स्कूलों की किताब में हुआ बड़ा बदलाव, छोटे बच्चों पर पड़ेगा बहुत बड़ा असर

स्कूलों की किताब में हुआ बड़ा बदलाव, छोटे बच्चों पर पड़ेगा बहुत बड़ा असर

Sunil Sharma | Publish: Apr, 23 2019 04:40:27 PM (IST) शिक्षा

कई स्कूलों ने करीब 200 रुढि़वादी किताबों को पाठ्य सामग्री से हटा दिया है।

स्पेन के शहर बार्सिलोना के कई स्कूलों ने करीब 200 रुढि़वादी किताबों को पाठ्य सामग्री से हटा दिया है। इनमें लैंगिक भेदभाव को बढ़ावा देने का आरोप था। एक कमेटी ने टीएबर स्कूल के बाल पुस्तकालय की 600 किताबों की समीक्षा की, जिसका मकसद छिपी हुई लैंगिक भेदभाव वाली सामग्री को उजागर करना है। भारतीय संदर्भ में इसे ऐसे समझ सकते हैं। जैसे, छोटू स्कूल जाता है और सीता खाना बनाती है। सवाल है स्कूल छोटू ही क्यों जा सकता है सीता क्यों नहीं या खाना छोटू क्यों नहीं बनाता। ऐसी ही सामग्री को समीक्षकों ने किताबों में छिपा हुआ लैंगिकवाद माना।

कमेटी ने हर किताब के पात्रों की समीक्षा की कि वे बोलते क्या हैं और क्या उनकी भूमिकाएं हैं। इस दौरान 30 प्रतिशत किताबों में लैंगिकवाद मिला। जिन पाठों की समीक्षा हुई इनमें विख्यात बाल कहानी ‘लिटिल रेड राइडिंग हूड’ और ‘सेंट जॉर्ज’ के बारे में कहानियों के संस्करण शामिल थे।

रिश्तों से भी नाता
कमेटी के अनुसार, बच्चे जो कुछ पढ़ते हैं अगर उसमें रिश्तों और व्यवहारों को लेकर रूढि़वादिता का चित्रण होगा तो वे उसे सामान्य मानेंगे। ऐसे में उनका व्यवहार भी वैसा होगा।

कौन किसके खिलाफ
पुस्तकों की समीक्षा करने वालों में शामिल दंपती ने बताया कि समाज बदल रहा है। अब जेंडर के मुद्दे के बारे में जागरूकता ज्यादा है, लेकिन कहानियों में परिलक्षित नहीं हो रहा है। पुरुषत्व प्रतिस्पर्धा और साहस के साथ जुड़ा है। हिंसक स्थितियों में भले ही वे छोटे मजाक हों यह लडक़े को लडक़ी के खिलाफ खड़ा कर देता है। इससे संदेश जाता है कि कौन हिंसक हो सकता है और किसके खिलाफ।

लडक़ों के पात्र अधिक
बार्सिलोना में अन्य स्कूलों ने भी अपने पुस्तकालयों की सामग्री पर पुनर्विचार करने का फैसला किया है। फोर्ट पिएन्स स्कूल के माता-पिता संघ के प्रमुख एस्टेल क्लूसेला के मुताबिक, बाल किताबें लैंगिक रूढिय़ों को तोडऩे का सबसे अच्छा माध्यम हो सकती हैं। पिछले साल ऑब्जर्वर और नीलसन के एक शोध में भी पाया गया था कि दो पात्रों वाली कहानियों में मुख्य किरदार लडक़े का था।

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