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UP Assembly ELections 2022 : यूपी में आसान नहीं गठबंधन की डगर, सीट बंटवारे पर फंस सकता है पेंच

UP Assembly ELections 2022 : यूपी में चली आ रही गठबंधन की सियासत पर वरिष्ठ पत्रकार रंजीव का कहना है कि आज के दौर में गठबंधन सियासी दलों के नियति बन चुकी है। भाजपा जैसे बड़े दल भी गठबंधन के सहारे चुनाव लड़ रहे है। उनका कहना है कि सियासी दल फौरी तौर पर अपना नफा-नुकसान देते हुए गठबंधन कर लेते हैं।

लखनऊ

Updated: November 08, 2021 05:43:43 pm

लखनऊ. UP Assembly ELections 2022- उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा के आम चुनाव के लिए कांग्रेस के लिए गठबंधन की राह आसान नहीं नजर आ रही है। यूपी में बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस के साथ आने को तैयार नहीं है, तो वहीं राष्ट्रीय लोकदल यूपी में कांग्रेस की स्थिति देख गठबंधन करने से कतरा रही है। हालांकि 2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान हुए समाजवादी पार्टी और रालोद का गठबंधन अभी भी बरकरार है और माना जा रहा है इस गठबंधन की औपचारिक घोषणा आगामी २१ नवंबर को सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर कर दी जाएगी। उधर भारतीय जनता पार्टी भी अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर गठबंधन को अंतिम रूप देने में लगी हुई है। हालांकि राजनीति के जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर पेंच फंस सकता है।
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कांग्रेस को यूपी में नए साथी की है तलाश

उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव की वैतरणी पार करने के लिए सभी सियासी दल अपनी-अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। वहीं कांग्रेस भी इसको को लेकर पीछे नहीं है। उत्तर प्रदेश में नए सहयोगियों की तलाश में जुटी कांग्रेस को बसपा और रालोद से गठबंधन होने की उम्मीद थी। लेकिन बताया जाता है पंजाब और अन्य कई मामलों को लेकर बहुजन समाज पार्टी कांग्रेस के साथ आना नहीं चाहती है।
रालोद के लिए मजबूरी है समाजवादी पार्टी से गठबंधन

उधर रालोद और समाजवादी पार्टी के बीच पहले से चले आ रहे गठबंधन को रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी तोड़ना नहीं चाहते हैं। जानकारों की माने तो जयंत जानते हैं कि कांग्रेस की अभी उत्तर प्रदेश में स्थिति अच्छी नहीं है और उन्हें 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन का कोई विशेष लाभ नहीं मिलेगा। हालांकि बीते 31 अक्टूबर को लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी के बीच करीब एक घंटे तक बातचीत हुई थी। जिसको लेकर दोनों के बीच गठबंधनों की लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई थी।
बसपा यूपी में अकेले चुनाव लड़ने का कर चुकी है एलान

जानकारों के अनुसार बिना बसपा के कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन का कोई महत्व नहीं है। क्योंकि कांग्रेस अभी भी उत्तर प्रदेश में अपनी खोयी हुई जमीन तलाशने में जुटी है और राष्ट्रीय लोकदल क पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलावा प्रदेश में कहीं कोई वजूद नहीं है। वहीं बसपा में यूपी में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए किसी भी राजनीतिक दल से गठबंधन किए जाने से साफ इंकार कर चुकी है। 2019 के लोकसभा के चुनाव के बाद सपा से बसपा का गठबंधन टूटने के बाद पार्टी सुप्रीमो मायावती ने एलान किया था कि बसपा उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव अकेली ही लड़ेगी।
सुभासपा को छोड़ पुराने सहयोगियों के साथ लड़ेगी भाजपा

अगर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को छोड़ दे तो भारतीय जनता पार्टी अपने पुराने सहयोगियों अपना दल (एस), निषाद पार्टी आदि दलों के साथ मिलकर ही 2022 का विधानसभा का चुनाव लड़ेगी। जिसको लेकर भाजपा सहयोगियों के साथ सीटों को लेकर जल्द ही अंतिम रूप दे देगी।
21 नवंबर को होगा सपा और रालोद के गठबंधन का एलान

वहीं समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच गठबंधन को लेकर आगामी 21 नवंबर को सपा संस्थापक मुलायम सिंह के यादव के जन्मदिन पर औपचारिक मुहर लग सकती है। क्योंकि दोनों दलों के बीच 2019 के लोकसभा के चुनाव से गठबंधन चला रहा है। हालांकि दोनों के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है। यूपी में समाजवादी पार्टी सुभासपा, रालोद और अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है।
सियासी दलों की नियति बन चुका है गठबंधन

यूपी में चली आ रही गठबंधन की सियासत पर वरिष्ठ पत्रकार रंजीव का कहना है कि आज के दौर में गठबंधन सियासी दलों के नियति बन चुकी है। भाजपा जैसे बड़े दल भी गठबंधन के सहारे चुनाव लड़ रहे है। उनका कहना है कि सियासी दल फौरी तौर पर अपना नफा-नुकसान देते हुए गठबंधन तो कर लेते हैं, लेकिन दावेदारी और टिकट बंटवारे को लेकर अक्सर पेंच फंसता है। उन्होंने ने 2017 में हुए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन का उदाहरण भी दिया।उन्होंने कहा कि पूर्व में हुए चुनावों में देखा गया है कि कहीं सपा प्रत्याशी रालोद के चुनाव चिन्ह पर और कहीं रालोद प्रत्याशी सपा के सिंबल चुनाव लड़ते देखे गए।

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