राजस्थान : कक्षा 6 से 12 तक के लिए शुरू होंगे कस्तूरबा विद्यालय

राजस्थान : कक्षा 6 से 12 तक के लिए शुरू होंगे कस्तूरबा विद्यालय

Jamil Ahmed Khan | Publish: Apr, 17 2018 10:20:18 AM (IST) शिक्षा

उन्होंने बताया कि प्रदेश में कक्षा 6 से 12 तक के लिए कस्तूरबा विद्यालयों की शुरूआत की जाएगी।

राजस्थान के शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा है कि शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए राज्य में समग्र शिक्षा अभियान के तहत एकीकृत शिक्षा योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश में कक्षा 6 से 12 तक के लिए कस्तूरबा विद्यालयों की शुरूआत की जाएगी। देवनानी ने बताया कि नए शिक्षा सत्र से प्री स्कूल से लेकर 12वीं कक्षा तक के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण समावेशी शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसके तहत बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने, शिक्षा में सामाजिक एवं लैंगिक असमानता को कम करने, स्कूलों को तय मापदंड के अनुरूप बनाने, स्कूलों में अधिक से अधिक व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने, शिक्षा के अधिकार अधिनियम को कड़ाई से लागू करने जैसे कार्यों पर राज्य सरकार का विशेष फोकस रहेगा।

देवनानी ने बताया कि राज्य में सर्व शिक्षा अभियान, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान और शिक्षक शिक्षण अभियान को इसके तहत एक साथ समाहित कर क्रियान्वित किया जाएगा। साथ ही राज्य में छठी से बारहवीं कक्षा के लिए कस्तूरबा विद्यालय शुरू किए जायेंगे। इस वर्ष शिक्षा का बजट 20 हजार से बढ़ा कर 34 हजार करोड़ किया जा रहा है, जिसे अगले वर्ष बढ़ा कर 41 हजार करोड़ कर दिया जाएगा।

उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार ने राज्य के एसआईईआरटी, डाइट, बीआरसी, सीआरसी को शत प्रतिशत आर्थिक सहायता देने की बात की है। इसके अलावा हर स्कूल को स्वच्छता अभियान, पुस्तकालय व खेलों के विकास के लिए 5-10 हजार रुपये आवंटित होंगे।

देवनानी ने बताया कि राज्य में बीएड पाठ्यक्रम अब दो वर्षीय एकीकृत कोर्स के रूप में क्रियान्वित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विद्यालयों में आधुनिक सूचना-संचार प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने के लिए स्कूलों की कक्षा में अब ब्लैक बोर्ड डिजिटल होंगे।

शिक्षा में स्वायत्तता के लिए बने राष्ट्रीय स्तर पर नियामक आयोग
देवनानी ने कहा है कि राष्ट्रीय स्तर पर स्वायत्तता के लिए शिक्षा में नियामक आयोग बनना चाहिए। देवनानी शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास द्वारा 'शिक्षा की स्वायत्तता-चुनौतियां एवं संभावनाएं' विषयक पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा में स्वायत्तता जरूरी है पर वह स्वच्छन्दता के रूप में नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने इस संबंध मेें व्यापक स्तर पर विचार करने की जरूरत बताते हुए कहा कि शिक्षा में स्वायत्तता अगर हो तो वह किस रूप में हो। उन्होंने स्वायत्तता के साथ कर्तव्य और दायित्व बोध पर भी चिंतन किए जाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वायत्तता से शिक्षा के शुद्धीकरण की ओर बढऩे पर ही उसकी सार्थकता है।

उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में राजस्थान में किए प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि विद्यार्थियों के व्यापक हित को दृष्टिगत रखते हुए बहुत सारे निर्णय शिक्षा स्वायत्तता के तहत लिए गए और उनके अच्छे परिणाम आ रहे हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं में स्वायत्तता की हिमायत की परन्तु साथ ही मर्यादा का निर्वहन भी सभी स्तरों किए जाने पर जोर दिया।

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