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Uttar Pradesh Assembly Elections 2022: मेधावी छात्र बृजेश जो पिता की हत्या के बाद अपराध की दुनिया में आया और बन गया अंडरवर्ल्ड डॉन का खास

Uttar Pradesh Assembly Elections 2022: पूर्वांचल के माफिया से माननीय बनने वालों में बड़ा नाम है वाराणसी के चोलापुर निवासी बृजेश सिंह का। वो बृजेश जो छात्र जीवन में मेधावी छात्र रहा, लेकिन पिता की हत्या ने उसे जरायम की दुनिया में ऐसा धकेला कि वो अंडर वर्ल्ड डॉन दाउद का खास हो गया। जानते हैं ऐसे ही पूर्वांचल के अन्य बाहुबलियों को...

वाराणसी

Published: December 24, 2021 04:20:20 pm

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

वाराणसी. बृजेश सिंह, एक मेधावी छात्र, जिसने 1984 में 12वीं की परीक्षा में अच्छे नंबर से उत्तीर्ण की। फिर बीएससी करने के लिए उदय प्रताप महाविद्यालय में दाखिला ले लिया। लेकिन शायद ऊपर वाले को ये मंजूर न था। 27 अगस्त 1984 को वाराणसी के धरहरा गांव में बृजेश के पिता रविंद्रनाथ सिंह की हत्या कर दी गई और यहीं से बृजेश सिंह के जीवन का नया अध्याय शुरू हुआ और वो अंडर वर्ल्टड डॉन दाउद इब्राहिम के खास आदमी बन गए। हालांकि वर्तमान में वो वाराणसी क्षेत्र से विधान परिषद सदस्य हैं। हालांकि बृजेश उन दबंग राजनेताओं में से हैं जिनका चुनावी सफर हार से शुरू हुआ।
पूर्वांचल के दबंग राजनेता
पूर्वांचल के दबंग राजनेता
पिता की हत्या का बदला लेने का विचार लाया जरायम की दुनिया में

पिता की हत्या के बाद बृजेश बिल्कुल बदल गया। उसका मकसद बस पिता की हत्या का बदला लेना बन गया। बृजेश सिंह के पिता की हत्या का आरोप उनके राजनीतिक प्रतिद्वंदी हरिहर सिंह और पांचू सिंह के साथियों पर लगा। ऐसे में किशोरवय बृजेश पिता की हत्या का बदला लेने की फिराक में जुट गए। फिर वो दिन भी आया जब 27 मई 1985 को हरिहर सिंह की हत्या हो गई। आरोप बृजेश सिंह पर लगा, तब पहली बार बृजेश सिंह पर पहला मुकदमा दर्ज हुआ। इसके साथ ही बृजेश सिंह ने जरायम की दुनिया में कदम रखा।
बृजेश और मोख्तार के बीच पूर्वांचल में शुरू हुआ गैंगवार

फिर पूर्वांचल में शुरू हुआ बृजेश बनाम मोख्तार का गैंगवार। तब मोख्तार अंसारी, मकनु सिंह के गैंग से जुड़ा था और बृजेश, साहिब सिंह गैंग से। कालांतर में मोख्तार और बृजेश सिंह ने अपना गैग बना लिया। पेशेवर रूप में दोनों का एक ही धंधे से जुड़े रहने के चलते दोनों के बीच व्यावसायिक प्रतिद्वंद्विता बढ़ती गई। एक ठेके को हासिल करने के चक्कर में दोनों आमने-सामने आए। इस बीच बृजेश सिंह 90 के दशक में अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद के संपर्क में आया। बृजेश सिंह को दाउद इब्राहिम ने अपने जीजा इब्राहिम कासकर की हत्या का बदला लेने की जिम्मेदारी दी और 12 फरवरी 1992 मुंबई के जेजे अस्पताल बृजेश डॉक्टर बनकर घुसा। दाउद के जीजा को मारने वाले गवली गैंग के 4 लोगों पर ताबड़तोड़ गोलीबारी की। उसके बाद बृजेश सिंह दाउद के और करीब आ गया। लेकिन 1993 मुंबई बम ब्लास्ट के बाद दोनों के बीच विवाद हो गया, तब बृजेश सिंह वापस पूर्वांचल और दूसरी जगहों पर अपना विस्तार किया।
धनंजय सिंह जिन पर 1990 में लगा पहला हत्या का आरोप

धनंजय सिंह के ऊपर सबसे पहले 1990 में लखनऊ के महर्षि विद्या मंदिर के एक पूर्व शिक्षक गोविंद उनियाल की हत्या का आरोप लगा। हालांकि, उस मामले में आरोप साबित नहीं हुआ। लेकिन इसी दौरान धनंजय राजनीति में सक्रिय हो गए। इंटर पास करने के बाद धनंजय स्नातक डिग्री हासिल करने लखनऊ यूनिवर्सिटी चले गए। यहीं से उन्होंने ठेकेदारी शुरू की। इसके बाद धनंजय के ऊपर कई आपराधिक मामले लदते गए। 1997 में धनंजय ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी किया।
धनंजय का राजनीतिक सफर

