UP Assembly Elections 2022 : ओम से 'ओम' को हराएंगे ओवैसी, अखिलेश एमवाई के सहारे

UP Assembly Elections 2022- एआइएमआइएम और समाजवादी पार्टी का चुनाव जीतने का नया फार्मूला

By: Hariom Dwivedi

Published: 16 Sep 2021, 04:47 PM IST

लखनऊ. UP Assembly Elections 2022- यूपी विधानसभा चुनाव के लिए अब प्रत्याशियों की तलाश शुरू हो गयी है। इसी के साथ राजनीतिक दल जीत के नए समीकरण बनाने में जुट गए हैं। एआइएमआइएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने यूपी जीतने के लिए नया गेम प्लान तैयार किया है। वह 'ओम' के नारे के साथ चुनावी मैदान में उतरेंगे और इसी के सहारे ओम यानी भाजपा को हराने का काम करेंगे। इसी तरह अखिलेश यादव ने अब एमवाई के फार्मूले को नए सिरे से परिभाषित किया है। एम यानी मुस्लिम और वाई जिसे अब तक यादव समझा जा रहा था। इस अवधारणा को बदलते हुए अखिलेश ने इनके मायने कुछ और बताए हैं।

मुस्लिमों से बुलवाएंगे ओम
ओवैसी यूपी चुनाव में ओम के नाम को भुनाना चाहते हैं। इसके लिए उनकी रणनीति ओम के सहारे ज्यादा से ज्यादा मुसलमानों के बीच अपनी पैठ बनाने की है। मास्टर प्लान के तहत वह यूपी में कट्टर मुस्लिमों से 'ओम' का जयकारा लगवाएंगे। 'ओम' यानी अंग्रेजी में ओएएम। 'ओ' का मतलब ओवैसी, 'ए' का मतलब अतीक अहमद, 'एम' का मतलब मुख्तार अंसारी से है। पूर्व बाहुबली सांसद अतीक अहमद गुजरात की अहमदाबाद जेल में बंद हैं। उनकी पत्नी एआइएमआइएम में शामिल हो चुकी हैं वहीं, लगातार पांच बार के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी बांदा जेल में बंद हैं।

जज्बाती तौर पर पार्टी से जोडऩे की कोशिश
ओवैसी मुस्लिम चेहरों को सामने रखकर आम मुसलमानों को जज्बाती तौर पर अपनी पार्टी से जोडऩे की फिराक में हैं। वह जानते हैं कि यूपी में इन दिनों मुस्लिम लीडरशिप का अभाव है। इसीलिए वह 'ओम' (ओवैसी, अतीक, मुख्तार) फॉर्मूले पर फोकस कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि अतीक और मुख्तार के परिवार के ज्यादा से ज्यादा लोग चुनाव लड़े। मुस्लिम वोटरों के बीच प्रचार करने जाएं और उनके लिए सियासी जमीन तैयार करें। इस बीच वह मुस्लिमों को बताएंगे कि दूसरी सेक्युलर पार्टियों ने अपने फायदे के लिए उनका खूब इस्तेमाल तो किया, लेकिन बुरे वक्त में उनसे दूरी बना ली। परिणाम कुछ भी हो लेकिन 'ओम' की एंट्री ने यूपी की सियासत में हलचल मचा दी है।

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'एम' का मतलब महिला 'वाई' का युवा
समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने एमवाई (मुस्लिम -यादव) समीकरण को नयी परिभाषा दी है। उन्होंने कहा है, एम का मतलब महिला और वाई का मतलब युवा है। इन दोनों को साथ लेकर चुनाव लड़ेगे। यह नई सपा है। नया रास्ता अपनाया जा रहा है। अखिलेश यादव ने कहा, उत्तर प्रदेश के नवनिर्माण, किसान हित और रोजगार के मुद्दे पर चुनाव लड़ेगे। भाजपा के शासन से आजिज आई जनता इस बार सपा की ओर देख रही है।

चाचा की पार्टी अलग लेकिन रिश्ते का भरपूर सम्मान
परिवारवाद के आरोपों को सिरे से काटते हुए सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहाकि, परिवारवाद तो भाजपा में है। वहां जिन लोगों ने काम करते हुए पूरा जीवन बिता दिया, उनके बजाय किसी और को मुख्यमंत्री बनाया जाता है। उन्होंने कहाकि, सपा में हमेशा संघर्ष करने वालों को जगह मिली है। चाचा और उनकी पार्टी अलग-अलग है। शिवपाल सिंह यादव का रिश्ते के लिहाज से पूरा सम्मान है। समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ गठबंधन हो रहा है। अन्य बड़ी पार्टियों से गठबंधन नहीं।

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