हिस्सा बन यदि वहां सीट सुरक्षित होगी तो ही प्रवेश का मौका मिल सकता है।

इस तरह करें तैयारी
परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सबसे पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन सही तरीके से करें। वेबसाइट नहीं पता हो तो मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट पर जाकर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इसके बाद काउंसलिंग होने के बाद स्टूडेंट आवंटित कॉलेज को ज्वॉइन कर सकता है। ऐसे में यदि स्टूडेंट को कॉलेज सही न लगे तो वह दूसरी काउंसलिंग का हिस्सा बन मेरिट के आधार पर कॉलेज को बदल सकता है।

शुल्क और दस्तावेज
स्टूडेंट ऑनलाइन माध्यम से रजिस्ट्रेशन शुल्क जमा करा सकते हैं। वहीं कॉलेज फीस टोकन मनी के रूप में ली जाती है।

एक साल के लिए मान्य
देशभर के किसी भी मेडिकल कॉलेज में यदि स्टूडेंट प्रवेश चाहता है तो उसके लिए नीट का परिणाम एक साल के लिए वेलिड है। लेकिन 2019 से लागू हुए नए नियम में आया है कि जो स्टूडेंट काउंसलिंग कर फॉरेन मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेना चाहता हैं तो उनके पास नीट पास करना तीन वर्ष के लिए वेलिड हो जाएगा।

फॉरेन एजुकेशन के लिए योग्य
नीट क्वालिफाई करने के बाद सर्टिफिकेट लेकर वे जिस भी फॉरेन मेडिकल कॉलेज में प्रवेश चाहते हैं वे ले सकते हैं। बशर्ते उन्हें उस कॉलेज की प्रवेश परीक्षा को अपनाना होगा। विभिन्न देशों में कई बार भाषा को लेकर भी प्रवेश के दौरान टेस्ट आयोजित कराते हैं।

सीट छोडऩे पर देना पड़ता है हर्जाना
कई बार स्टूडेंट काउंसलिंग के बाद एडमिशन ले लेते हैं और किसी अन्य राज्य में एडमिशन के लिए चले जाते हैं। इस कारण आवंटित सीट खराब हो जाती है। ऐसे में काउंसलिंग के बाद सीट छोडऩे पर अभ्यर्थी को 5 लाख रूपए का बॉण्ड देना पड़ता है।

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