scriptChandrashekhar and Owaisi increasing the tension of political parties | UP Assembly Elections 2022 : चंद्रशेखर और ओवैसी बने टेंशन बागी भी कर रहे परेशान,गन्ना बेल्ट पर चरम पर घमासान | Patrika News

UP Assembly Elections 2022 : चंद्रशेखर और ओवैसी बने टेंशन बागी भी कर रहे परेशान,गन्ना बेल्ट पर चरम पर घमासान

UP Assembly Elections 2022 भीम आर्मी के चंद्रशेखर और ओवैसी के मैदान में आने के बाद सपा—रालोद का जाट और मुसलिम समीकरण कितना प्रभावी होगा इस पर संशय है। वहीं दूसरी ओर गठबंधन के वोटों को एक दूसरे को ट्रांसफर कराना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। किसानों को लेकर तमाम घोषणाएं करने के बावजूद गन्ना बेल्ट में गठबंधन प्रत्याशी मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का प्रयास कर रहे हैं।

मेरठ

Published: January 21, 2022 10:50:34 am

UP Assembly Elections 2022 पहले चरण में पश्चिमी यूपी में 10 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले गन्ना बेल्ट पर घमासान चरम पर हैं। कहीं मुस्लिम वोटों को अपने पक्ष में करने के लिए घमासान है तो कहीं टिकट बंटवारे के बाद पार्टी के बागियों को मनाने में समय गंवाना पड़ रहा है। समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के लिए अब गठबंधन ‘एक तरफ कुआं,दूसरी तरफ खाई’ वाली स्थिति बन गई है। भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर और एआईएमआईएम प्रमुख असदउद्दीन ओवैसी सपा-रालोद गठबंधन की टेंशन बन गए हैं। इतना ही नहीं, टिकट कटने से नाराज बागी भी समीकरण खराब कर रहे हैं।
UP Assembly Elections 2022 : चंद्रशेखर और ओवैसी बने टेंशन बागी भी कर रहे परेशान,गन्ना बेल्ट पर चरम पर घमासान
UP Assembly Elections 2022 : चंद्रशेखर और ओवैसी बने टेंशन बागी भी कर रहे परेशान,गन्ना बेल्ट पर चरम पर घमासान

पश्चिमी यूपी में पहले चरण में 58 सीटों पर मतदान होना है। ऐसे में सभी दल एकदूसरे को शह मात देने की रणनीति बनाने में लगे हैं, लेकिन इस गन्ना बेल्ट में सपा और रालोद गठबंधन किसानों को लेकर तमाम घोषणाएं करने के बावजूद मतदाताओं की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर पा रहे हैं। टिकट वितरण में क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरण गड़बड़ाने की वजह से दावेदारों और मतदाताओं दोनों में नाराजगी सामने आ रही है। इसी वजह से रालोद मुखिया जयंत चौधरी को यह कहना पड़ गया कि जो विरोध करेगा, उसके लिए रालोद के दरवाजे हमेशा के लिए बंद हो जाएंगे।
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एआईएमआईएम प्रमुख ने पिछले पांच-छह महीने में करीब 60 सभाएं कर मुसलिमों को जागृत करने का काम किया है और उन्होंने मुसलिम लीडरशिप डेवलप करने की बात कही है। इसका सबसे ज्यादा असर पश्चिमी यूपी की कई सीटों पर देखने को मिल रहा है। ओवैसी के 16 सीटों पर मुसलिम प्रत्याशी उतारने का असर कई सीटों पर गठबंधन के प्रत्याशियों में देखने को मिल रहा है। एक सीट पर सपा के एक प्रबल दावेदार मनमोहन झा गामा को भी साहिबाबाद से टिकट दिया गया है। इसका असर भी सीधा तौर पर दिख रहा है। इस बारे में मेरठ यूनिवर्सिटी के राजनीति विज्ञान के प्रो. डॉ. राजेंद्र पांडेय का कहना है कि पश्चिमी यूपी में रालोद के बेस वोट जाट और मुसलिम में सेंधमारी हो चुकी है। जाट वोट भाजपा को, तो मुसलिम वोट ओवैसी को भी जाने की संभावना है।
मतदाताओं में भी गठबंधन के प्रत्याशियों को लेकर कई सीटों पर नाराजगी
चुनाव में रालोद का बेस वोट कहे जाने वाला मुसलिम और जाट समीकरण प्रभावी नहीं हो पा रहा है। एआईएमआईएम के कई सीटों पर मुसलिम प्रत्याशी उतारने से रालोद के बेस वोट बैंक को तगड़ा झटका लगा है। मतदाताओं में भी गठबंधन के प्रत्याशियों को लेकर कई सीटों पर नाराजगी है। ऐसे में दोनों दलों को एकदूसरे का वोट ट्रांसफर होता भी कम दिख रहा है।
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भीम आर्मी, बसपा और कांग्रेस की मतदाताओं में सेंधमारी
भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर का गठबंधन किसी दल से नहीं हो पाए। चंद्रशेखर ने सपा पर दलितों की उपेक्षा का आरोप लगाया है और 33 सीटों पर अपने उम्मीदवार भी उतारे हैं। इसका असर गठबंधन की कई सीटों पर देखा जा सकता है। इसके अलावा बसपा और कांग्रेस के प्रत्याशी भी मतदाताओं के बीच सेंधमारी करने की तैयारी में है।

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