'इंदु सरकार' के 14 सीन पर चली सेंसर बोर्ड की कैंची, मधुर भंडारकर हुए निराश, कहा- "कुछ भी बदलने से फिल्म प्रभावित होगी"
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| Updated: 12 Jul 2017, 11:44:00 AM (IST)
'इंदु सरकार' के 14 सीन पर चली सेंसर बोर्ड की कैंची, मधुर भंडारकर हुए निराश, कहा-

केंद्रीय फिल्म एवं प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) ने मधुर भंडारकर की फिल्म 'इंदु सरकार' में 12 कट लगाने और दो जगह डिस्क्लैमर देने के लिए कहा है, जिससे फिल्मकार सकते में हैं क्योंकि उन्हें डर है कि इससे फिल्म के सार पर प्रभाव पड़ेगा।

मधुर भंडारकर ने 1975 के आपातकाल की पृष्ठभूमि पर बनी फिल्म सोमवार को केंद्रीय फिल्म एवं प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) को दिखाई, जिसने फिल्म में 12 कट लगाने और दो जगह डिस्क्लैमर देने के लिए कहा, जिससे फिल्मकार सकते में हैं। सेंसर बोर्ड की इस बात से नाखुश भंडारकर का कहना है कि वह फिल्म 'इंदु सरकार' में कुछ भी बदलाव नहीं करना चाहते, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे फिल्म के सार पर प्रभाव पड़ेगा। सेंसर बोर्ड ने फिल्म से आरएसएस और अकाली जैसे शब्दों को हटाने के लिए कहा है।



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भंडारकर ने अपने अगले कदम के बारे में पूछे जाने पर बताया, ''मैं कुछ भी बदलाव नहीं करना चाहता, क्योंकि इससे मेरी फिल्म का सार प्रभावित हो सकता है। हम पुनरीक्षण समिति के पास जाएंगे। उम्मीद करते हैं कि इसे मंजूरी दे दी जाएगी, अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर हमारे पास अपीलीय न्यायाधिकरण के पास जाने के अलावा और कोई रास्ता नहीं होगा।"



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सेंसर बोर्ड ने 'भारत की एक बेटी ने देश को बंदी बनाया हुआ है' व 'और तुम लोग जिंदगीभर मां-बेटे की गुलामी करते रहोगे' जैसे संवादों को भी हटाने के लिए कहा है। किशोर कुमार, आईबी, पीएम, सेक्शन ऑफिसर, आरएसएस, अकाली, कम्युनिस्ट और जयप्रकाश नारायण जैसे शब्दों पर भी कैंची चली है। 




फिल्म निर्माता ने अपने ट्वीट में कहा कि वह ट्रेलर में इन शब्दों की अनुमति देने लेकिन फिल्म में उन्हें काटने का तर्क नहीं समझ पा रहे हैं। इससे पहले मधुर भंडारकर ने सोमवार शाम को ट्वीट कर कहा, ' 'इंदु सरकार' की सेंसर स्क्रीनिंग से बाहर निकला हूं। मैं समिति द्वारा 14 कट लगाए जाने को कहे जाने से हैरान हूं। पुनरीक्षण समिति के पास जाऊंगा।'




भंडारकर ने यह पूछे जाने पर कि क्या कट लगाने के लिए कहना सीबीएफसी के राजनीतिक दृष्टिकोण का प्रतिबिंब है तो उन्होंने कहा, ''आपको उनसे पूछना चाहिए।" नील नितिन मुकेश, कीर्ति कुलहरि, सुप्रिया विनोद, अनुपम खेर और तोता रॉय चौधरी अभिनीत फिल्म के किरदार दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी से प्रेरित हैं।



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फिल्म को लेकर खुद को संजय गांधी की बेटी बताने वाली एक महिला प्रिया सिंह पॉल ने भी भंडारकर को नोटिस भेजा है। भंडारकर ने इससे पहले कहा था कि उनका एजेंडा इस फिल्म के जरिए किसी राजनीतिक विचारधारा का प्रचार करना नहीं है। फिल्म 28 जुलाई को रिलीज हो रही है। 

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