धनंजय पहली बार 2002 में लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर जौनपुर के रारी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। इसके बाद उनका सियासी ओहदा बढ़ता ही गया। 2004 में कांग्रेस और लोक जनशक्ति पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर लोकसभा का चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। फिर 2007 में जनता दल यूनाइटेड में शामिल हो गए। उसके बाद रारी से विधायक बने। एक साल बाद ही उन्होंने फिर से पार्टी बदली और बसपा का दामन थाम लिया। वह 2009 में पहली बार बसपा के टिकट से लोकसभा पहुंचे। वहीं, परिसीमन के बाद रारी के स्थान पर बनी मल्हनी विधानसभा से पिता राजदेव सिंह को विधायक बनाया।
पत्नी जागृति पर लगा नौकरानी की हत्या का आरोप, मिली जेल

इसी बीच उनकी पत्नी जागृति सिंह पर नौकरानी की हत्या का आरोप लगा। इस मामले में पति और पत्नी दोनों को जेल जाना पड़ा। 2012 में ही जागृति ने मल्हनी से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। इसके बाद फिर धनंजय कभी विधायक नहीं बन पाए। आखिरी बार वह 2020 में चुनाव लड़े पर पूर्व मंत्री पारसनाथ यादव के बेटे लकी यादव से कांटे की टक्कर में हार गए।
धनंजय पर 33 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं

- अक्टूबर 1998 में पुलिस ने दावा किया था कि भदोही-मिर्जापुर रोड पर स्थित पेट्रोल पंप में डकैती डालने जा रहे धनंजय सहित 4 बदमाश मुठभेड़ में मारे गए। फरवरी 1999 में धनंजय अदालत में पेश हुए तो भदोही जिले की फर्जी मुठभेड़ का खुलासा हुआ और 34 पुलिस कर्मियों पर मुकदमा दर्ज हुआ।
- फिलहाल लखनऊ में मऊ के पूर्व ब्लाक प्रमुख अजीत सिंह हत्याकांड में वांछित 25 हजार के इनामी धनंजय सिंह के खिलाफ वाराणसी, जौनपुर सहित अन्य जिलों में 33 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं।
विनीत सिंह ने 2010 में शुरू किया राजनीतिक सफर

वाराणसी के चोलापुर ब्लाक के गोला गांव निवासी श्यामनारायण उर्फ़ विनीत सिंह ने 2010 में बसपा के टिकट पर सोनभद्र-मिर्जापुर एमएलसी सीट से राजनीतिक सफर की शुरूआत की। फिर 2017 में रांची जेल में निरुद्ध रहते हुए चंदौली जिले की सैयदराजा सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन बीजेपी प्रत्याशी सुशील सिंह से हार गए।
विनीत ने 2019 में चंदौली लोकसभा से भी दावेदारी जताई लेकिन ऐन वक्त पर पीछे हटकर भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद अपने करीबी को सोनभद्र जिला पंचायत अध्यक्ष बनवा कर खुद को एक बार फिर से पूर्वांचल की सियासत में स्थापित किया। दरअसल मिर्जापुर में जिला पंचायत अध्यक्ष का पद पर लगातार 10 वर्ष से काबिज उनकी पत्नी इस बार सीट आरक्षित होने के कारण, चुनावी दौर से बाहर हो गईं तो विनीत सिंह को सोनभद्र में जिला पंचायत अध्यक्ष का दावेदार बनने की अटकलें लगने लगी थीं।
विनीत सिंह ने देखा कि मिर्जापुर में इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष का पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित नहीं है तो वह अपने करीबी राजू कन्नौजिया को भाजपा प्रत्याशी बनवा कर जीत दिलाने में सफल रहे। साल 2017 के विधानसभा चुनाव के बाद विनीत का नाम विवादों में नहीं आया है।
विनीत सिंह पर 12 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं
- विनीत सिंह के खिलाफ वाराणसी से लेकर बिहार और झारखंड तक गंभीर आपराधिक आरोपों में डेढ़ दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं।

सुशील सिंह को विरासत में मिली राजनीति
सुशील सिंह ने 2002 में बसपा के टिकट पर धानापुर विधानसभा सीट से राजनीतिक सफर शुरू किया पर उन्हें नजदीकी मुकाबले में केवल 26 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। पांच साल बाद सुशील सिंह ने 2007 में पहली बार चंदौली की धानापुर विधानसभा से पुनः दावा ठोंका और इस बार वह विधायक निर्वाचित हुए। उस दौरान दाखिल शपथ पत्र के अनुसार सुशील सिंह के खिलाफ 14 मुकदमे दर्ज थे।
2017 के मोदी लहर में सुशील सैयदराजा विधानसभा से दोबारा विधायक बने। तब उनके शपथ पत्र के अनुसार नई दिल्ली, भदोही, चंदौली और वाराणसी जिले में पांच मुकदमे दर्ज रहे।

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