सरकारी कर्मचारिओं को मिल सकती हैं आईटी रिटर्न दाखिल करने में राहत - संसदीय समिति

ऐसे कर्मचारी जो पहले से सरकारी पदों पर नियुक्त हैं, उन्हें यह घोषणा 31 जुलाई, 2018 या उससे पहले ही कर देनी होगी।

नई दिल्ली। सरकारी कर्मचारियों को अपनी संपत्तियों और देनदारियों का ब्योरा देने के लिए साल में सिर्फ एक रिटर्न भरना पड़ सकता है। इसका सुझाव संसदीय समिति ने दिया है। इस समय लोकपाल कानून के तहत कई रिटर्न भरने की अनिवार्यता है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा तैयार संशोधित मसौदे में कहा गया है कि अब एक सरकारी कर्मचारी जिनमें मंत्री भी शामिल हैं, सभी को पद पर आने के छह महीने के भीतर अपनी संपत्तियों और देनदारियों की घोषणा करनी होगी। ऐसे कर्मचारी जो पहले से सरकारी पदों पर नियुक्त हैं, उन्हें यह घोषणा 31 जुलाई, 2018 या उससे पहले ही कर देनी होगी।

संसदीय समिति ने कहा कि इसके अलावा किसी सरकारी कर्मचारी को ब्योरे या पूर्व में की गई घोषणा में किसी तरह का बदलाव होता है तो इस बदलाव के छह महीने के भीतर संशोधन होने की घोषणा करनी होगी। ऐसे में समय-समय पर घोषणा के प्रावधान को समाप्त किया जा रहा है।

जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधियों को बार-बार घोषणा करने में परेशानी हो रही थी , क्योंकि वेतन के अलावा उनकी कमाई के अन्य स्रोत भी हो सकते हैं। ऐसे में उन्हें कई बार यह घोषणा करनी पड़ती है। संसद की कार्मिक , लोक शिकायत , विधि और न्याय पर स्थायी समिति ने इस घोषणा को निर्धारित समय पर दाखिल करने की सिफारिश की है। समिति ने कहा कि इससे सरकारी कर्मचारी के लिए साल में एक रिटर्न भरने की जरूरत होगी , जिसमें कई लेन-देन का उल्लेख हो सकता है। इससे घोषणा दाखिल करने की प्रक्रिया सरल हो जाएगी और कर्मचारिओं को राहत मिलेगी।

इसके साथ ही सरकारी कर्मचारी और सक्षम प्राधिकरण के लिए समय और प्रयासों की भी बचत हो सकेगी। यदि सरकारी कर्मचारी की संपत्तियों और देनदारियों में बदलाव नहीं होता है तो उसे उस साल के लिए रिटर्न भरने की कोई जरूरत नहीं होगी और पहले के रिटर्न को ही मान लिया जाएगा।

विकास गुप्ता
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