scriptCongress eyes women power in Uttar Pradesh | UP Assembly Elections 2022 : कांग्रेस ने इसलिए बदली रणनीति, जाति-धर्म को छोड़ महिलाओं पर फोकस कर रही प्रियंका गांधी | Patrika News

UP Assembly Elections 2022 : कांग्रेस ने इसलिए बदली रणनीति, जाति-धर्म को छोड़ महिलाओं पर फोकस कर रही प्रियंका गांधी

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों में करीब 4 करोड़ महिलाओं ने वोट दिया था। ये संख्या पुरुषों के मुकाबले 4 प्रतिशत अधिक थी। पुरुषों के 59% के मुकाबले 63 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था। महिला मतदाताओं के महत्व को समझते हुए ही इस बार कांग्रेस ने अपना फोकस जातिगत रणनीति की बजाय महिलाओं पर रखा है।

नई दिल्ली

Updated: November 18, 2021 02:29:00 pm

महिलाओं के साथ टाउन हॉल आयोजित करने से लेकर पदयात्रा निकालने और महिला मतदाताओं को फ्री उपहार देने तक, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी उत्तर प्रदेश की महिलाओं को कांग्रेस के पक्ष में करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। अब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को चित्रकूट में महिलाओं के बीच "लड़की हूं, लड़ सकती हूं" संवाद के कार्यक्रम में हिस्सा लिया और बड़ी घोषणा की। उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों के लिए 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देने की घोषणा के साथ ही पार्टी के अगले 100 दिनों के एक्शन प्लान का भी उल्लेख किया।
Priyanka Gandhi UP Elections
क्या है 100 दिनों की योजना ?

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने अपनी स्थिति को मजबूत करने हेतु 100 दिन का एक्शन प्लान तैयार किया है, जिसके तहत पार्टी उत्तर प्रदेश की 7 करोड़ महिला मतदाताओं तक पार्टी पहुँच बनाएगी। यूपी की 7 करोड़ महिलाओं तक पहुंचने के लिए 8000 महिला स्वयं सेवकों को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वो प्रतिदिन कम से कम 50 महिलाओं से संपर्क करें। ये 8000 महिलायें कांग्रेस की महिलाओं से जुड़ी नीतियों को प्रदेश की हर महिला तक पहुंचाएंगी और उन्हें कांग्रेस को वोट डालने के लिए प्रेरित करेंगी।
इससे पहले कांग्रेस ने बताया था कि कैसे पार्टी महिलाओं के लिए अलग से घोषणापत्र तैयार करवा रही है, जिसमें कॉलेज जाने वाली युवतियों के लिए मोबाइल-स्कूटी, गृहणियों को साल में तीन मुफ्त सिलिंडर, सरकारी बसों में महिलाओं के लिए निशुल्क यात्रा, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रतिमाह 10,000 रूपए का मानदेय देना, नए सरकारी पदों पर 40% महिलाओं की नियुक्ति, वृद्धा-विधवा पेंशन प्रतिमाह 1000 रुपए देने जैसे वादे शामिल होंगे।
कांग्रेस का फोकस महिला वॉटर्स पर क्यों?

गौर करें तो प्रदेश में सभी पार्टियों का अपना जन आधार है, परंतु कांग्रेस के पास किसी भी जाति का कोई मजबूत आधार नहीं है। दशकों से पार्टी प्रदेश में अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। यही कारण है कि महिलाओं के बीच प्रियंका गांधी वाड्रा की छवि को भुनाने के लिए चुनावी खाका तैयार किया गया है। यदि महिला वोटर्स ने कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने का विकल्प चुना तो प्रदेश में नतीजों पर बहुत बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है और इससे प्रियंका गांधी की छवि भी मजबूत होगी।
uttar_pradesh_women_voters.jpgचुनाव आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 14.61 करोड़ (14,61,34,603) हैं, जिसमें पुरुष मतदाता 7.90 करोड़ (7,90,70,809) हैं, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 6.70 करोड़ है। अर्थात, महिला मतदाताओं की जनसंख्या यूपी में लगभग 7 करोड़। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनावों में करीब 4 करोड़ महिलाओं ने वोट दिया था और ये संख्या पुरुषों के मुकाबले 4 प्रतिशत अधिक था। पुरुषों के 59% के मुकाबले 63 फीसदी महिलाओं ने वोट किया था। यदि ये नंबर कांग्रेस अपने पक्ष में करने में सफल होती है तो प्रदेश में सत्ता के लिए कांग्रेस की मेहनत रंग लाते दिखेगी।
महिला विधायकों का महत्व

महिलाओं को टिकट देने के मामलें में भाजपा सबसे आगे रही है और शायद यही कारण है कि चुनावों में जीतने वाली महिला विधायकों की संख्या में कांग्रेस का नंबर अच्छा नहीं है। महिला विधायकों की बात करें तो इस मामले में भाजपा सबसे आगे है। 2017 के विधानसभा चुनावों में 41 महिलाएं विधायक बनीं थीं, जिसमें से 35 महिला विधायक बीजेपी की थीं, जबकि कांग्रेस की केवल दो महिला विधायक बनी थीं।
up_assembly_election_women_mla.jpgतब विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कुल 46 महिलाओं को टिकट दिया था जबकि दूसरे नंबर पर समाजवादी पार्टी ने 34 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया, वहीं कॉंग्रेस ने केवल 12 महिला उम्मीदवारों को टिकट दिया। 2019 के लोकसभा चुनावों में भी 80 में से कुल 11 महिलाएं जीत दर्ज करके सांसद बनीं थीं और यहाँ भी भाजपा से जीतने वाली महिला सांसदों की संख्या 8 थी। जिला पंचायत में जीत दर्ज करने के मामले में भी महिलाओं की भूमिका बड़ी है। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में से 42 जिलों में जिला पंचायत अध्यक्ष महिलाएं चुनी हैं। महिला मतदाताओं के महत्व को समझते हुए ही इस बार कांग्रेस ने अपना फोकस जातिगत रणनीति पर कम रखा है। 40 प्रतिशत टिकट महिलाओं को देना भी कांग्रेस की इसी रणनीति का हिस्सा है।
ये महिला मतदाताओं का ही समर्थन था कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी भाजपा के साथ मुकाबले में आगे निकल गईं और यूपी में अगर प्रियंका गांधी वाड्रा को महिलाओं का समर्थन मिलता है तो कांग्रेस के लिए सत्ता की दहलीज तक पहुंचना आसान हो जाएगा। कम से कम पार्टी के नंबर में सुधार तो देखने को मिलेगा ही।

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