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छात्र संगठनों ने निकाला विरोध मार्च

एसएफआइ के राज्य पदाधिकारी बसवराज एस. ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं को लेकर हाल ही में हुए घटनाक्रम ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करने में एनटीए NTA की अक्षमता को दर्शाया है।

बैंगलोरJul 05, 2024 / 08:15 pm

Nikhil Kumar

  • नीट, यूजीसी-नेट का मामला
बेंगलूरु. राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (नीट) के आयोजन में अनियमितताओं और यूजीसी-नेट में घोटाले की कड़ी निंदा करते हुए विभिन्न छात्र संगठनों ने गुरुवार को उत्तर कर्नाटक के विभिन्न जिलों में विरोध मार्च और प्रदर्शन किए। एनटीए (राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी) को समाप्त करने की मांग की।
अखिल भारतीय लोकतांत्रिक छात्र संगठन (एआइडीएसओ) के तत्वावधान में गुरुवार को धारवाड़ के विवेकानंद सर्किल पर प्रदर्शन करते हुए बड़ी संख्या में छात्रों ने नीट NEET को समाप्त करने और इसके स्थान पर राज्य स्तर पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की मांग की। छात्रों को संबोधित करते हुए एआइडीएसओ के राज्य सचिवालय सदस्य रविकिरण जे.पी. ने कहा कि आजादी के बाद से लगातार सरकारों ने शिक्षा का व्यवसायीकरण किया है और इसके परिणामस्वरूप मेडिकल सीटों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कोचिंग सेंटर लाभ कमा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूजीसी-नेट UGC-NET को पहले ही रद्द कर दिया गया है। एनइइटी के संबंध में भी ऐसा ही कदम उठाया जाना चाहिए था। इसके बजाय, एनटीए और केंद्र सरकार एनइइटी के दौरान हुई अनियमितताओं को मामूली बताकर लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगाने की कोशिश कर रही है। एआइडीएसओ के तत्वावधान में नीट को समाप्त करने की मांग को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
इस्तीफे की मांग

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआइ) के पदाधिकारियों ने बड़ी संख्या में छात्रों के साथ जुबली सर्किल से लेकर धारवाड़ के डिप्टी कमिश्नर कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला और नीट को खत्म करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और इसके स्थान पर राज्य स्तरीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा आयोजित करने की मांग की।
एसएफआइ के राज्य पदाधिकारी बसवराज एस. ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं को लेकर हाल ही में हुए घटनाक्रम ने राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं आयोजित करने में एनटीए NTA की अक्षमता को दर्शाया है। घोटाले को छिपाने की कोशिश की जा रही है। उच्च शिक्षा में समस्याओं के अलावा स्कूली शिक्षा से जुड़े कई मुद्दे हैं, जिन्हें भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने नजरअंदाज किया है। शिक्षकों की कमी समेत कई समस्याओं ने स्कूली शिक्षा को प्रभावित किया है और अब तक कोई सुधारात्मक उपाय नहीं किए गए हैं।

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