संस्कृत न जानने वालों को भी आयुर्वेद में दाखिला देने की सिफारिश

आयुर्वेदिक डॉक्टरी यानी BAMS के पाठ्यक्रम में सिर्फ उन्हीं लोगों को दाखिला नहीं दिया जाए जो पहले से संस्कृत में पारंगत हों।

By: सुनील शर्मा

Published: 03 Dec 2019, 02:41 PM IST

आयुर्वेदिक डॉक्टरी यानी BAMS के पाठ्यक्रम में सिर्फ उन्हीं लोगों को दाखिला नहीं दिया जाए जो पहले से संस्कृत में पारंगत हों। बल्कि बिना इसके अच्छे ज्ञान वालों को भी इसमें प्रवेश देकर उन्हें कोर्स के दौरान ही यह विषय भी पढ़ाया जा सकता है। यह सिफारिश संसद की स्थायी समिति ने की है। हालांकि केंद्र सरकार इसे तत्काल अमल में लाने को लेकर खास उत्साहित नहीं है।

ये भी पढ़ेः जॉन पॉल डेजोरियाः एक मामूली गुंडे से यूं बने अरबपति, पढ़े पूरी कहानी

ये भी पढ़ेः हायरिंग में लें पुराने एम्प्लॉइज की मदद तो आगे बढ़ेगी कंपनी

केंद्रीय आयुष मंत्रालय के एक वरिष्ठ सूत्र ने इस बारे में पूछे जाने पर कहा कि संसदीय समिति की सिफारिश पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। इन कॉलेजों पर निगरानी की मौजूदा व्यवस्था को ठीक करने के लिए प्रस्तावित बिल को पास करना ज्यादा जरूरी है। इस बिल में अलग से आयुर्वेद बोर्ड गठित किए जाने का प्रावधान है। यह बोर्ड भविष्य में इस सुझाव पर गौर कर सकता है।'

ये भी पढ़ेः झूठे बर्तन मांज जुटाए थे फीस के पैसे, फिर बदली तकदीर और बने अरबपति, जाने कहानी

ये भी पढ़ेः 5 कहानियां, जो हमेशा के लिए बदल देंगी आपकी लाइफ, बनाएंगी कामयाब

खास वर्ग के छात्रों को ही प्रवेश
समिति ने कहा है कि आयुर्वेद, सिद्धा और यूनानी चिकित्सा पद्धति में संस्कृत, तमिल और ऊर्दू के महत्त्व से इनकार नहीं किया जा सकता। बहुत से प्रतिभाशाली छात्रों को भाषाओं का पहले से ज्ञान नहीं होता। इन भाषाओं में पारंगत होने की शर्त की वजह से एक खास वर्ग के छात्र ही इन पाठ्क्रमों में दाखिला ले रहे हैं। समिति ने कहा है कि वह सख्त सिफारिश करती है कि इन पाठ्यक्रमों के संस्थान भाषाओं के लिए अलग से क्रैश कोर्स संचालित करें। समिति ने पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के मेडिकल कॉलेजों पर निगरानी के लिए बनने जा रहे आयोग में सदस्य के तौर पर सिर्फ संस्कृत के जानकारों को ही रखे जाने की बजाय तमिल और ऊर्दू के विशेषज्ञों को भी रखने की व्यवस्था करने को कहा है।

ये भी पढ़ेः दोस्तों से उधार ले खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, ऐसे हुए सफल, जाने पूरी कहानी

ये भी पढ़ेः आज ही आजमाएं ये टिप्स तो बिजनेस में होगा शानदार प्रॉफिट

ये भी पढ़ेः Soupergirl ने बचत के पैसों से खड़ा कर दिया करोड़ों का साम्राज्य, जाने कहानी

सरकार ही तय करे मेडिकल कॉलेजों की फीस
इसी तरह स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर संसद की विभाग संबंधी स्थायी समिति ने कहा है कि आयुर्वेदिक, यूनानी और सिद्धा जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के मेडिकल कॉलेजों के लिए भी फीस की सीमा सरकार को तय करनी चाहिए। समिति ने भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के राष्ट्रीय आयोग के बिल पर विचार करते हुए यह बात कही है। समिति ने इसी हफ्ते अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपी है। अब सरकार जल्दी ही भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के लिए राष्ट्रीय आयोग गठन करने का बिल संसद में पारित करवाने का प्रस्ताव करेगी। यह बिल आयुष पद्धति के सभी डॉक्टरी पाठ्यक्रमों में दाखिलों के लिए राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा का प्रावधान करता है।

Show More
सुनील शर्मा
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned