scriptup elections etawah seat profile samajwadi party traditional seat | इटावा सदर में जिस दल की तरफ झुका ब्राह्मण वही बनता है विजेता | Patrika News

इटावा सदर में जिस दल की तरफ झुका ब्राह्मण वही बनता है विजेता

UTTAR PRADESH ASSEMBLY ELECTIONS 2022 इटावा जिले में विधानसभा की तीन सीट हैं- इटावा सदर, जसवंतनगर और भरथना। सदर सीट पर 1993 से लेकर 2017 तक समाजवार्दी पार्टी का कब्जा रहा है। 2017 में बीजेपी ने सपा से इस किले में सेंध लगाई थी।

इटावा

Published: November 04, 2021 12:07:13 pm

Uttar Pradesh Assembly elections 2022 . इटावा, पत्रिका न्यूज नेटवर्क. यूपी में इटावा की पहचान धार्मिक-ऐतिहासिक के साथ ही पर्यटन के लिहाज से भी है। यहां अब लॉयन सफारी भी बनकर तैयार हो गई है। इटावा जिले में विधानसभा की तीन सीट हैं- इटावा सदर, जसवंतनगर और भरथना। सदर सीट पर 1993 से लेकर 2017 तक समाजवार्दी पार्टी का कब्जा रहा है। 2017 में बीजेपी ने सपा से इस किले में सेंध लगाई थी।
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etawah seat
23 साल तक सपा का वर्चस्व
इस सीट पर 23 सालों तक सपा का वर्चस्व रहा, जिसे 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने तोड़ दिया। इस चुनाव में भाजपा ने सरिता भदौरिया को चुनाव में उतारा तो वहीं सपा की तरफ से कुलदीप गुप्ता संटू चुनाव में थे। सपा के इस गढ़ में बीजेपी ने सेंध लगा दी और सरिता भदौरिया ने 17 हजार 342 वोटों के अंतर से सपा के कुलदीप गुप्ता को चुनाव हरा दिया।
सपा के किले में लगाई सेंध
इटावा सदर सीट समाजवादी पार्टी की परंपरागत सीट मानी जाती रही है। मुलायम सिंह यादव के समय से ही इस सीट पर सपा का कब्जा रहा है। हालांकि 2017 में बीजेपी ने सपा के प्रत्याशी को पटखनी देकर उसका वर्चस्व तोड़ दिया। 2017 के विधानसभा चुनाव में सरिता भदौरिया को 91,234 वोट मिले, जबकि कुलदीप गुप्ता को 73,892 वोट मिले। वहीं 2012 में इस सीट से सपा के रघुराज सिंह शाक्य विधायक थे। 2002 से 2007 में सपा के ही महेंद्र सिंह राजपूत विधायक रहे। इटावा जिले में शिवपाल यादव का ही दखल रहता है्र। जब अखिलेश यादव सूबे के मुखिया थे तब भी इटावा जिले को शिवपाल ही संभाल रहे थे।
निर्णायक भूमिका में हैं ब्राह्मण
यह सीट ब्राह्मण बहुल सीट है और किसी भी पार्टी की जीत-हार में ये निर्णायक भूमिका में रहते हैं। वहीं शहर में व्यवसायी वर्ग भी चुनाव के नतीजों को प्रभावित करता है। इन्हीं दो समुदायों का बीजेपी को भी 2017 में फायदा मिला है। इस सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या करीब तीन लाख 40 हजार है। जातीय आंकड़ों की बात करें तो ब्राह्मण यहां निर्णायक भूमिका में रहते हैं। इस सीट के बारे में कहा जाता है कि जिधर झुका ब्राह्मण, सीट उसी की झोली में। इसीलिए सभी पार्टियां यहां ब्राह्मण समाज को अपनी ओर खींचने में लगी रहती हैं। यहां ब्राह्मण वोटर्स की संख्या करीब 65 हजार है। उसके बाद ठाकुर समाज का करीब 38 हजार वोट है। वैश्य 25 हजार, यादव और लोधी 35-35 हजार, शाक्य 25 हजार, मुस्लिम 42 हजार और अन्य में करीब 30 हजार हैं।

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