scriptMinister Kaushal Kishore urges to drop caste based surname | UP Assembly Elections 2022 : केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की अच्छी पहल, जाति टैग वाले उपनामों को हटाने के लिए संसद में रखा प्रस्ताव | Patrika News

UP Assembly Elections 2022 : केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की अच्छी पहल, जाति टैग वाले उपनामों को हटाने के लिए संसद में रखा प्रस्ताव

UP Assembly Elections 2022 : केंद्रीय राज्यमंत्री और मोहनलालगंज से सांसद कौशल किशोर ने कहा कि जो लोग बाबा साहेब का सम्मान करते हैं, वे जाति और रंग के आधार पर दूसरों को नहीं आंकते हैं। उन्होंने कहा कि अस्पृश्यता के सामाजिक संकट को मिटाने के लिए बाबा साहेब के किए महान कार्यो के कारण उन्हें बौद्धगुरु माना जाता था। आम्बेडकर के प्रशंसक और अनुयायी मानते हैं कि वह भगवान बुद्ध के समान प्रभावशाली थे, यही वजह है कि उनकी पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।

लखनऊ

Published: December 07, 2021 05:07:08 pm

लखनऊ. UP Assembly Elections 2022 : केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के राज्यमंत्री कौशल किशोर ने एक नई और सराहनीय पहल की शुरूआत कर समाज को एक अच्छा संदेश देने की कोशिश की है। केंद्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि जाति टैग वाले उपनामों को किसी के नाम से हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हालांकि यह कई लोगों के लिए कठिन है, लेकिन कम से कम जो लोग डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर की विचारधारा में विश्वास करते हैं, उन्हें यह अभ्यास शुरू करना चाहिए। कौशल किशोर ने डॉ. आम्बेडकर इंटरनेशनल सेंटर में महापरिनिर्वाण दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि वह इस संबंध में संसद के समक्ष एक प्रस्ताव भी रख चुके हैं।
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जाति और रंग के आधार पर आंकना गलत

उन्होंने कहा कि जो लोग बाबा साहेब का सम्मान करते हैं, वे जाति और रंग के आधार पर दूसरों को नहीं आंकते हैं। कौशल किशोर ने कहा कि अस्पृश्यता के सामाजिक संकट को मिटाने के लिए बाबा साहेब के किए महान कार्यो के कारण उन्हें बौद्धगुरु माना जाता था। आम्बेडकर के प्रशंसक और अनुयायी मानते हैं कि वह भगवान बुद्ध के समान प्रभावशाली थे, यही वजह है कि उनकी पुण्यतिथि को महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
समाज को निभानी होगी अहम भूमिका

लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार रंजीव नाम के आगे जाति न लिखने को अच्छा मानते हैं, लेकिन उनका कहना है कि यह एक बहुत बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि नाम के आगे जाति न लिखने की प्रथा को समाप्त करने के लिए सबसे बड़ी भूमिका समाज की होगी या फिर इसके लिए संसद में कानून लाया जाये। उन्होंने कहा कि नाम के आगे जाति लिखने से ऊंच-नीच का भाव आता है, जो गलत है।
आचार्य विनोबा भावे, जय प्रकाश भी नहीं थे इसके पक्ष में

रंजीव ने बताया कि चुनाव से पहले इस तरह की बातें सामने आती रहती है और चुनाव खत्म होते ही लोग भूल जाते हैं। वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि सांसद कौशल किशोर की यह पहल अच्छी है, लेकिन इसके पीछे उनकी मंशा क्या है, ये तो वहीं बता सकते है। उन्होंने बताया कि आचार्य विनोबा भावे, जयप्रकाश जैसे कई बड़े समाजसेवी और नेता भी इसके विरोधी रहे हैं और उनकी इस पहल पर सैकड़ों लोगों ने अपने नाम के आगे जाति लिखना बंद कर दिया था। उन्होंने कहा कि यह एक अच्छा कदम है, लेकिन इसे समाप्त करने के लिए समाज को अहम भूमिका निभानी होगी।
कांग्रेस ने बताया चुनावी स्टंट

कांग्रेस के प्रदेश मीडिया संयोजन लल्लन कुमार का कहना है कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री और मंत्रियों से लेकर भाजपा नेता विधानसभा चुनाव में अपनी पराजय को देखते हुए बेतुके बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि कौशल किशोर का यह बयान महज एक चुनावी स्टंट है।

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