scripteyes on domineering leaders of seven districts of Purvanchal In seventh phase of UP Assembly Elections 2022 | UP Assembly Elections 2022: पूर्वांचल के इन सात जिलों के दबंग नेताओ पर टिकी नजर | Patrika News

UP Assembly Elections 2022: पूर्वांचल के इन सात जिलों के दबंग नेताओ पर टिकी नजर

UP Assembly Elections 2022 : पूर्वांचल की सात विधानसभा सीटों पर सबकी नजर है। इसमें कुछ ऐेसे प्रत्याशी हैं जो जेल से चुनाव लड़ रहे हैं तो जेल में बंद बाहुबलि हैं जिन्होंने अपने बच्चों को मैदान में उतारा है। देखना रोचक होगा कि हर हाल में अजेय रहने वाले इन दिग्गजों का इस चुनाव में क्या होता है।

वाराणसी

Updated: March 07, 2022 06:29:48 am

UP Assembly Elections 2022: अब पूर्वांचल ही नहीं बल्कि समूची यूपी के लोगों की निगाह टिकी है पूर्वांचल के सात जिलों के उन बाहुबली और दबंग नेताओं पर जिनकी तूती पिछले कई विधानसभा चुनाव से बोल रही है। वो क्षेत्र में खुद उतरें या नहीं उतरें पर उनका प्रभाव वैसे ही काम करता है। इसमें से कुछ तो इस बार भी जेल से ही चुनाव लड़ रहे हैं तो ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत बेटो को या तो सौंप दी है या बेटे ने खुद हासिल कर ली है। तो जानते हैं वो कौन हैं...
यूपी विधानसभा चुनाव 2022
यूपी विधानसभा चुनाव 2022
बता दें कि सातवें व अंतिम चरण में सोमवार को पूर्वांचल की तीन कमिश्नरी के नौ जिलों की 54 सीटों पर मतदान होना है। इस सातवें चरण में सात जिलो की सात सीटों पर सात दबंग नेताओं का भाग्य कल मतदाता ईवीएम में कैद कर देंगे। इन सात नेताओं में वो हैं जिनके लिए कोई पार्टी मायने नहीं रखती है। इनका प्रभाव ही जीत-हार तय करता है। इसमें ऐसे भी बाहुबली हैं जिनका इन पांच सालों में बहुत कुछ लुट चुका है। दरअसल योगी आदित्यनाथ सरकार ने इन दबंगों की अच्छी खबर ली है। ऐसे में अब ये देखना ज्यादा रोचक है कि मतदाताओं के दिल-ओ-दिमाग में इनकी क्या छवि है।
मुख्तार के बेटे अब्बास अंसारी

तो बात करते हैं मऊ के बाहुबली मुख्तार अंसारी की जो बांदा जेल में बंद हैं। वो अब तक के अजेय विधायक हैं। लेकिन इस बार उन्होंने अपनी राजनीतिक विरासत अपने बेटे अब्बास अंसारी को सौंप दी है। ऐसे में अब्बास मऊ सदर सीट से पिता की विरासत संभालने उतरे हैं। वो सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वैसे अब्बास पिछली बार मऊ की घोसी सीट से मैदान में थे पर तब जीत नसीब नहीं हुई थी।
सिबगतुल्लाह अंसारी के बेटे मन्नू अंसारी

इसी अंसारी परिवार के प्रमुख सदस्य और मुख्तार के बड़े भाई सिबगतुल्लाह अंसारी के बेटे मन्नू अंसारी भी मैदान में हैं। वो पिता की जगह खुद समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं। यहां दिलचस्प मामला ये है कि समाजवादी पार्टी ने पहले सिबगतुल्लाह अंसारी को टिकट दिया था। लेकिन बाद में पार्टी ने फैसला बदल दिया और टिकट मन्नू अंसारी को दे दिया। वैसे मन्नू को पूरे अंसारी परिवार का समर्थन हासिल है।
बृजेश के भतीजे सुशील सिंह
उधर वाराणसी केंद्रीय कारागार में बंद बाहुबली एमएलसी बृजेश सिंह के भतीजे सुशील सिंह चंदौली की सैयदराजा सीट से मैदान में हैं। वो तीन बार विधायक बन चुके है ये चौथा अवसर है। वो सुशील ही हैं जिन्होंने अपने चाचा की हार का हिसाब चुक्ता किया था। फिर उन्हें एमएलसी बनाने में भी बड़ी भूमिका निभाई।
अजेय विधायक बाहुबली विजय मिश्र
कभी बनारस जिले का अंग रहे भदोही जिले के ज्ञानपुर से बाहुबली विजय मिश्र मैदान में हैं। वो आगरा जेल से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका प्रचार पत्नी रामलली और बेटियां संचालित कर रही हैं। विजय पिछली बार निषाद पार्ट से चुनाव लड़े थे और विजयी हुए थे पर अबकी निषाद पार्ट ने टिकट नहीं दिया तो प्रगतिशील मानव समाज पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं।
जौनपुर के मल्हनी से धनंजय सिंह
सबसे चर्चित सीट जौनपुर की मल्हनी विधानसभा सीट बन गई है। कारण यहां से बाहुबली धनंजय सिंह चुनाव मैदान में हैं। धनंजय सिंह की उम्मीदवारी को लेकर विपक्ष ने खासा शोर मचाया है। दरअसल उन पर हत्या और हत्या की साजिश जैसे संगीन मामले हैं। वो इस बार जद यू के टिकट पर मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं।
गाजीपुर सदर से राजकुमार सिंह
गाजीपुर सदर से इस बार बीएसपी ने राजकुमार सिंह गौतम को मैदान में उतारा है। राजकुमार पर संगीन धाराओं में 11 मुकदमें दर्ज हैं। गौतम सातवें चरण के ऐसे उम्मीदवार है जो मुकदमो के मामले में यूपी के टॉप 5 में शामिल हैं। लिहाजा अब लोगों की निगाह उन पर भी लगी है।
आजमगढ़ से रमाकांत यादव
उधर आजमगढ़ की फूलपुर पवई सीट से पूर्व सांसद रमाकांत यादव समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं। रमाकांत की छवि भी दबंग नेता की है। सपा को उनसे काफी उम्मीदें है। देखना रोचक होगा कि इस बार उनकी दमदारी क्या गुल खिलाती है।
वाराणसी के पिंडरा से अजय राय
वहीं वाराणसी के पिंडरा विधानसभा सीट से कांग्रेस के टिकट पर अजय राय मैदान में हैं। राय तीन बार बीजेपी, एक बार निर्दल और एक बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं। पिछली बार मोदी लहर में उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा था। अबकी दफा कांग्रेस ने उन पर फिर से भरोसा जताया है। राय की पहचान भी ताकतवर नेता के रूप में की जाती है।

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