केरल में खुले स्कूल, एनजीओ ने स्टूडेंट्स को दीं हैंडरिटन नोटबुक्स

केरल में खुले स्कूल, एनजीओ ने स्टूडेंट्स को दीं हैंडरिटन नोटबुक्स

Amanpreet Kaur | Publish: Aug, 29 2018 12:26:12 PM (IST) शिक्षा

केरल में आई बाढ़ ने जहां एक तरफ सब कुछ तहस नहस कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ केरल में बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिए लाखों हाथ आगे आए हैं।

केरल में आई बाढ़ ने जहां एक तरफ सब कुछ तहस नहस कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ केरल में बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिए लाखों हाथ आगे आए हैं। कुछ ने अपनी कमाई में से हिस्सा उनके लिए दिया है, तो कुछ ने उनके लिए खाने पीने की व्यवस्था की। इसी बीच कोझिकोडि के एक एनजीओ ने स्टूडेंट्स को हैंडरिटन नोटबुक्स मुहैया करवाने का फैसला किया है। बुधवार से केरल में स्कूल खुले हैं, ऐसे में जिन भी स्टूडेंट्स ने राज्य में आई बाढ़ में अपनी किताबें और नोटबुक्स खो दी हैं, उन्हें यह एनजीओ हैंडरिटन नोटबुक मुहैयार करवाएगा। एनजीओ के इस काम में उनकी मदद बुजुर्गों, प्रोफेशनल्स और स्टूडेंट्स ने की।

इनक्यूबेशन नामक इस एनजीओ के हैड नबील मोहम्मद एआर ने बताया कि हम बुधवार से ही किताबें बांटने का काम शुरू करेंगे। साउथ रीजन के स्टूडेंट्स के लिए एर्नाकुलम में किताबें बांटी जाएंगी, जबकि नॉर्थ रीजन के स्टूडेंट्स के लिए कोझिकोडि में बुक्स मुहैया करवाई जाएंगी। एनजीओ की देखरेख में लिखी गई इन नोटबुक्स को कक्षा ५वीं से १०वीं के स्टूडेंट्स को दिया जाएगा। एनजीओ से जुड़े सैयद समीर ने बताया कि हम स्टूडेंट्स को नोट्स की पीडीएफ भी मुहैया करवा सकते थे, लेकिन अपर प्राइमरी और सीनियर सेकंडरी में पढऩे वाले स्टूडेंट्स को पीडीएफ से पढऩे की आदत नहीं होती, ऐसे में उनके लिए समस्या हो सकती थी। इससे भी अहम बात यह है कि स्टूडेंट्स ेन अपनी नोटबुक्स खोई हैं और उनका मनोबल बढ़ाने के लिए उन्हें वही लौटाना जरूरी था, जो उन्होंने खोया है।

एनजीओ को यह आइडिया अनसर विमंस ऑरफेनेज के बच्चों से आया। पिछले तीन साल से यह एनजीओ यहां के स्टूडेंट्स को कोचिंग देता आ रहा है। जब वॉलंटीयर्स इस अनाथालय में पहुंचे तो कुछ लड़कियों ने उन्हें सलाह दी कि वे अलग अलग सब्जेक्ट के नोट्स बाढ़ पीडि़त स्टूडेंट्स के लिए तैयार कर सकते हैं, उनकी तरफ से यही बाढ़ पीडि़त स्टूडेंट्स के लिए बड़ी मदद होगी। सैयद ने बताया कि हमने स्टूडेंट्स के इस आइडिया को गंभीरता से लिया और इस कैंपेन का नाम रख दिया - टुगेदर वी कैन, ताकि हम इसे सोशल मीडिया पर प्रमोट कर ज्यादा से ज्यादा लोगों से मदद ले सकें। यह आइडिया काम कर गया और देश के कई हिस्सों से हमें हैंडरिटन नोटबुक्स प्राप्त हुईं। इनमें हैदराबाद, अलिगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी दिल्ली, जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ल, पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी और पुणे से बड़ा सहयोग मिला।

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