Kerala Assembly Elections 2021 : वोटों की पटरी पर 'मेट्रो मैन' को 'हरी झंडी' का इंतजार

Kerala Assembly Elections 2021 : बड़ा संघर्ष: पलक्कड़ के बहुसंख्यकों को एकजुट करना चुनौती

By: सुनील शर्मा

Published: 05 Apr 2021, 11:34 AM IST

- हरेन्द्रसिंह बगवाड़ा

Kerala Assembly Elections 2021 : 'मेट्रो मैन' के नाम से मशहूर ई श्रीधरन केरल के पलक्कड़ से चुनाव मैदान में हैं। रात ज्यादा होने के कारण मैंने उनके मोबाइल पर अपना परिचय देते हुए मैसेज भेजा कि कल उनसे मिलना चाहता हूं। हाथोंहाथ जवाब आया- दोपहर 12.30 बजे घर आ जाओ। देर रात तक जागना और तुरंत जवाब देना, वह भी उम्र के नौ दशक पूरे करने के बाद। बात बहुत छोटी है, लेकिन यह साबित करने के लिए काफी है कि उम्र सिर्फ नंबरों का खेल है।

अगले दिन जब उनके प्लैट पर पहुंचा तो वे कुछ कार्यकर्ताओं से मशविरा कर रहे थे। उनकी पत्नी राधा श्रीधरन भी साथ थीं। श्रीधरन सलेटी रंग के कुर्ते और परंपरागत मुंडू यानी धोती पहने हुए थे। इस उम्र में चुनाव लडने का ख्याल कैसे आया, इसके जवाब में उन्होंने कहा, काम तो अब भी उसी रफ्तार से कर रहा हूं। फर्क सिर्फ इतना सा है कि पहले दिल्ली में रह कर पूरे देश के लिए काम कर रहा था, अब अपने क्षेत्र की जनता के लिए काम करना है।

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हिंदू मतदाताओं पर असर
भाजपा के लिए पूरे केरल में सबसे मुफीद पलक्कड़ व तिरुवनंतपुरम जिला है। मुश्किल यह है कि नायर समेत अन्य हिंदू एकजुट नहीं हैं। यही कारण है कि पिछले चुनाव में भाजपा पलक्कड़ से 17 हजार मतों से हारी थी। ओ राजगोपालन ने भाजपा के लिए एकमात्र सीट निकाली थी। हालांकि पलक्कड़ नगर पालिका पर भाजपा काबिज है। पलक्कड़ जिले में विधानसभा की कुल 12 सीटें हैं। श्रीधरन के मैदान में उतरने से हिंदू मतदाता काफी हद तक एकजुट हैं।

जयपुर मेट्रो को किया याद
बातचीत के दौरान उन्होंने पूछा कि जयपुर में मेट्रो कैसे चल रही है। जब उन्हें जानकारी दी कि जयपुर मेट्रो पहले चरण से आगे नहीं बढ़ पाई, तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार ने जब मेट्रो को लेकर पहल की तो अब उन्हें गंभीरता से इस दिशा में काम भी करना चाहिए। काम होगा, तब ही मेट्रो को लाभ होगा।

दावा किया, केरल में बदलाव की लहर
श्रीधरन ने इस बात पर रोष व्यक्त किया कि केरल में कांग्रेस और वामपंथी बारी-बारी से सरकारी धन को लूट रहे हैं। 40 से अधिक सीटें जीतने का दावा करते हुए उन्होंने कहा, केरल में बदलाव की लहर है। मुस्लिम और ईसाइयों की करीब आधी आबादी वाले केरल में भाजपा की दाल कैसे गलेगी, जवाब में उन्होंने उल्टा सवाल किया कि केरल में 27 सीटों पर मुस्लिम लीग चुनाव लड़ रही है, उन्हें सांम्प्रदायिक क्यों नहीं कहा जाता। शरारतपूर्ण राजनीति के चलते भाजपा पर कम्यूनल होने का टैग लगाया जाता रहा है। क्या आपका नब्बे साल की उम्र में चुनाव लडऩा परिवार को नहीं अखरता, सबसे पहले तो उन्होंने मुझे टोका कि मेरी उम्र 90 नहीं, 88 साल है। फिर मुस्कुराते हुए उन्होंने पत्नी को देखा और कहा, मेरे तीनों बेटे और बेटी इसके विरोध में थी। लेकिन पत्नी ने मेरा सपोर्ट किया। मैंने बच्चों की बजाय पत्नी को अहमियत दी।

क्षेत्र के 57 फीसदी हिंदू वोटरों पर टिकी है चुनावी मेट्रो
वैसे मेट्रो मैन की चुनावी मेट्रो उनकी विधानसभा सीट के 57 फीसदी हिंदू मतदाताओं की हरी झंडी के इंतजार में है। श्रीधरन हिंदू बहुल पलक्कड़ के निकटवर्ती मालप्पुरम के मूल निवासी हैं। उनका पुश्तैनी घर भी वहीं है। पलक्कड़ में जिस फ्लैट में वे रह रहे हैं, वह पार्टी ने उन्हें उपलब्ध करवाया है। इतना ही नहीं, भाजपा ने उन्हें केरल में मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाया है। हालांकि केरल में भाजपा का सत्ता में आना किसी सपने की तरह है। पहले कोंकण रेलवे, फिर दिल्ली मेट्रो के जरिए अपनी तकनीक कार्यकुशलता का लोहा मनवा चुके श्रीधरन का चुनावी समर में कूदना केरल की जनता के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं है। सभी जाति व वर्ग में उनका सम्मान है।

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सुनील शर्मा
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